बूंदी में 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन, परिवारों में आपसी समझौते की नई राह
सारांश
Key Takeaways
- त्वरित न्याय और आपसी भाईचारा का सिद्धांत।
- 12 बेंचों का गठन लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए।
- परिवारों के बीच समझौते का मार्ग प्रशस्त।
- मानवीय दृष्टिकोण से कई मामलों का समाधान।
- आमजन को लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील।
बूंदी, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के बूंदी जिले में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की देखरेख में वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन हुआ।
इस अदालत का उद्देश्य 'त्वरित न्याय और आपसी भाईचारा' को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर जिले में कुल 12 बेंचों का गठन किया गया, ताकि लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा सके।
इस लोक अदालत का आयोजन करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सरिता मीना और एससी/एसटी कोर्ट के न्यायिक अधिकारी डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि जिला मुख्यालय पर कुल पांच बेंच स्थापित की गईं। सिविल कोर्ट में लगभग 6,500 मामलों को चिह्नित किया गया, जबकि राजस्व कोर्ट में 13,000 से अधिक मामले रखे गए। इसके साथ ही पारिवारिक विवाद और चेक बाउंस जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर भी काउंसलिंग की गई।
लोक अदालत में परिवार न्यायालय से एक सुखद फैसला आया, जहां पिछले 8 महीनों से चल रहे पति-पत्नी के विवाद में बेंच ने प्रभावी काउंसलिंग की। काउंसलिंग के परिणामस्वरूप दोनों ने फिर से साथ रहने का निर्णय लिया। इस राजीनामे से उनकी नन्ही बच्ची को माता-पिता का प्यार और संरक्षण प्राप्त हुआ।
एक अन्य मामले में 2010 के बैंक लोन का निपटारा मानवीय दृष्टिकोण से किया गया। एक व्यक्ति द्वारा लिए गए 2 लाख 50 हजार रुपए के लोन को उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे ने केवल 58,000 रुपए के समझौते पर चुकाया। इस लोक अदालत ने इस परिवार को बड़ी राहत प्रदान की।
राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित किया है कि विवादों का समाधान केवल मुकदमों से नहीं, बल्कि संवाद और समन्वय से भी संभव है। सचिव सरिता मीना ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने लंबित मामलों के समाधान के लिए लोक अदालत की सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाएं।