चुनाव आयोग पर सवाल उठाना संविधान पर हमला: सतीश पूनिया का राहुल गांधी पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सतीश पूनिया ने 13 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में मीडिया से बातचीत के दौरान इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन को 'नैरेटिव की लड़ाई' करार देते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेता राहुल गांधी और उनके सहयोगी संवैधानिक संस्थाओं को जानबूझकर कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं। पूनिया ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग (ECI) पर उंगली उठाना सीधे-सीधे संविधान की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाने के समान है।
मुख्य आरोप और तर्क
पूनिया ने कहा कि विपक्ष का दोहरा मापदंड स्पष्ट है — जब विपक्ष चुनाव जीतता है तब चुनाव आयोग को 'अच्छा' बताया जाता है, और हारने पर उसी संस्था को 'पक्षपाती' घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडिया ब्लॉक अपना नैरेटिव स्थापित करने के लिए संवैधानिक संस्थाओं की साख को ठेस पहुँचाने पर उतारू है।
उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कांग्रेस शासन के दौरान भी अपनाई जाती रही है। उनके अनुसार SIR के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध किया जाता है, जिससे लोकतंत्र और मज़बूत होता है और सभी दलों को समान लाभ मिलता है।
संसद से दूरी पर सवाल
पूनिया ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को सीधे घेरते हुए सवाल किया कि यदि वे अपने मुद्दों पर इतने आश्वस्त हैं, तो पिछले लोकसभा और राज्यसभा सत्रों में सदन के भीतर चर्चा से दूरी क्यों बनाई गई। उन्होंने कहा कि SIR, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) और चुनाव सुधार जैसे विषयों पर संसदीय मंच पर बहस होनी चाहिए थी, न कि सड़कों पर।
विदेशी फंडिंग और FCRA का मुद्दा
पूनिया ने सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे का हवाला देते हुए दावा किया कि इस तरह के आंदोलनों के पीछे विदेशी फंडिंग की भूमिका होने की बात साल्वे की ओर से कही गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका अपना नहीं, बल्कि साल्वे का कथन है। साथ ही, FCRA से जुड़े विधेयक का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक को लेकर घबराहट के कारण 'अराजकता फैलाने' की कोशिश की जा रही है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति और योगी सरकार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए पूनिया ने कहा कि राज्य में राशन वितरण और बेहतर शासन व्यवस्था ने आम जनता के बीच विश्वास बहाल किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अब इतनी कमज़ोर हो चुकी है कि उसकी हैसियत एक क्षेत्रीय दल जैसी भी नहीं रह गई — वह समाजवादी पार्टी के सहारे राजनीतिक ज़मीन ढूँढ रही है।
अयोध्या और राम मंदिर का संदर्भ
अयोध्या दौरे पर पूनिया ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे उस पीढ़ी से हैं जिसने दोनों बार कारसेवा में भाग लिया था। उन्होंने 1990 के दशक की घटनाओं को याद करते हुए बताया कि तब कारसेवकों पर गोलियाँ चलाई गई थीं और उन्होंने एक साथी को खोया था, जबकि दूसरा घायल हुआ था। उन्होंने कहा कि भव्य राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के संघर्ष और लाखों बलिदानों का परिणाम है, और यह केवल इमारत नहीं बल्कि देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह सांस्कृतिक जागृति नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान विपक्ष की वैध आलोचनाओं को नकारने और चुनावी माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि SIR प्रक्रिया पर राजनीतिक विमर्श संसद के भीतर किस दिशा में जाता है।