ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों की आवाजाही पुनः शुरू, उद्योग का समर्थन
सारांश
Key Takeaways
- ईरान से जहाजों की आवाजाही की अनुमति मिलना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता है।
- उद्योग जगत ने इस निर्णय का स्वागत किया है।
- प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
- भविष्य में और जहाजों को अनुमति मिलने की संभावना है।
- यह भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजकोट, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिलने के उपरांत, भारतीय जहाजों की आवाजाही एक बार फिर प्रारंभ हो गई है। इस निर्णय के बाद, भारत से संबंधित जहाज सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इसे भारत की कूटनीतिक विजय बताते हुए प्रधानमंत्री की पहल की सराहना की है।
सौराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय झावेरी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि इस स्थिति को सामान्य बनाने के लिए सभी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री की उदार और संतुलित कूटनीतिक नीति के तहत ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत की गई, जिसके फलस्वरूप भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति प्राप्त हुई। झावेरी ने बताया कि उस समय कई देशों के जहाज इस मार्ग पर फंसे हुए थे, लेकिन भारतीय जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति मिलने से स्थिति सामान्य होने लगी है।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ समय के लिए देश की स्थिति थोड़ी चिंताजनक हो गई थी, क्यूंकि कई उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला इस मार्ग से जुड़ी हुई थी। खासकर कई ऐसे उद्योग हैं जो एलपीजी पर आधारित हैं और उनकी उत्पादन गतिविधियां ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर रहती हैं। इस परिप्रेक्ष्य में जहाजों के सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिलना उद्योग जगत के लिए एक राहत भरी खबर है।
संजय झावेरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के चलते देश में एक प्रगतिशील और स्थिर वातावरण बन रहा है। उनका स्पष्ट दृष्टिकोण है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं होता और वे हमेशा शांति के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के बीच दो जहाजों को रवाना होने की अनुमति मिलना सकारात्मक संकेत है और भविष्य में ऐसे जहाजों की संख्या में वृद्धि की संभावना है।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार लोगों की भलाई के साथ-साथ भारत के राष्ट्रीय हितों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। सरकार की कूटनीतिक पहल और दूरदर्शी नीतियों के कारण इस कठिन परिस्थिति में भी भारत के हित सुरक्षित रखे जा सके हैं।