12 अक्टूबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट मार्च, कांग्रेस बोली — संविधान बचाने की लड़ाई

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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट मार्च, कांग्रेस बोली — संविधान बचाने की लड़ाई

सारांश

वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं के आरोप में इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। कांग्रेस ने इसे संविधान बचाने की जंग बताया, सीजेआई के मिलने से इनकार पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

मुख्य बातें

इंडिया गठबंधन ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकाला।
मार्च का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं के कथित आरोप हैं।
कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में यह मार्च संवैधानिक भारत की रक्षा के लिए है।
सीजेआई सूर्यकांत द्वारा गठबंधन नेताओं से मुलाकात से कथित इनकार पर कांग्रेस ने तीखी आपत्ति जताई।
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने सीजेआई की भूमिका पर सवाल उठाए।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इसे 'जनता का मार्च' बताते हुए BJP के लोकतांत्रिक सदस्यों को भी शामिल होने का आमंत्रण दिया।

विपक्षी इंडिया गठबंधन ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। मार्च से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्यालय AICC परिसर में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की।

मार्च का उद्देश्य और नेताओं के बयान

कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा, 'हम सभी एक ही मुद्दे के लिए लड़ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगी — जो कोई भी संवैधानिक भारत में विश्वास करता है, उसका इस विरोध प्रदर्शन में स्वागत है।' कांग्रेस सांसद करमवीर बौद्ध ने इस मार्च को संविधान बचाने की लड़ाई बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कर्तव्य है कि वह उन मामलों पर ध्यान दे जहाँ संविधान की अनदेखी हो रही हो।

गठबंधन का आरोप — चुनाव आयोग पर पक्षपात

पूर्व कांग्रेस सांसद एस. सैदुज्जमान ने आरोप लगाया कि चुनावों में अनियमितताएँ हो रही हैं और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। उनके अनुसार चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रभाव में पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है। गठबंधन दलों का कहना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस इसी मुद्दे को लेकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं।

सीजेआई द्वारा मुलाकात से इनकार पर तीखी प्रतिक्रिया

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत द्वारा इंडिया गठबंधन के नेताओं से मिलने से कथित तौर पर इनकार किए जाने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने कहा, 'सीजेआई को भारतीय जनता पार्टी के सदस्य की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए।' हालाँकि, यह ध्यान देने योग्य है कि सीजेआई का किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से न मिलना न्यायपालिका की स्वतंत्रता की स्वीकृत परंपरा का हिस्सा भी माना जाता है।

जनता का मार्च — कांग्रेस प्रवक्ता का संदेश

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्पष्ट किया कि यह मार्च किसी एक दल या नेता का नहीं, बल्कि 'देश की जनता का मार्च' है। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक पार्टियाँ अपने मतभेद भुलाकर आज देश और संविधान को बचाने के लिए एकजुट हुई हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि BJP में भी जो लोकतांत्रिक सोच रखते हों, उन्हें इस मार्च में शामिल होना चाहिए। राजपूत ने आरोप लगाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद पर बनाए रखने के लिए युवाओं और प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।

आगे क्या होगा

यह विरोध मार्च ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया पर राष्ट्रव्यापी बहस चल रही है। गठबंधन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इंडिया गठबंधन की अगली रणनीति पर बैठक अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आंदोलन की असली ज़मीन को कमज़ोर भी कर सकती है। सीजेआई से मुलाकात की माँग और उनके इनकार पर सियासी बयानबाज़ी न्यायपालिका की स्वतंत्रता की उस परंपरा को नज़रअंदाज करती है जिसकी हिफाजत खुद विपक्ष करता रहा है। मुख्यधारा की कवरेज में यह अनदेखा रह गया कि गठबंधन ने अभी तक चुनावी अनियमितताओं के ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए हैं — सिर्फ आरोप काफी नहीं होते। असली जवाबदेही के लिए संस्थागत रास्ते — चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत, न्यायिक याचिका — सड़क मार्च से ज़्यादा कारगर होते हैं।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च क्यों निकाला?
इंडिया गठबंधन ने वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। कांग्रेस ने इसे संविधान और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप हैं?
विपक्षी दलों का आरोप है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है और चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताएँ हो रही हैं। हालाँकि, ये आरोप अब तक विपक्ष के बयानों पर आधारित हैं और चुनाव आयोग ने इन्हें नकारा है।
सीजेआई सूर्यकांत ने गठबंधन नेताओं से मिलने से क्यों मना किया?
रिपोर्टों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इंडिया गठबंधन के नेताओं से मिलने से इनकार किया। न्यायपालिका की स्थापित परंपरा के तहत सीजेआई राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों से आमतौर पर नहीं मिलते, हालाँकि कांग्रेस ने इस पर तीखी आपत्ति जताई।
इस मार्च में कौन-कौन से नेता शामिल थे?
मार्च में कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती, करमवीर बौद्ध, पूर्व सांसद एस. सैदुज्जमान और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद समेत इंडिया गठबंधन के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। राहुल गांधी के नेतृत्व में यह मार्च निकाला गया।
इंडिया गठबंधन आगे क्या करेगा?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के अनुसार यदि माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। गठबंधन की अगली रणनीति पर बैठक अपेक्षित है और आंदोलन को व्यापक जन-समर्थन से जोड़ने की कोशिश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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