संभल हिंसा: मौलाना अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से राहत पर मौलाना साजिद रशीदी बोले — 'न्याय तंत्र में ईमानदारी बाकी है'
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संभल हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मौलाना अफरोज को राहत दिए जाने पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 29 सितंबर को तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी और भी कई आरोपियों को सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिलने की संभावना है। रशीदी ने इस फैसले को न्याय तंत्र की ईमानदारी का प्रमाण बताया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, 'आज भी न्यायतंत्र में कहीं न कहीं ईमानदारी बाकी है। जिस तरीके से मुसलमानों को फंसाने का काम किया गया था, वही ईमानदारी काम आई है और इस तरह के मामलों में राहत मिली है।' उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस जब आरोपियों के खिलाफ अदालत में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहती है, तो न्यायतंत्र उन्हें बरी करता है — और यह न्यायिक प्रक्रिया का सराहनीय पहलू है।
अखिलेश यादव पर तीखा हमला
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर मदरसों से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाएगा — रशीदी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'आप मुसलमानों को धक्के मारकर महफिलों से भगा रहे हो, मुसलमानों को बेइज्जत कर रहे हो, कुर्सी से उठाकर दूसरों को बिठा रहे हो, मौलानाओं को बदनाम कर रहे हो, मुसलमान को उसकी हिस्सेदारी देना नहीं चाहते और मदरसों के नाम पर सियासत करना चाहते हो।' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अखिलेश किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाने की बात करें, तभी उन्हें मुसलमानों का हितैषी माना जाएगा।
ओवैसी पर भी निशाना
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी रशीदी ने हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी मुसलमानों के नाम पर 'घटिया राजनीति' कर रहे हैं और समुदाय को प्रताड़ित करने का काम कर रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई राजनीतिक दलों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज हो रही है।
मुस्लिम युवाओं की शिक्षा में प्रगति
रशीदी ने मुस्लिम समुदाय की शैक्षिक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में मुस्लिम युवा बड़ी संख्या में सफल हो रहे हैं — दो वर्ष पूर्व 76 और पिछले वर्ष 53 उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए। इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 48 मुस्लिम युवा पुलिस सेवा में भर्ती हुए। उन्होंने कहा कि इन आँकड़ों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर गंभीर चिंता
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर रशीदी ने गहरी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश में तीन करोड़ नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, जिससे हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों में भय का माहौल है। उन्होंने कहा, 'कहीं बाप का नाम नहीं है तो बेटे का नाम है, कहीं मां का नाम है तो बेटी का नाम नहीं है — इस तरह लाखों की तादाद में नाम काटे जा रहे हैं।' रशीदी ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठियों को बाहर करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वैध दस्तावेज़ रखने वाले नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं। उन्होंने इस मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन की आवश्यकता बताई।