27 सितंबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगे कांग्रेस सांसद, राहुल गांधी के आरोपों को बताया तथ्य आधारित

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सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगे कांग्रेस सांसद, राहुल गांधी के आरोपों को बताया तथ्य आधारित

सारांश

कांग्रेस सांसदों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर संवैधानिक पद के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए तत्काल इस्तीफे की माँग की। पश्चिम बंगाल और हरियाणा में एसआईआर के तहत मतदाता सूची में फेरबदल के आरोप और राहुल गांधी की तीन साल पुरानी चेतावनी अब केंद्र में हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और कर्मवीर सिंह बौद्ध ने 27 सितंबर 2026 को सीईसी ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
दोनों सांसदों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पिछले तीन वर्षों से उठाए जा रहे एसआईआर और चुनाव आयोग के मुद्दे का समर्थन किया।
कांग्रेस के अनुसार, पश्चिम बंगाल और हरियाणा में एसआईआर के नाम पर कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए और जोड़े गए।
सांसद बौद्ध ने सत्ता पक्ष से डॉ.
भीमराव अंबेडकर के संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि संविधान कमजोर हुआ तो लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद पर गंभीर असर पड़ेगा।

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और कर्मवीर सिंह बौद्ध ने 27 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर उठाए गए सवालों का पूरी तरह समर्थन किया। दोनों सांसदों ने आरोप लगाया कि सीईसी ने अपने संवैधानिक पद का कथित तौर पर दुरुपयोग किया है और चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है।

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह का बयान

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि सच्चाई अब देश की जनता के सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और अब यह मामला सबके सामने आ गया है।" उन्होंने माँग की कि यदि सीईसी स्वयं इस्तीफा नहीं देते, तो सरकार को उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।

सिंह ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और कहा कि एसआईआर के नाम पर पश्चिम बंगाल और हरियाणा में मतदाता सूचियों में कथित तौर पर मनमाने ढंग से बदलाव किए गए — जहाँ पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम हटाए गए और नए नाम जोड़े गए।

कर्मवीर सिंह बौद्ध की संविधान रक्षा की अपील

कांग्रेस सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि राहुल गांधी की बात पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है और पूरी कांग्रेस पार्टी तथा विपक्ष एकजुट होकर सीईसी के इस्तीफे की माँग कर रहा है। उन्होंने सत्ता पक्ष के नेताओं से अपील करते हुए कहा कि जो लोग बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान की वजह से मंत्री, विधायक और सांसद बने हैं, उन्हें संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए।

बौद्ध ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में संविधान कमजोर हुआ, तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का कथित तौर पर दुरुपयोग करने वाले लोगों को सभी मिलकर बेनकाब करें।

चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल

कांग्रेस सांसदों ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक आयोग स्वतंत्र संस्थाएँ हैं जिन्हें भारतीय संविधान ने किसी भी राजनीतिक दल या सरकार के प्रभाव से मुक्त रहकर काम करने का अधिकार दिया है। उनके अनुसार, इन संस्थाओं ने कथित तौर पर अपनी स्वतंत्रता और नियम कायदों को स्वयं कमजोर कर दिया है।

सांसदों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की बैठकों में दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने समय समय पर आवाज उठाई, लेकिन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने माँग की कि ऐसे अधिकारियों को संवैधानिक पदों पर नियुक्त न किया जाए जो संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाएँ।

पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर — मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया — को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक नाराजगी है। राहुल गांधी कथित तौर पर तीन वर्षों से इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं। यह विवाद ऐसे वक्त में और गहरा हो गया है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं।

आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह यह मुद्दा उठाता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है — जब कई राज्यों में चुनावी चक्र करीब है और एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोप लगातार तेज हो रहे हैं। असली सवाल यह है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र जाँच क्यों नहीं हुई। चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता केवल इस्तीफे या बर्खास्तगी से नहीं, बल्कि पारदर्शी जवाबदेही तंत्र से बहाल होती है — जिसकी माँग सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों को समान रूप से करनी चाहिए।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस सांसद सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँग रहे हैं?
कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने अपने संवैधानिक पद का कथित तौर पर दुरुपयोग किया और चुनाव आयोग की स्वायत्तता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया। उनका कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल और हरियाणा में मतदाता सूचियों में मनमाने बदलाव किए गए।
एसआईआर (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल और हरियाणा में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए और नए नाम जोड़े गए, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
राहुल गांधी कब से यह मुद्दा उठा रहे हैं?
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह के अनुसार, राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से लगातार एसआईआर और चुनाव आयोग की स्वायत्तता के मुद्दे को उठाते रहे हैं। अब इस मुद्दे ने व्यापक राजनीतिक चर्चा का रूप ले लिया है।
क्या चुनाव आयोग के अन्य आयुक्तों ने भी आपत्ति जताई है?
कांग्रेस सांसदों के अनुसार, दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने समय समय पर आवाज उठाई, लेकिन उनकी आवाज को कथित तौर पर दबाने की कोशिश की गई। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस ने सरकार से क्या कार्रवाई करने की माँग की है?
कांग्रेस ने माँग की है कि यदि सीईसी ज्ञानेश कुमार स्वयं इस्तीफा नहीं देते, तो सरकार को उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही पार्टी ने माँग की कि ऐसे अधिकारियों को संवैधानिक पदों पर नियुक्त न किया जाए जो संस्थाओं की साख को नुकसान पहुँचाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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