राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: 2024 चुनावों में वोट चोरी के सबूत हैं — दावा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। उन्होंने कहा कि उनके पास इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और यह '100 प्रतिशत निश्चित' है।
राहुल गांधी के मुख्य आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और 50 वर्षों से भारतीय राजनीति को करीब से देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार भारत में एंटी-इन्कम्बेंसी एक स्वाभाविक राजनीतिक ताकत है जो कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के खिलाफ तो काम करती है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मामले में 'गायब' हो जाती है।
उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध के बाद मिली भारी लोकप्रियता के बावजूद उनके खिलाफ भी सत्ता विरोधी माहौल बना था — यही राजनीतिक चक्र हर सरकार पर लागू होता है, किंतु BJP के संदर्भ में ऐसा नहीं दिखता।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्त विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर आपत्ति जता रहे हैं और ज्ञानेश कुमार को मौजूदा अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संवैधानिक खतरे की चेतावनी
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग का सबसे बड़ा दायित्व मतदाता के वोट की रक्षा करना है। उनके अनुसार, यदि वोट सुरक्षित नहीं रहा तो संविधान सही ढंग से काम नहीं करेगा, कानूनों की वैधता पर सवाल उठेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व खत्म हो जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया: 'पहले वोट चोरी हुई, फिर कानून चोरी हुई और अब संस्थाओं की चोरी हो रही है।' साथ ही यह भी कहा कि कथित 'वोट चोरी' के जरिए चुने गए सांसदों द्वारा बनाए गए कानून भी अवैध हैं।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद से कांग्रेस और I.N.D.I.A. गठबंधन के कई घटक दल ईवीएम और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर आपत्तियाँ जताते रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आरोप बिना ठोस न्यायिक या तकनीकी साक्ष्य के संस्थाओं पर अविश्वास बढ़ाने का जोखिम उठाते हैं। दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है।
आगे क्या होगा
राहुल गांधी के इन दावों के बाद यह देखना होगा कि कांग्रेस अपने कथित 'सबूत' किस मंच पर और किस रूप में सामने रखती है — संसद में, न्यायालय में, या जनमंच पर। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और BJP का पलटवार आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज करेगा।