राहुल-प्रियंका की हिरासत पर अखिलेश यादव का हमला, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा तथा विपक्षी दलों के कई अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को किसी एक दल के इशारे पर नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
अखिलेश यादव का सीधा हमला
अखिलेश यादव ने कहा, 'भाजपा चाहती है कि देश में वही नागरिक रहें जो उसके नेता और कार्यकर्ता हैं, जो नहीं हैं उनके वोट काटे जाएँ।' उन्होंने तंज कसते हुए जोड़ा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इतनी सहूलियत चाहिए थी, तो उसे चुनाव आयोग की इमारत में ही एक फ्लोर पर अपना कार्यालय खोल लेना चाहिए था। उनके अनुसार, विपक्ष के इस आंदोलन में भाजपा का दखल इसलिए है ताकि आयोग के माध्यम से मतों की चोरी जारी रह सके।
अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इसकी आड़ में मतदाता सूची से वोट हटाए जा रहे हैं, जो उनके शब्दों में 'संविधान का उल्लंघन और लोकतंत्र की हत्या' है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आकाशवाणी किसी सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की संपत्ति है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि इंडी गठबंधन के सभी दल एसआईआर का विरोध कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग उनकी मुख्य प्राथमिकता है। उनका आरोप है कि असंवैधानिक तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने इस मुद्दे को केवल इंडिया ब्लॉक तक सीमित बताने से इनकार करते हुए कहा कि स्वयं दो चुनाव आयुक्तों ने यह शिकायत की है कि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया जाता है और मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले ही निर्णय लेते हैं।
हिरासत पर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस नेता उदय भानु ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को उठाकर ले जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती ने इस दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राहुल गांधी हर युवा और हर भारतीय के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में संशोधन को लेकर पहले से ही सरकार पर निशाना साध रहे थे। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में हाशिये पर खड़े मतदाताओं के नाम असंगत रूप से हटाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर उठ रहे ये सवाल संवैधानिक जवाबदेही की दृष्टि से गंभीर हैं और इन पर पारदर्शी जाँच की माँग बढ़ती जा रही है।