चुनाव आयोग विवाद: राहुल गांधी के आरोपों पर चिराग पासवान बोले — आयोग मजबूती से रखे अपना पक्ष
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखे हमले के बाद 25 सितंबर 2026 को सत्ता पक्ष और उसके सहयोगी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पहले से चल रहे राजनीतिक विवाद में गांधी के बयान ने नई तीव्रता जोड़ दी है।
राहुल गांधी ने क्या कहा था
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा था कि 'वोट चोरी, कानून की चोरी है' और ऐसे में चोरी के वोटों से चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा बनाए गए कानून एवं संस्थागत बदलाव भी गैरकानूनी होंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।' यह बयान SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियों की पृष्ठभूमि में आया है।
चिराग पासवान की प्रतिक्रिया
पटना में मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, 'अगर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो यह चुनाव आयोग और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे मजबूती से अपना पक्ष रखें। विपक्ष क्या कहता है, इसकी मुझे ज्यादा चिंता नहीं है। राजनीति करना विपक्ष का काम है।'
पासवान ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को विपक्ष को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि जनता के मन में किसी भी प्रकार का संदेह न रहे, इस उद्देश्य से अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर आम जनता के मन में शक पैदा हो जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा।
भाजपा का पलटवार
नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद गुलाम अली खटाना ने राहुल गांधी के आरोपों को 'पूरी तरह निराधार' करार दिया। उन्होंने कहा, 'वे नहीं चाहते कि देश में पारदर्शिता आए। एक नागरिक का वोट एक ही जगह होना चाहिए और अवैध प्रवासियों के लिए देश में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने बहुत सराहनीय काम किया है।'
जम्मू-कश्मीर में BJP विधायक विक्रम रंधावा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि राहुल गांधी की अपनी कांग्रेस पार्टी के लोग भी उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेते।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया कुछ समय से विपक्ष के निशाने पर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का जोखिम है। सत्ता पक्ष इसे अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची से हटाने और चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता सुनिश्चित करने का आवश्यक कदम बताता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी पहले से तेज है।
आगे की संभावनाएँ
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, SIR विवाद और चुनाव आयोग की स्वायत्तता का सवाल आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक इन विशेष आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। चिराग पासवान की यह अपील — कि आयोग स्वयं मजबूती से अपना पक्ष रखे — इस बात का संकेत है कि सहयोगी दलों को भी महसूस हो रहा है कि चुनावी संस्था की विश्वसनीयता को लेकर जनता में संवाद ज़रूरी है।