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महाराष्ट्र कांग्रेस का 28 सितंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की माँग

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महाराष्ट्र कांग्रेस का 28 सितंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की माँग

सारांश

महाराष्ट्र कांग्रेस ने 28 सितंबर को राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। निशाना CEC ज्ञानेश कुमार हैं — पक्षपात और SIR के ज़रिए 3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप। चुनाव आयोग के भीतर भी दो आयुक्तों ने 14 बार असहमति जताई — संस्थागत संकट की तस्वीर गहरी होती जा रही है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने 28 सितंबर 2026 को राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की।
पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की माँग कर रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत महाराष्ट्र में 3 करोड़ और देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार औपचारिक असहमति दर्ज कराई।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले मतदाता संख्या में 47 लाख की वृद्धि हुई, जिसका सत्यापन नहीं हुआ — यह आरोप एमपीसीसी का है।
एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे 'संविधान पर सीधा हमला' बताया।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के विरुद्ध अपना संघर्ष तेज़ करते हुए 28 सितंबर को राज्यभर में आंदोलन करने का ऐलान किया। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की माँग कर रही है, उन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुँचाने के लिए पक्षपातपूर्ण आचरण और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया गया है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह घोषणा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा व्यापक 'वोट चोरी' के आरोपों के बाद बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आई है। कांग्रेस का दावा है कि ये आरोप चुनाव आयोग के भीतर की आंतरिक असहमति की रिपोर्टों से और पुख्ता होते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के क्रियान्वयन के दौरान लिए गए निर्णयों पर पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 मौकों पर औपचारिक असहमति दर्ज कराई थी।

SIR प्रक्रिया पर विवाद

एमपीसीसी के हमले का मुख्य निशाना विवादास्पद SIR प्रक्रिया है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत महाराष्ट्र की मतदाता सूची से 3 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का दावा है कि देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया गया है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में 47 लाख की वृद्धि दर्ज की गई थी, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने इन नए मतदाताओं की वर्तमान स्थिति का सत्यापन नहीं किया। पश्चिम बंगाल और बिहार सहित अन्य गैर-BJP शासित राज्यों में भी वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

एमपीसीसी अध्यक्ष का बयान

एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आधिकारिक बयान में कहा, 'वैध और योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना संविधान पर सीधा हमला है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का निरंकुश आचरण भारतीय लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है।'

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर उठाए जा रहे सवाल राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में केंद्र में हैं।

आम मतदाताओं पर असर

यदि कांग्रेस के आरोप सही हैं, तो महाराष्ट्र में 3 करोड़ और देशभर में 13 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हालाँकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 28 सितंबर के प्रदर्शन के बाद आंदोलन का अगला स्वरूप क्या होगा, यह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मुख्यधारा की कवरेज में पर्याप्त महत्व नहीं मिला। 3 करोड़ महाराष्ट्र मतदाताओं और 13 करोड़ राष्ट्रीय मतदाताओं के आँकड़े गंभीर हैं — इनकी सत्यापन की ज़िम्मेदारी केवल विपक्ष पर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग पर भी है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र कांग्रेस 28 सितंबर को किस बात का विरोध कर रही है?
एमपीसीसी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की माँग को लेकर 28 सितंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के ज़रिए महाराष्ट्र में 3 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और BJP को लाभ पहुँचाने के लिए चुनाव आयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है।
SIR प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत महाराष्ट्र में 3 करोड़ और देशभर में 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
चुनाव आयोग के भीतर असहमति की रिपोर्टें क्या हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया के क्रियान्वयन के दौरान पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 मौकों पर औपचारिक असहमति दर्ज कराई। कांग्रेस इसे संस्थागत अनियमितता का प्रमाण मानती है।
राहुल गांधी का इस आंदोलन से क्या संबंध है?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने व्यापक 'वोट चोरी' के आरोप लगाए थे, जिसके बाद महाराष्ट्र में यह राजनीतिक तनाव और तीखा हुआ। एमपीसीसी का 28 सितंबर का आंदोलन उसी राष्ट्रीय विपक्षी अभियान की राज्य-स्तरीय कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
क्या चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। 28 सितंबर के प्रदर्शन के बाद आयोग और सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की अगली दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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