क्या चुनाव आयोग जनता को गुमराह कर रहा है? राहुल गांधी का 'स्याही विवाद' पर हमला और भाजपा की प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी के आरोपों ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
- भाजपा ने आरोपों का खंडन करते हुए इसे ध्यान भटकाने की चाल बताया है।
- स्याही विवाद ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर कड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने यह कहा कि चुनाव आयोग 'वोट चोरी' को प्रोत्साहित करके लोकतंत्र में जनता के भरोसे को कमजोर कर रहा है। भाजपा ने तुरंत राहुल गांधी के इस आरोप का जवाब देते हुए कहा कि यह सिर्फ उनकी संभावित हार से ध्यान भटकाने की एक चाल है और आयोग को बलि का बकरा बनाने का प्रयास है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "चुनाव आयोग का नागरिकों को गुमराह करना ही हमारे लोकतंत्र में भरोसे के खत्म होने का मुख्य कारण है। 'वोट चोरी' एक राष्ट्र-विरोधी कार्य है।"
राहुल गांधी की यह टिप्पणी महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के चुनावों के लिए वोटों की गिनती शुरू होने के तुरंत बाद आई।
भाजपा के नेताओं ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष बीएमसी के साथ-साथ महाराष्ट्र के अन्य नगर निकायों में भी हार का सामना कर रहा है और इसी कारण से ऐसी चालें चल रहा है।
राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष को 'बहाना ब्रिगेड' बताते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा, "क्या गिनती खत्म होने से पहले ही हार मान ली? राहुल वही कर रहे हैं जो उन्हें सबसे अच्छा आता है, बदनाम करना, तोड़-मरोड़ कर पेश करना और गलत जानकारी देना।"
उन्होंने यह भी कहा कि स्याही विवाद की जांच की जानी चाहिए, लेकिन गुरुवार की वोटिंग में किसी भी धांधली की घटना सामने नहीं आई।
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी एक देशद्रोही व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा, "जब भी चुनाव नतीजे उनके (कांग्रेस) पक्ष में नहीं आते, तब वह हमेशा हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ने की कोशिश करते हैं। बीएमसी चुनावों के रुझानों से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ेगा।"
गौरतलब है कि गुरुवार को स्याही विवाद तब उठा जब कई दावे किए गए कि वोटिंग के बाद मतदाताओं पर लगाई गई अमिट स्याही आसानी से मिट रही थी, जिससे चुनावों में धांधली की संभावना बन रही थी। कांग्रेस समेत विपक्ष के कई नेताओं ने यह दावा किया कि कई बूथों पर मतदाता की उंगली पर निशान लगाने के लिए स्याही के स्थान पर मार्कर का उपयोग किया जा रहा था, और ये निशान सैनिटाइज़र से मिट रहे थे।
हालांकि, विपक्ष के आरोपों के बाद राज्य चुनाव आयोग ने मामले की जांच के आदेश दिए। आयोग ने बताया कि वायरल वीडियो के दावों की पुष्टि करने और उनकी वास्तविकता की जांच के लिए एक विस्तृत जांच की जाएगी।