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वोटर लिस्ट SIR विवाद: उद्धव-कांग्रेस का CEC ज्ञानेश कुमार पर हमला, BJP बोली— विपक्ष घुसपैठियों का वोट बचा रहा

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वोटर लिस्ट SIR विवाद: उद्धव-कांग्रेस का CEC ज्ञानेश कुमार पर हमला, BJP बोली— विपक्ष घुसपैठियों का वोट बचा रहा

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट SIR फैसले ने देशव्यापी सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। उद्धव-कांग्रेस जहाँ इसे सत्ता के इशारे पर उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं BJP का दावा है कि विपक्ष असल में घुसपैठियों के फर्जी वोट बचाने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट SIR फैसले पर शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने विरोध मोर्चा खोला।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC के समक्ष छह माँगें रखी हैं।
महाराष्ट्र मंत्री योगेश कदम ने कहा कि SIR हर 24 साल में होने वाली नियमित प्रक्रिया है, जो कांग्रेस शासन में भी हुई थी।
BJP सांसद नरेश बंसल ने आरोप लगाया कि 2013 में भी लाखों फर्जी वोट हटाए गए थे; विपक्ष घुसपैठियों का वोट बचाना चाहता है।
जिन नागरिकों के नाम लिस्ट से हटे हैं, वे तीन दस्तावेज़ पेश कर नाम पुनः दर्ज करा सकते हैं।
शिवाजी पार्क, मुंबई में 'जेल भरो' आंदोलन की योजना पर प्रशासन ने अनुमति न मिलने का संकेत दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के फैसले ने 30 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र से लेकर नई दिल्ली तक राजनीतिक घमासान मचा दिया है। एक ओर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने CEC के फैसले को सत्ता पक्ष के इशारे पर लिया गया कदम बताते हुए विरोध प्रदर्शन का मोर्चा खोल दिया है, तो दूसरी ओर महायुति सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस विरोध को खुलेतौर पर वोट बैंक की राजनीति करार दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, 'पिछली बार जब SIR हुआ था, तब कांग्रेस की सरकार थी। मेरे ख्याल से हर 24 साल में यह प्रक्रिया की जाती है, इसलिए यह ज़रूरी है।' उनका तर्क था कि बैलेट पेपर के दौर में बड़े पैमाने पर फर्जी और डमी वोटिंग होती थी, क्योंकि स्थानांतरित हो चुके या एक से अधिक शहरों में नाम दर्ज लोगों के वोट पड़ते रहते थे।

कदम ने यह भी आरोप लगाया कि भारत में हुई अवैध घुसपैठ के कारण कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'उन्हें हटाया जाना चाहिए।' उन्होंने विपक्ष की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाया और कहा कि जब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे थे, तब विपक्षी बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने आपत्ति क्यों नहीं की।

विपक्ष की आपत्ति और सरकार का जवाब

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR को लेकर छह माँगें उठाई हैं। इस पर BJP सांसद नरेश बंसल ने पलटवार करते हुए कहा, 'कांग्रेस को इस बात का दर्द है कि जिन्हें वह अपना वोट बैंक मानती है, SIR के तहत वोटर लिस्ट से ऐसे कई फर्जी वोट हटाए गए हैं।' उन्होंने 2013 का उदाहरण देते हुए कहा कि तब भी लाखों वोट हटाए गए थे, क्योंकि वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण एक नियमित और ज़रूरी प्रक्रिया है।

बंसल ने कहा, 'अगर वोटर लिस्ट में फर्जी वोट हैं, घुसपैठियों के वोट हैं, तो यह देश के नागरिकों के हक पर डाका डालने जैसा है।' उन्होंने ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि CEC ने इसी से बचाने का काम किया है, इसीलिए विपक्ष को तकलीफ हो रही है।

शिवसेना नेता हत्याकांड पर सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री योगेश कदम ने शिवसेना (UBT) के एक नेता की हत्या के मामले पर कहा, 'निश्चित तौर पर यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है और हमने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जाँच पर किसी भी तरह का दबाव या प्रभाव नहीं होना चाहिए।' उन्होंने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा कि जिसने भी यह हत्या की है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

कदम ने आदित्य ठाकरे के बयान पर पलटवार करते हुए एक पुराने मामले का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर एक बड़े उद्योगपति के घर के नीचे जेलाटिन मिला था। उन्होंने कहा कि उस मामले से जुड़े एक अधिकारी को बाद में आदित्य ठाकरे ने स्वयं अपने साथ जोड़ लिया था।

विरोध प्रदर्शन और मुंबई पुलिस

कदम ने शिवाजी पार्क, मुंबई में प्रस्तावित 'जेल भरो' आंदोलन को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर जो शिवाजी पार्क है, वहाँ कभी भी आंदोलन की इजाजत नहीं दी जाती, यह बात उन्हें पता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम लिस्ट से हटे हैं, उन्हें सुनवाई का अवसर दिया गया है और तीन दस्तावेज़ पेश करने पर नाम पुनः जोड़ा जाएगा।

आगे क्या होगा

SIR की यह प्रक्रिया फिलहाल जारी है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ होता दिख रहा है। विपक्ष के 'जेल भरो' आंदोलन और CEC के खिलाफ कानूनी या संसदीय कदमों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में यह विवाद चुनाव सुधार की व्यापक बहस को और धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हर चुनाव से पहले नई तीव्रता पकड़ती है। दिलचस्प यह है कि दोनों पक्ष आँकड़ों की बात कर रहे हैं — BJP 2013 की बात करती है, विपक्ष 2024 के परिणामों की — लेकिन कोई भी स्वतंत्र सत्यापन का ढाँचा नहीं माँग रहा। BLO-BLA प्रक्रिया में विपक्ष की कथित निष्क्रियता और बाद में सड़क पर उतरना — यह अंतर्विरोध मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है। असली सवाल यह है कि SIR में हटाए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट क्यों नहीं होता, ताकि 'घुसपैठिया' और 'वास्तविक नागरिक' की बहस तथ्यों पर टिके, न केवल राजनीतिक आरोपों पर।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या होता है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है, जिसमें BLO घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करते हैं और फर्जी, दोहरे या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। महाराष्ट्र मंत्री योगेश कदम के अनुसार यह प्रक्रिया लगभग हर 24 साल में की जाती है।
उद्धव ठाकरे और कांग्रेस SIR का विरोध क्यों कर रहे हैं?
शिवसेना (UBT) और कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने यह फैसला सत्तारूढ़ दल के इशारे पर लिया है, जिससे उनके समर्थक मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस संबंध में छह औपचारिक माँगें भी उठाई हैं।
BJP का क्या कहना है इस विवाद पर?
BJP सांसद नरेश बंसल ने कहा कि विपक्ष असल में घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं का वोट बचाना चाहता है। उन्होंने 2013 का उदाहरण देते हुए कहा कि तब भी लाखों फर्जी वोट हटाए गए थे, और वोटर लिस्ट शुद्धिकरण एक संवैधानिक ज़िम्मेदारी है।
जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं, वे क्या करें?
मंत्री योगेश कदम के अनुसार, जिन नागरिकों के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें सुनवाई का अवसर दिया गया है। भारत में किसी भी स्थान का निवास प्रमाण सहित माँगे गए दस्तावेज़ों में से तीन प्रस्तुत करने पर नाम पुनः मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा।
'जेल भरो' आंदोलन और शिवाजी पार्क विवाद क्या है?
शिवसेना (UBT) और उनके सहयोगी दलों ने CEC के विरोध में मुंबई के शिवाजी पार्क में 'जेल भरो' आंदोलन की घोषणा की है। हालाँकि मंत्री योगेश कदम ने स्पष्ट किया कि छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर बने इस पार्क में कभी भी आंदोलन की अनुमति नहीं दी जाती।
राष्ट्र प्रेस
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