6 अक्टूबर 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगे INDIA ब्लॉक, सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी ने संसद मार्च का ऐलान किया

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगे INDIA ब्लॉक, सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी ने संसद मार्च का ऐलान किया

सारांश

मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने का विवाद अब सड़क पर उतरने की तैयारी में है। INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग के साथ संसद से निर्वाचन सदन तक संयुक्त मार्च का ऐलान किया है — लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता को लेकर यह टकराव नई तीव्रता पकड़ रहा है।

मुख्य बातें

सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
INDIA ब्लॉक के सांसद संसद से निर्वाचन सदन तक संयुक्त मार्च करेंगे; अन्य विपक्षी दलों को भी न्योता।
विवाद की जड़: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आरोप।
बेबी ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सर्वोच्च न्यायालय की 'अनुमति' संबंधी ज्ञानेश कुमार के दावे को स्वयं खारिज किया।
मौजूदा कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर रहते हुए सिविल या आपराधिक अभियोजन से सुरक्षा प्राप्त है — विपक्ष ने इसे 'पक्षपाती कानून' बताया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग करते हुए संसद से निर्वाचन सदन तक INDIA ब्लॉक के सांसदों के संयुक्त मार्च का ऐलान किया। मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने और कथित 'वोट चोरी' को लेकर चुनाव आयोग एवं विपक्ष के बीच टकराव अब खुले आंदोलन का रूप लेने की तैयारी में है।

मुख्य घटनाक्रम

बेबी ने 30 सितंबर 2026 को हुई INDIA ब्लॉक की बैठक का हवाला देते हुए कहा, "INDIA ब्लॉक से संबंधित सभी सदस्य, और यदि अन्य विपक्षी दल भी इच्छुक हों तो उनके सांसद भी, हम सभी को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग करते हुए निर्वाचन सदन के सामने एक साथ मार्च करना चाहिए, जो 'वोट चोरी' की गतिविधियों में रंगे हाथों पाए गए हैं।"

उन्होंने यह भी कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तो विपक्ष संघर्ष के ज़रिए उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करेगा।

मतदाता सूची से नाम हटाने का विवाद

बेबी के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर 13 करोड़ (130 मिलियन) लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो उनके शब्दों में "सर्वथा अस्वीकार्य" है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावों की संभावना को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हैं।

गौरतलब है कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन रहा है। बेबी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने न्यायालय में हुई चर्चा को इस तरह प्रस्तुत किया जैसे सर्वोच्च न्यायालय ने पूरी कार्रवाई को अनुमति दे दी हो। उन्होंने कहा कि स्वयं भारत के मुख्य न्यायाधीश ने इस भ्रम को स्पष्ट किया है, जो यह दर्शाता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का आचरण "अवैध और गैर जिम्मेदाराना" रहा है।

राहुल गांधी की टिप्पणी पर समर्थन

एक सवाल के जवाब में बेबी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जो अवलोकन किया है, वह "बिल्कुल सही" है और INDIA ब्लॉक के सभी घटक दल उसी स्थिति में खड़े हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया को "बेतुका दावा" करार देते हुए खारिज किया।

चुनाव आयुक्तों की कानूनी सुरक्षा पर सवाल

बेबी ने चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया को "अत्यधिक पक्षपाती" बताते हुए कहा कि मौजूदा कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को पद पर रहते हुए सिविल या आपराधिक अभियोजन से असाधारण सुरक्षा प्रदान की गई है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान जवाबदेही को कमज़ोर करता है।

आगे क्या होगा

INDIA ब्लॉक के सांसदों के मार्च की तारीख अभी औपचारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन विपक्षी दलों के बीच समन्वय जारी बताया जा रहा है। यह आंदोलन संसद सत्र के इर्द गिर्द निर्धारित होने की संभावना है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और स्वयं मुख्य न्यायाधीश का इसे स्पष्ट करना — यह संयोग नहीं, बल्कि संस्थागत तनाव का संकेत है। असली सवाल यह है कि चुनाव आयुक्तों को दी गई अभियोजन से छूट लोकतांत्रिक जवाबदेही के किस सिद्धांत पर टिकी है, और क्या यह कानून संस्था को मजबूत बनाता है या उसे जाँच से परे रखता है। INDIA ब्लॉक का मार्च दबाव की राजनीति है, लेकिन मतदाता सूची की पारदर्शिता की माँग को केवल राजनीतिक कहकर खारिज करना सुविधाजनक होगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों हो रही है?
INDIA ब्लॉक का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर 13 करोड़ नाम हटाए गए, जो कथित 'वोट चोरी' है। इसके अलावा, विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई को भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया, जिसे स्वयं मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया।
INDIA ब्लॉक का संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च कब होगा?
30 सितंबर 2026 की INDIA ब्लॉक बैठक में इस मार्च का निर्णय लिया गया था। अभी तक मार्च की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन विपक्षी दलों के बीच समन्वय जारी है।
मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने का क्या मतलब है?
विपक्ष के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की आड़ में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया कानूनी है, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप मानता है।
सर्वोच्च न्यायालय का इस विवाद में क्या रोल है?
मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन रहा है। सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने न्यायालय की सुनवाई को इस तरह प्रस्तुत किया जैसे अदालत ने पूरी कार्रवाई को मंजूरी दे दी हो। बेबी के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं इस भ्रम को दूर किया।
क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी कार्रवाई से बचाव मिलता है?
हाँ, मौजूदा कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को पद पर रहते हुए सिविल या आपराधिक अभियोजन से सुरक्षा प्रदान की गई है। विपक्ष ने इस प्रावधान को 'अत्यधिक पक्षपाती' बताते हुए जवाबदेही को कमज़ोर करने वाला करार दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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