राहुल गांधी के CEC बयान पर BJP का पलटवार: 'गैर-जिम्मेदाराना और बेबुनियाद'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद 25 सितंबर 2026 को राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया। राहुल गांधी ने कहा था कि 'वोट की चोरी, कानून की चोरी है' और ज्ञानेश कुमार को 'सरकारी गवाह' बन जाना चाहिए — इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
झारखंड BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राहुल गांधी के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। साहू ने कहा, 'राहुल गांधी मानसिक रूप से पूरी तरह से विचलित व्यक्ति हैं। वे क्या बोल रहे हैं, इसका उन्हें खुद पता नहीं होता। इसलिए उनकी बातों पर चर्चा न करना ही देश और देश के लोगों के हित में होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में कोई भी राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से नहीं लेता।
झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। मरांडी ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी को राहुल गांधी का ठीक से इलाज कराना चाहिए, नहीं तो वे पूरी कांग्रेस पार्टी को ही डुबो देंगे। वे कभी भी कुछ भी बोल देते हैं, जो जनता के गले नहीं उतरता।'
BJP विधायकों का हमला
BJP विधायक सीपी सिंह ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'वे देश-विरोधी हैं। ऐसे व्यक्ति पर ध्यान नहीं देना चाहिए।' सिंह ने यह भी कहा कि राहुल गांधी को पहले यह बताना चाहिए कि 2014 से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे और उन्होंने किस तरह काम किया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी को खुद सरकारी गवाह बन जाना चाहिए और बताना चाहिए कि उन्होंने देश के खिलाफ क्या-क्या किया है। अगर वे सरकारी गवाह बन जाते हैं, तो देश की जनता शायद उन्हें माफ कर देगी।'
जयपुर से BJP विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि राहुल गांधी का स्वभाव ही अनर्गल आरोप लगाना बन गया है। आचार्य ने कहा, 'राहुल गांधी ने कभी EVM पर सवाल उठाए, कभी बैलेट पेपर पर, कभी चुनाव आयोग पर और कभी इनकम टैक्स व ED पर आरोप लगाए। इस तरह की बेबुनियाद बातें करना उनका स्वभाव बन गया है।'
राहुल गांधी का मूल बयान
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा था कि 'वोट की चोरी, कानून की चोरी है' और चोरी के वोटों से चुने गए लोगों द्वारा बनाए गए कानून एवं संस्थागत बदलाव भी गैर-कानूनी होंगे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'सरकारी गवाह' बनने की बात कही थी। यह बयान चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष के उठाए जाते रहे सवालों की कड़ी में आया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर बहस लगातार तेज होती रही है। आलोचकों का कहना है कि EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा बन गया है, जबकि BJP इसे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश बताती है। दोनों पक्षों के बीच यह तकरार आगामी चुनावी मौसम में और तीखी होने के संकेत हैं।