दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद पर इंडिया गठबंधन का विरोध, प्रियंका गांधी बोलीं— 'यही डर है, यही कायरता है'
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया गठबंधन के सांसदों ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के फैसले ने विपक्ष के गुस्से को और भड़का दिया। विपक्ष के 10 सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर अपनी माँगें रखीं।
विजय चौक पर विपक्ष का मोर्चा
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और गठबंधन के अन्य नेताओं ने विजय चौक पर एकजुट होकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। प्रियंका गांधी वाड्रा ने मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'इसको डर कहते हैं, इसको कायरता कहते हैं, इसको भय कहते हैं।' उनके इस बयान ने प्रदर्शनकारियों में नई ऊर्जा भर दी।
विपक्ष की तीन प्रमुख माँगें
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि सरकार का यह कदम कानून-व्यवस्था की पूर्ण विफलता है। उन्होंने कहा, '57 मेट्रो स्टेशन बंद कर रहे हैं, इंटरनेट बंद कर रहे हैं — इससे साफ होता है कि सरकार डरी हुई है।' उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में दिल्ली के आम नागरिक, कामकाजी लोग और नौकरीपेशा व्यक्ति कैसे अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएंगे। विपक्षी सांसदों ने सरकार के समक्ष तीन माँगें रखीं — सीईसी ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा, देश में चल रही SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को तत्काल रोकना, और बैलेट पेपर से चुनाव कराना।
सुक्खू का केंद्र पर निशाना
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मेट्रो बंदी के फैसले को लोकतंत्र-विरोधी बताया। उन्होंने कहा, 'आप चाहें तो कोई भी स्टेशन बंद कर दें, जनता सड़कों पर उतरेगी।' सुक्खू ने यह भी कहा कि यह आंदोलन उन लोगों के खिलाफ है जो 'वोट-चोरी' के जरिए सत्ता हथियाने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर पहले से ही सवाल उठाता रहा है।
तृणमूल कांग्रेस का तेज़ तेवर
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में सबसे कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, 'ज्ञानेश कुमार को जेल में डालना चाहिए। हमें यह पक्का करना होगा कि अगले कुछ सालों तक भारत में कोई दूसरा ज्ञानेश कुमार न हो।' यह टिप्पणी गठबंधन के अन्य नेताओं के बयानों से कहीं अधिक तीखी रही।
आगे क्या होगा
विपक्षी सांसदों की राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अब नज़रें सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। यह आंदोलन SIR प्रक्रिया और ईवीएम-बनाम-बैलेट पेपर बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ले आया है।