राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट मार्च से देश को 'अराजकता' की ओर धकेल रहे हैं: असम CM हिमंता बिस्वा सरमा
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस का सर्वोच्च न्यायालय मार्च लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा है। सरमा ने चेतावनी दी कि न्यायिक निर्णयों के विरुद्ध इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन भारत को 'अराजकता' की दिशा में धकेल सकते हैं। गुवाहाटी से बोलते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक असंतोष को न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर आघात करने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
मुख्य आरोप और बयान
सरमा ने कहा, 'मैंने कभी किसी को सुप्रीम कोर्ट को इस तरह धमकी देते नहीं देखा।' उनके अनुसार, राहुल गांधी संविधान की रक्षा करने वाली और न्याय प्रशासन के लिए जिम्मेदार संस्थाओं के विरुद्ध लोगों को लामबंद करके एक खतरनाक मिसाल कायम कर रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यदि इस तरह के प्रदर्शनों को राजनीतिक प्रतिरोध का मान्य रूप माना जाने लगे, तो अदालती फैसलों से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति या समूह इसी राह पर चल सकता है।
न्यायपालिका पर असर की चेतावनी
सरमा ने तर्क दिया कि अगर कोई भी व्यक्ति मुकदमा हारने पर सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटाने लगे, तो देश की पूरी न्यायिक प्रणाली गंभीर संकट में पड़ जाएगी। उन्होंने इसे कानून के शासन के लिए एक सीधा खतरा बताया। उनके अनुसार, राजनीतिक नेताओं और आम नागरिकों, दोनों की जिम्मेदारी है कि वे न्यायिक कार्यवाही का सम्मान करें — भले ही निर्णय उनके पक्ष में न हों।
कांग्रेस पर संस्थागत विफलता का आरोप
सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह एक ऐसी राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है जिसमें प्रतिकूल परिणामों — चाहे अदालत में हों या चुनाव में — का दोष संस्थागत कुप्रथाओं पर डाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हार को स्वीकार कर मतदाताओं के सामने मजबूत विकल्प प्रस्तुत करना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल का कर्तव्य है।
कांग्रेस मार्च की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि कांग्रेस का सर्वोच्च न्यायालय मार्च संस्थागत विफलताओं के विरुद्ध उसके व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा था। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज पर भी पार्टी पहले से सवाल उठाती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
सरमा के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच न्यायपालिका की भूमिका तथा विरोध प्रदर्शनों की वैधता पर बहस संसदीय और सार्वजनिक मंचों पर जारी रहने के आसार हैं।