इंडिया गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट मार्च संस्थाओं की रक्षा के लिए: CM सुक्खू
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उन संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए है जिन्हें बचाने के लिए कांग्रेस नेताओं ने ऐतिहासिक रूप से अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि यह मार्च उस चीज़ के विरुद्ध खड़ा होना है जिसे वे 'लोकतंत्र की हत्या' मानते हैं।
मार्च का उद्देश्य
सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह मजबूती से अपनी आवाज़ उठाए। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी अपनी बात सभी संवैधानिक संस्थाओं तक पहुँचाने की कोशिश कर रही है। किसी भी विपक्षी दल की जिम्मेदारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना नहीं है।' उनके अनुसार, पिछले 70-80 वर्षों से मजबूत चले आ रहे लोकतंत्र को कमज़ोर करने की कोशिशें हुई हैं और यह मार्च उन्हीं कोशिशों के विरोध में है।
राहुल गांधी के आरोपों का संदर्भ
सुक्खू ने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने करीब दो साल पहले कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाया था। उनका दावा है कि वर्तमान में सामने आ रहे घटनाक्रम उन्हीं चिंताओं की पुष्टि करते हैं। गौरतलब है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उठाने की तैयारी में हैं।
सरकार पर दमन के आरोप
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए रेलवे स्टेशन बंद किए जा रहे हैं और इंटरनेट सेवाएँ रोकी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी सरकार जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश करती है, 'लेकिन इसे दबाया नहीं जा सकता।' ये आरोप सरकार की ओर से अभी तक खंडित नहीं किए गए हैं।
हिमाचल का समर्थन और उपमुख्यमंत्री का बयान
हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि राहुल गांधी के 'दिल्ली चलो' आह्वान पर हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लोग नई दिल्ली पहुँचे हैं। अग्निहोत्री के अनुसार, प्रतिभागी सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के दृढ़ संकल्प के साथ आए हैं। यह मार्च इंडिया गठबंधन के व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है, जो चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग कर रहा है।
आगे क्या
इंडिया गठबंधन का यह मार्च संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी निष्पक्षता के व्यापक विमर्श को एक नई धार देता है। सुक्खू के बयानों से संकेत मिलता है कि विपक्ष इस मुद्दे को न्यायिक और सार्वजनिक दोनों मंचों पर आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।