देसूरी में राष्ट्रीय लोक अदालत: त्वरित न्याय का सफल आयोजन
सारांश
Key Takeaways
- देसूरी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ।
- लोगों ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाए।
- राजीनामे के आधार पर कई मामलों का निपटारा किया गया।
- न्यायालय का उद्देश्य त्वरित और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना है।
- यह आयोजन न्याय व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
पाली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के पाली जिले के देसूरी में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर एक राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।
यह लोक अदालत देसूरी सिविल एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता सादड़ी न्यायालय की पीठासीन अधिकारी हिमानी कच्छवाह ने की। लोक अदालत के माध्यम से नागरिकों ने आपसी सहमति से कई पुराने और नए विवादों का समाधान किया, जिससे न्यायालय का समय बचा और पक्षकारों को शीघ्र न्याय प्राप्त हुआ।
न्यायालय के रीडर ललित पालीवाल ने बताया कि देसूरी, सादड़ी और रानी न्यायालयों से जुड़े विभिन्न प्रकार के मामले इस लोक अदालत में प्रस्तुत किए गए थे। इनमें से कई मामलों का राजीनामे के आधार पर तालुका स्तर पर निपटारा किया गया। पक्षकारों ने आपसी सहमति से विवादों का समाधान किया, जिससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने में मदद मिली और दोनों पक्ष संतुष्ट रहे। लोक अदालत का प्राथमिक उद्देश्य लोगों को त्वरित, सस्ता और सरल न्याय प्रदान करना है, और इस आयोजन ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस अवसर पर सदस्य जगतपाल सिंह, यूको बैंक के अधिवक्ता विनोद मेघवाल, सहायक बैंक प्रबंधक रामकिशोर परिहार, प्रिया गहलोत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया देसूरी शाखा के रणवीर सिंह और गौरव चौधरी भी उपस्थित थे। न्यायालय स्टाफ से सुशील, विक्रम, मूलाराम, कुलदीप और रानी न्यायालय के कोर्ट स्टाफ तरुण ने भी लोक अदालत में सहयोग प्रदान किया।
लोक अदालत में शामिल पक्षकारों ने इस व्यवस्था की सराहना की और कहा कि इससे उन्हें अदालत की लंबी प्रक्रियाओं एवं सुनवाईयों से राहत मिली। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से छोटे-मोटे विवाद, बैंक लोन, पारिवारिक मामलों और अन्य नागरिक प्रकरणों का त्वरित निपटारा संभव हो पाता है।
जिला प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि ऐसी लोक अदालतें नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं, ताकि आम जनता को न्याय मिलने में कोई देरी न हो। देसूरी में हुई इस लोक अदालत ने एक बार फिर साबित किया कि राजीनामा आधारित निस्तारण से न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलती है और लोगों का भरोसा बढ़ता है।