9 अक्टूबर 2026
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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा: इंडिया ब्लॉक का राष्ट्रपति भवन मार्च

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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा: इंडिया ब्लॉक का राष्ट्रपति भवन मार्च

सारांश

इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर राष्ट्रपति भवन मार्च का ऐलान किया है। विपक्ष का आरोप है कि सीईसी ने 13 करोड़ से अधिक नागरिकों के वोट काटकर लोकतंत्र के साथ धोखा किया। आंदोलन अब राष्ट्रीय आकार ले रहा है — छात्र और युवा संगठन भी दिल्ली कूच की तैयारी में हैं।

मुख्य बातें

इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने 9 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने और राष्ट्रपति से मुलाकात का ऐलान किया।
विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची से 13 से 13.5 करोड़ नागरिकों के नाम हटाए।
कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, सीईसी ने सर्वोच्च न्यायालय में 16 लाख नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की माँग रखी।
कांग्रेस, आरजेडी, सीपीआई (एम) सहित इंडिया ब्लॉक के सभी घटक दलों ने ज्ञानेश कुमार की तत्काल बर्खास्तगी की माँग की।
सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा, आने वाले दिनों में छात्र और युवा भी राजधानी में इस आंदोलन में शामिल होंगे।
भाजपा ने इंडिया ब्लॉक के इस आंदोलन को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।

इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने 9 अक्टूबर 2026 को ऐलान किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक वे पद नहीं छोड़ते। नई दिल्ली में विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने और राष्ट्रपति से मिलकर सीईसी को तत्काल बर्खास्त करने की माँग रखने की योजना की घोषणा की।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और माँगें

इंडिया ब्लॉक के नेताओं का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची से 13 से 13.5 करोड़ नागरिकों के नाम काटकर लोकतंत्र के साथ विश्वासघात किया है। विपक्ष का यह भी आरोप है कि सीईसी ने सर्वोच्च न्यायालय में 16 लाख नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की माँग रखी, जो संवैधानिक मतदान अधिकारों का हनन है।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर बहस पहले से तेज है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई कथित अनियमितताएँ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद को कमज़ोर करती हैं।

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, 'हम राष्ट्रपति से मिलना चाहते हैं। संविधान की रक्षक राष्ट्रपति से हम लोग लोकतंत्र की रक्षा और मताधिकार की रक्षा के लिए मिलना चाहते हैं। यह पूरी तरह से संवैधानिक है। हमें भरोसा है कि राष्ट्रपति हमसे जरूर मिलेंगी।' उन्होंने यह भी कहा कि 'भाजपा सरकार में लोकतंत्र की हत्या हो रही है, जिसके खिलाफ हम आंदोलन कर रहे हैं।'

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया, 'मुख्य चुनाव आयुक्त गद्दार और देशद्रोही हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए।' उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हत्या की साजिश रची जा रही है — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, '13 करोड़ लोगों के वोट काट दोगे, देश सवाल नहीं करेगा? यह जन आंदोलन बन चुका है, अब हर आदमी सवाल पूछने लगा है।'

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, 'तीन दिन नहीं, तीस दिन चलेगी, तीन हजार दिन चलेगी। हम लोग थकने वाले नहीं हैं, संघर्ष जारी रहेगा। ज्ञानेश कुमार, आपको इस्तीफा देना होगा। आपने 13.5 करोड़ लोगों का जो वोट काटा है, वह जोड़ दीजिए।'

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद सुधाकर सिंह ने कहा, 'आरजेडी का बहुत साफ स्टैंड है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हम लोगों का आंदोलन है। ये देश की लड़ाई है।'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा, 'आने वाले दिनों में दिल्ली की सड़कों पर समाज के दूसरे वर्ग भी इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में शामिल होते दिखेंगे। छात्र और युवा राजधानी आ रहे हैं। जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम जरा भी पीछे नहीं हटेंगे।' उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस मस्जिदों में जाकर मुसलमानों से आंदोलन में शामिल न होने की अपील कर रही है।

भाजपा और सरकार की स्थिति

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इंडिया ब्लॉक के इस आंदोलन को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। हालाँकि सरकार की ओर से सीईसी को हटाने या आंदोलन की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हुई। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा, 'जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त रहेंगे, तब तक भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाते रहेंगे।'

आगे की रणनीति

इंडिया ब्लॉक ने स्पष्ट किया है कि वे राष्ट्रपति भवन मार्च के बाद भी दबाव बनाए रखेंगे। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के अनुसार, पूरे देश में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं और 'उन्हें किसी भी हाल में जाना ही होगा।' जॉन ब्रिटास ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में छात्र और युवा संगठन भी इस आंदोलन में बड़े पैमाने पर शामिल होंगे। यह देखना होगा कि राष्ट्रपति विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल से मिलती हैं या नहीं, और सरकार इस बढ़ते दबाव पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह भारतीय चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक चूकों में से एक होगी; लेकिन अभी तक इसका स्वतंत्र सत्यापन सार्वजनिक नहीं हुआ है। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक बयानबाज़ी पर केंद्रित है, जबकि असली सवाल यह है कि वोटर सूची संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायिक निगरानी कहाँ है। जब तक ये तथ्य सर्वोच्च न्यायालय या किसी स्वतंत्र जाँच से सामने नहीं आते, तब तक दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक आरोप की श्रेणी में ही रहेंगे।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों कर रहा है?
इंडिया ब्लॉक का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची से 13 से 13.5 करोड़ नागरिकों के नाम हटाकर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। विपक्ष के अनुसार, सीईसी ने सर्वोच्च न्यायालय में भी 16 लाख नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की माँग रखी, जिसे वे असंवैधानिक बताते हैं।
इंडिया ब्लॉक का राष्ट्रपति भवन मार्च क्या है?
9 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने और राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की माँग रखने का ऐलान किया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के अनुसार, यह पूरी तरह संवैधानिक कदम है।
भाजपा ने इस आंदोलन पर क्या कहा?
भारतीय जनता पार्टी ने इंडिया ब्लॉक के इस आंदोलन को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। हालाँकि सरकार की ओर से सीईसी को हटाने की माँग पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है।
क्या यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा?
इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन में कोई ढील नहीं दी जाएगी। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास के अनुसार, आने वाले दिनों में छात्र और युवा संगठन भी दिल्ली में इस आंदोलन में शामिल होंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
भारतीय संविधान के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है — यानी संसद में महाभियोग के माध्यम से। राष्ट्रपति इस प्रक्रिया को शुरू नहीं कर सकते, इसलिए विपक्ष की माँग कितनी संवैधानिक है, यह कानूनी विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय है।
राष्ट्र प्रेस
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