इंडी गठबंधन का एसआईआर के खिलाफ संसद से निर्वाचन आयोग तक मार्च, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी इंडी गठबंधन के सांसदों ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में संसद भवन से भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक जोरदार विरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के खिलाफ था। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वाम दलों समेत गठबंधन के दर्जनों सांसद इस मार्च में शामिल हुए।
विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने गठबंधन की मांगें स्पष्ट करते हुए कहा कि विपक्ष तीन बिंदुओं पर अडिग है — पहला, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें; दूसरा, एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द किया जाए; और तीसरा, भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि यह लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है और विपक्ष उन ताकतों के सामने नहीं झुकेगा जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर कर रही हैं।
एसआईआर और फॉर्म-6 पर कानूनी सवाल
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक दृष्टि से चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया असंवैधानिक और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति या बहुमत से होने चाहिए, लेकिन मुख्य निर्वाचन आयुक्त कथित तौर पर एकतरफा निर्णय ले रहे हैं।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर कहा कि चुनाव आयोग ने दावा किया था कि संशोधन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आधारित है, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया है कि उसने ऐसे किसी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी। उनके अनुसार, इस प्रकार के बदलाव केवल कानून के माध्यम से किए जा सकते हैं।
कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों के ज़रिए कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
अखिलेश यादव और वाम दलों के आरोप
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लगाए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों तथा चंडीगढ़ मेयर चुनाव विवाद का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे प्रकरणों को भुलाया नहीं जा सकता।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनावी प्रक्रिया में धांधली होती है तो लोकतंत्र की अर्थवत्ता ही समाप्त हो जाती है।
सांसदों के तीखे बयान
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, 'उन्हें हमें रोकने दीजिए — आप इस देश को कब तक रोकेंगे? विपक्ष के ज़रिए पूरा देश सड़कों पर है। हम ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगा रहे हैं लेकिन जवाब भाजपा दे रही है — दोनों के बीच क्या रिश्ता है?' उन्होंने यह भी कहा कि यह विरोध प्रदर्शन केवल शुरुआत है और संघर्ष जारी रहेगा।
कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इसे 'आज़ादी की दूसरी लड़ाई' बताते हुए कहा, 'जब तक हम इस देश को लोकतंत्र के दुश्मनों से आज़ाद नहीं करा लेते, तब तक यह स्वीकार नहीं होगा।' TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) स्वाभाविक रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त का बचाव करेगी, क्योंकि आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से सत्ताधारी दल को लाभ मिल रहा है।
आगे क्या होगा
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मामला न्यायिक मंच पर भी उठाया जा सकता है, यह संकेत कई नेताओं के बयानों में मिले हैं। विपक्षी गठबंधन का यह प्रदर्शन चुनावी सुधारों और निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता पर एक बड़ी राजनीतिक बहस की शुरुआत हो सकती है।