जेपी नड्डा का कांग्रेस-सपा पर हमला: चुनाव आयोग को बदनाम करने का आरोप, राहुल की स्कूली बच्चे से तुलना
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के बरेली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता दूर करो' रैली में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'गैर-जिम्मेदार दल' करार दिया। नड्डा ने आरोप लगाया कि इन दलों ने चुनाव आयोग के प्रति जनता के भरोसे को जानबूझकर कमज़ोर करने का प्रयास किया है। यह रैली ऐसे समय में आई है जब मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी है।
चुनाव आयोग पर विश्वास और विपक्ष के आरोप
नड्डा ने कहा कि वर्षों की कठिन मेहनत के बाद भारत के चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने गुजरात के गिर वन और अरुणाचल प्रदेश के मालोगम जैसे दुर्गम इलाकों में भी मतदान सुनिश्चित किया — यह किसी भी जनतंत्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा सत्ता से दूर होने की झुंझलाहट में इन संस्थाओं की साख पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी पर निशाना: 'हारने पर आयोग को दोष'
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए नड्डा ने उनकी तुलना उन स्कूली बच्चों से की जो कम अंक आने पर शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने कहा, 'जब भी राहुल चुनाव हारते हैं तो चुनाव आयोग को दोष देते हैं, जबकि चुनाव जीतने पर खुद को होशियार समझते हैं।' गौरतलब है कि नड्डा ने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने ही मतपत्रों की जगह ईवीएम (EVM) प्रणाली लागू की थी, और अब वही दल मशीनों पर सवाल उठा रहा है।
SIR और मतदाता सूची विवाद
विपक्ष के उस दावे पर कि SIR प्रक्रिया में 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से हटाया गया, नड्डा ने स्पष्ट किया कि ये मतदाता ASDD श्रेणी — यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और मृत — में आते थे। उन्होंने दावा किया कि 3 करोड़ मतदाता अनुपस्थित थे, 6 करोड़ 30 लाख स्थानांतरित हो चुके थे, 1 करोड़ फर्जी थे और 2 करोड़ 80 लाख की मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध मतदाताओं का पता लगाने, सूची से हटाने और निर्वासित करने के निर्देश दिए हैं, जबकि कांग्रेस ऐसे मतदाताओं को औपचारिक मान्यता देना चाहती है। इंडिया ब्लॉक द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष अभी तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया है।
आपातकाल और ऐतिहासिक संदर्भ
नड्डा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में लागू आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में बिना मुकदमे के 22 महीने के लिए जितने लोगों को जेल भेजा गया, वह संख्या ब्रिटिश शासन के दौरान जेल में बंद लोगों से भी अधिक थी। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले का भी स्मरण कराया जिसमें रायबरेली से इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित किया गया था — जिसके बाद कथित तौर पर कानून में बदलाव हुआ और 'प्रतिबद्ध न्यायपालिका' की माँग उठी।
ममता और इंडिया ब्लॉक पर कटाक्ष
नड्डा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे राज्य विधानसभा चुनावों में अपने ही निर्वाचन क्षेत्र से हार गई थीं। इंडिया ब्लॉक की रैली की आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें वे नेता शामिल हैं जिन्हें जनता पहले ही सत्ता से बेदखल कर चुकी है और जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। उन्होंने चुनाव आयुक्त चयन प्रक्रिया का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद BJP की सरकार ने ही विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल किया, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार ने टीएन शेषन, एमएस गिल और नवीन चावला जैसे आयुक्तों को पुरस्कृत करने का काम किया — यह आरोप नड्डा ने लगाया।
यह रैली उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गोलबंदी की शुरुआत मानी जा रही है और मतदाता सूची विवाद पर केंद्र सरकार के रुख को और स्पष्ट करती है। आने वाले दिनों में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच यह बहस और तेज होने की संभावना है।