26 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ज्ञानेश कुमार महाभियोग विवाद: भाजपा बोली — हार का ठीकरा EC पर फोड़ना बंद करे विपक्ष

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ज्ञानेश कुमार महाभियोग विवाद: भाजपा बोली — हार का ठीकरा EC पर फोड़ना बंद करे विपक्ष

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग मुहिम और SIR में 'वोट चोरी' के आरोपों पर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष आमने-सामने — भाजपा ने इसे हार की खीझ बताया, कांग्रेस-RJD ने बिहार-बंगाल चुनाव रद्द करने की माँग की।

मुख्य बातें

भाजपा नेता अशोक बाजपेयी ने कहा कि कांग्रेस केवल हार के बाद ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है — यह लोकतांत्रिक आपत्ति नहीं, खीझ है।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने महाभियोग प्रस्ताव को संवैधानिक प्रक्रिया माना और विपक्ष को आगामी संसद सत्र में प्रस्ताव लाने की चुनौती दी।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने स्वयं SIR में गड़बड़ियों की बात की है, जिससे मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठना लाज़मी है।
RJD प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव रद्द करने की माँग की और कैबिनेट सचिव को भी संदेह के दायरे में बताया।
कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने दावा किया कि SIR के ज़रिए देश की 140 करोड़ जनता के साथ 'गद्दारी' हुई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव और 'वोट चोरी' के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं पर वैध सवाल नहीं, बल्कि लगातार चुनावी पराजयों से उपजी खीझ की अभिव्यक्ति है। दूसरी ओर, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत कई विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में अनियमितताओं और 'वोट चोरी' के सबूत पेश होने का दावा करते हुए चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सीधे सवाल उठाए हैं।

भाजपा की प्रतिक्रिया: 'हार को मत छुपाओ'

भाजपा नेता अशोक बाजपेयी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'विपक्ष को आत्मचिंतन करना चाहिए कि बार-बार जनता उन्हें क्यों नकार रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अनर्गल बातें कीं।' बाजपेयी ने यह भी कहा कि जहाँ-जहाँ कांग्रेस चुनाव जीतती है, वहाँ उसे न चुनाव आयोग से कोई शिकायत होती है और न ईवीएम से — लेकिन जब हार होती है, तो ईवीएम पर ठीकरा फोड़ा जाता है। उनके अनुसार, 'भारत का निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है, जिसका पूरी दुनिया में सम्मान है।'

शिवसेना की दो-टूक: संसद में लाओ प्रस्ताव

शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने विपक्ष को सीधी चुनौती दी। उन्होंने स्वीकार किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना एक 'संवैधानिक प्रक्रिया' है, और कहा कि अगर विपक्ष वास्तव में ऐसा चाहता है, तो वह आगामी संसद सत्र में अपना प्रस्ताव ला सकता है। यह बयान एक तरह से विपक्ष को संसदीय मंच पर अपना दम दिखाने की खुली चुनौती है।

विपक्ष के आरोप: 'पूरी दाल काली है'

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने स्वयं SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों की बात कही है, जिससे मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'चुनाव आयोग पर प्रश्न खड़ा करो, तो पार्टी तड़पती है — इसका यह मतलब है कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल काली है।'

राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने 1995 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सभी चुनाव आयुक्त समान हैं और बहुमत से निर्णय होता है। उनके अनुसार, दो आयुक्तों ने 'वोट चोरी और सेंधमारी' के प्रमाण सामने रखे हैं, और यहाँ तक कि कैबिनेट सचिव भी संदेह के दायरे में हैं। यादव ने माँग की कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव रद्द किए जाएँ।

कांग्रेस नेता एवं एमएलसी भाई जगताप ने आरोप लगाया, 'यह सिर्फ समीकरण नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र के साथ किया गया खिलवाड़ और गद्दारी है। इस देश की 140 करोड़ जनता को पूरी तरह ठगा गया है। SIR के ज़रिए वोट चोरी की गई है।'

आईआईटी मुंबई छात्र आत्महत्या पर संजय निरुपम की टिप्पणी

इसी प्रेस वार्ता में संजय निरुपम ने आईआईटी मुंबई में एक छात्र की आत्महत्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान में इस तरह की घटना अत्यंत पीड़ादायक है और उस छात्र के परिजनों के दर्द को समझा जा सकता है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद ऐसे समय में तेज हुआ है जब संसद का अगला सत्र नज़दीक है और विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में बताया जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विपक्षी दल संसद में पर्याप्त संख्या जुटा पाते हैं और क्या यह विवाद चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता पर व्यापक बहस की शुरुआत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर सत्य हैं, तो यह महज राजनीतिक आरोप नहीं रहता — यह आंतरिक असहमति है जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। भाजपा का 'जहाँ जीतते हो वहाँ कोई शिकायत नहीं' वाला तर्क सतही है, क्योंकि संस्थागत जवाबदेही चुनाव परिणाम से नहीं, प्रक्रिया की पारदर्शिता से तय होती है। महाभियोग की नौबत तक पहुँचना इस बात का संकेत है कि चुनाव आयोग के प्रति सर्वदलीय विश्वास का क्षरण हो रहा है — और यह लोकतंत्र के लिए किसी एक पार्टी की जीत-हार से कहीं बड़ी चिंता है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव क्या है?
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने इसे एक वैध संवैधानिक प्रक्रिया बताया है और कहा है कि विपक्ष आगामी संसद सत्र में यह प्रस्ताव ला सकता है।
'वोट चोरी' और SIR विवाद क्या है?
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में अनियमितताएँ हुई हैं और इसके ज़रिए वोटों की हेराफेरी की गई है। कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने खुद SIR में गड़बड़ियों की बात कही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को निराधार बताती है।
भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों का जवाब क्यों दिया?
भाजपा नेता अशोक बाजपेयी का तर्क है कि कांग्रेस केवल चुनाव हारने पर ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है, जबकि जीत के समय कोई आपत्ति नहीं होती। भाजपा इसे बार-बार की चुनावी पराजय से उपजी खीझ बताती है, न कि लोकतांत्रिक चिंता।
RJD ने बिहार और पश्चिम बंगाल चुनाव रद्द करने की माँग क्यों की?
RJD के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 'वोट चोरी और सेंधमारी' के प्रमाण सामने रखे हैं। इसी आधार पर उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों को रद्द करने की माँग की है। उन्होंने 1995 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सभी चुनाव आयुक्त समान हैं और बहुमत से निर्णय होता है।
क्या यह महाभियोग प्रस्ताव संसद में सफल हो सकता है?
संवैधानिक प्रावधान के तहत महाभियोग प्रस्ताव को संसद में बहुमत की आवश्यकता होती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या है या नहीं। शिवसेना ने कहा है कि अगर विपक्ष वाकई यह प्रस्ताव लाना चाहता है, तो उसे आगामी संसद सत्र में इसे साबित करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 58 मिनट पहले
  2. 11 घंटे पहले
  3. 11 घंटे पहले
  4. 12 घंटे पहले
  5. कल
  6. 2 दिन पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले