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राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: 2024 चुनावों में वोट चोरी के सबूत हैं — दावा

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राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: 2024 चुनावों में वोट चोरी के सबूत हैं — दावा

सारांश

राहुल गांधी ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में '100 प्रतिशत' धांधली हुई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर सवाल उठाए और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया। यह विपक्ष के चुनावी विश्वसनीयता अभियान में अब तक का सबसे तीखा हमला है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में धांधली हुई और उनके पास सबूत हैं।
उन्होंने कहा कि एंटी-इन्कम्बेंसी BJP के खिलाफ 'गायब' हो जाती है, जबकि कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों पर यह काम करती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति PM मोदी और अमित शाह ने की थी।
राहुल गांधी के अनुसार चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्त SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर आपत्ति जता रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि वोट सुरक्षित न रहे तो संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाएँ खतरे में पड़ेंगी।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। उन्होंने कहा कि उनके पास इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और यह '100 प्रतिशत निश्चित' है।

राहुल गांधी के मुख्य आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और 50 वर्षों से भारतीय राजनीति को करीब से देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार भारत में एंटी-इन्कम्बेंसी एक स्वाभाविक राजनीतिक ताकत है जो कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के खिलाफ तो काम करती है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मामले में 'गायब' हो जाती है।

उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध के बाद मिली भारी लोकप्रियता के बावजूद उनके खिलाफ भी सत्ता विरोधी माहौल बना था — यही राजनीतिक चक्र हर सरकार पर लागू होता है, किंतु BJP के संदर्भ में ऐसा नहीं दिखता।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्त विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर आपत्ति जता रहे हैं और ज्ञानेश कुमार को मौजूदा अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संवैधानिक खतरे की चेतावनी

राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग का सबसे बड़ा दायित्व मतदाता के वोट की रक्षा करना है। उनके अनुसार, यदि वोट सुरक्षित नहीं रहा तो संविधान सही ढंग से काम नहीं करेगा, कानूनों की वैधता पर सवाल उठेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व खत्म हो जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया: 'पहले वोट चोरी हुई, फिर कानून चोरी हुई और अब संस्थाओं की चोरी हो रही है।' साथ ही यह भी कहा कि कथित 'वोट चोरी' के जरिए चुने गए सांसदों द्वारा बनाए गए कानून भी अवैध हैं।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद से कांग्रेस और I.N.D.I.A. गठबंधन के कई घटक दल ईवीएम और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर आपत्तियाँ जताते रहे हैं।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आरोप बिना ठोस न्यायिक या तकनीकी साक्ष्य के संस्थाओं पर अविश्वास बढ़ाने का जोखिम उठाते हैं। दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है।

आगे क्या होगा

राहुल गांधी के इन दावों के बाद यह देखना होगा कि कांग्रेस अपने कथित 'सबूत' किस मंच पर और किस रूप में सामने रखती है — संसद में, न्यायालय में, या जनमंच पर। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और BJP का पलटवार आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विश्वसनीयता इस बात पर टिकी है कि वे किस मंच पर और किस रूप में अपने कथित सबूत पेश करते हैं — अभी तक ये केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु बिना न्यायिक या तकनीकी प्रमाण के ऐसे व्यापक आरोप संस्थागत अविश्वास को बढ़ाने का जोखिम भी उठाते हैं। गौरतलब है कि 2024 के चुनाव परिणामों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी गई — जो कांग्रेस की रणनीति में एक महत्वपूर्ण अंतर है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह अभियान संसद या अदालत में ठोस रूप लेता है, या केवल विपक्षी आख्यान-निर्माण का हिस्सा बनकर रह जाता है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने 2024 चुनावों में धांधली का दावा क्यों किया?
राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके पास 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली के सबूत हैं और यह '100 प्रतिशत निश्चित' है। उन्होंने तर्क दिया कि BJP के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी का काम न करना इस कथित हेरफेर का संकेत है।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्त SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध आपत्ति जता रहे हैं।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ हैं और चुनाव आयोग के भीतर ही इस पर मतभेद हैं।
क्या राहुल गांधी ने इन आरोपों को न्यायालय में चुनौती दी है?
अभी तक राहुल गांधी या कांग्रेस ने इन दावों के आधार पर 2024 चुनाव परिणामों को सर्वोच्च न्यायालय में औपचारिक रूप से चुनौती नहीं दी है। उनके कथित सबूत अभी तक केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस के स्तर पर सामने आए हैं।
इन आरोपों का लोकतंत्र पर क्या असर हो सकता है?
राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि अगर वोट सुरक्षित नहीं रहा तो संविधान सही ढंग से काम नहीं करेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की वैधता पर सवाल उठेंगे। आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस साक्ष्य के ऐसे व्यापक आरोप संस्थागत अविश्वास को बढ़ा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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