6 अक्टूबर 2026
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एसआईआर विवाद: पूर्व CM वाघेला ने CEC ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल, राहुल-प्रियंका हिरासत में

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एसआईआर विवाद: पूर्व CM वाघेला ने CEC ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल, राहुल-प्रियंका हिरासत में

सारांश

एसआईआर को लेकर विपक्ष का आक्रोश 6 अक्टूबर को सड़कों पर उतर आया — राहुल और प्रियंका गांधी दिल्ली में हिरासत में, गुजरात में वाघेला ने CEC पर पक्षपात का आरोप लगाया। 1 नवंबर की बड़ी रैली से पहले 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान ने रफ्तार पकड़ी।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने 6 अक्टूबर 2026 को CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
इंडिया ब्लॉक सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च किया; नीति आयोग के पास पुलिस ने रोका।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को अस्थायी रूप से हिरासत में लिया गया, बाद में रिहा।
विपक्ष की माँग: एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा और मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली।
वाघेला ने सेवानिवृत्त अफसरों के लिए 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' अनिवार्य करने का सुझाव दिया।
'लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत 1 नवंबर को नई दिल्ली में बड़ी रैली प्रस्तावित।

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। यह बयान ऐसे समय में आया जब नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के खिलाफ जोरदार मार्च निकाला — और पुलिस ने कई शीर्ष विपक्षी नेताओं को अस्थायी रूप से हिरासत में ले लिया।

मार्च और हिरासत: मुख्य घटनाक्रम

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च करने निकले और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने नीति आयोग इलाके के पास मार्च को रोक दिया, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अनेक विपक्षी नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।

गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक ने इस मार्च को अपने व्यापक 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत आयोजित किया था, जिसमें देशभर में विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला और 1 नवंबर को नई दिल्ली में एक बड़ी रैली का कार्यक्रम शामिल है।

वाघेला के आरोप और चुनाव आयोग पर निशाना

वाघेला ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हित में काम किया है और एसआईआर प्रक्रिया तथा पिछले चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के कामकाज से BJP को राजनीतिक लाभ मिला है। हालाँकि, ये आरोप उनकी अपनी राय हैं और चुनाव आयोग ने इन पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

वाघेला ने संवैधानिक संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप की बढ़ती प्रवृत्ति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की हिरासत लोकतांत्रिक असहमति का हिस्सा है और इसे उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए — उन्होंने जोड़ा कि अलग-अलग पीढ़ियों के राजनीतिक नेता जन-आंदोलनों के दौरान गिरफ्तारी झेल चुके हैं।

संवैधानिक नियुक्तियों में सुधार की माँग

पूर्व मुख्यमंत्री ने संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में अधिक पारदर्शिता और जाँच की भी माँग की। उन्होंने सुझाव दिया कि सेवानिवृत्त होने वाले न्यायाधीशों, IAS और IPS अधिकारियों तथा अन्य वरिष्ठ सरकारी अफसरों के लिए कोई नई सरकारी जिम्मेदारी संभालने से पूर्व एक 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' अनिवार्य किया जाए।

वाघेला का राजनीतिक सफर

86 वर्षीय वाघेला का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक के रूप में की और बाद में जनसंघ व BJP से जुड़े। 1995 में BJP से विद्रोह कर 1996 में कांग्रेस के समर्थन से वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने।

बाद में कांग्रेस में शामिल होकर वे लोकसभा सांसद रहे और यूपीए सरकार में कपड़ा मंत्री का पद संभाला। 2017 में कांग्रेस से अलग होने के बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक संगठन बनाए और उनसे जुड़े। फिलहाल वे कांग्रेस में वापसी को लेकर बातचीत कर रहे हैं और पार्टी नेताओं ने पुष्टि की है कि यह प्रक्रिया जारी है।

विपक्ष की माँगें और आगे की राह

इंडिया ब्लॉक एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा और मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली की माँग कर रहा है। यह विवाद ऐसे समय में गहरा रहा है जब देश में अगले चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं और मतदाता सूची की शुद्धता राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गई है। 1 नवंबर की दिल्ली रैली इस आंदोलन की अगली बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतने ही उनके स्रोत को लेकर सवाल भी उठाते हैं — एक ऐसे नेता जो खुद दशकों में कई पार्टियाँ बदल चुके हैं और अभी कांग्रेस में वापसी की कोशिश में हैं। इंडिया ब्लॉक का एसआईआर के खिलाफ मार्च और राहुल-प्रियंका की हिरासत मुद्दे को राष्ट्रीय मंच देती है, लेकिन असली मुद्दा — मतदाता सूची से किन नामों को और किस आधार पर हटाया गया — इस नाटकीयता में दब जाने का खतरा है। मुख्यधारा की कवरेज हिरासत पर केंद्रित है, जबकि एसआईआर की प्रक्रियागत खामियों का स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है?
एसआईआर यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को कहाँ और क्यों हिरासत में लिया गया?
दोनों नेताओं को 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में नीति आयोग इलाके के पास हिरासत में लिया गया, जब पुलिस ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर जा रहे इंडिया ब्लॉक के मार्च को रोका। उन्हें कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया।
शंकरसिंह वाघेला ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
वाघेला ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने BJP के पक्ष में काम किया है और एसआईआर प्रक्रिया तथा पिछले चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के कामकाज से BJP को राजनीतिक फायदा मिला है। उन्होंने संवैधानिक नियुक्तियों में अधिक पारदर्शिता और 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' की माँग भी की।
'लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत आगे क्या होगा?
इंडिया ब्लॉक ने 1 नवंबर को नई दिल्ली में एक बड़ी रैली की योजना बनाई है। इससे पहले देशभर में विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला जारी रहेगी।
शंकरसिंह वाघेला का राजनीतिक इतिहास क्या है?
86 वर्षीय वाघेला ने RSS प्रचारक से शुरुआत कर जनसंघ, BJP और कांग्रेस में काम किया। 1996 में कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने, यूपीए में कपड़ा मंत्री रहे और 2017 में कांग्रेस छोड़ी। फिलहाल कांग्रेस में वापसी की बातचीत चल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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