मौलाना साजिद रशीदी का बड़ा बयान: मुसलमानों को मंचों से डराया-धमकाया जा रहा है
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 18 मई — मौलाना साजिद रशीदी ने मौलाना अरशद मदनी के बयान के संदर्भ में कहा है कि देश में मुसलमानों को सार्वजनिक मंचों से लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और हकीकत यह है कि मुसलमान आज भयभीत महसूस कर रहा है। उन्होंने यह बात एक बातचीत में कही।
मुसलमानों को डराने का आरोप
रशीदी ने कहा कि जिस तरह से विभिन्न मंचों से मुसलमानों के बारे में बयान दिए जाते हैं, उससे स्पष्ट होता है कि समाज में एक वर्ग विशेष को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति सामाजिक सौहार्द के लिए चिंताजनक है।
धार्मिक ध्वनि विवाद पर पलटवार
उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रशीदी ने कहा कि उनके गाँव से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर एक मंदिर है, जहाँ प्रतिदिन सुबह तीन बजे आरती होती है। उन्होंने कहा, 'किसी मुसलमान ने कभी नहीं पूछा कि मंदिर में इतनी आवाज़ें क्यों हैं या घंटी क्यों बज रही है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सड़कों पर रात भर जागरण होते हैं, डीजे बजते हैं और कांवड़ यात्रा के दौरान इतना शोर होता है कि 'धरती हिल जाए', फिर भी किसी मुसलमान ने कभी शिकायत नहीं की।
भोजशाला मामले पर उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती
भोजशाला विवाद में उच्च न्यायालय के हालिया आदेश को साजिद रशीदी ने 'एकतरफा' बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और उनका मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय इस आदेश को निरस्त करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरस्वती की जो प्रतिमा का उल्लेख किया जाता है, वह लंदन में है, इसलिए उसे वहाँ से लाकर स्थापित किया जाए। रशीदी के अनुसार, 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने लिखित आदेश में वहाँ जुमे की नमाज़ की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि जल्दबाज़ी में यज्ञ करना, पूजा करना और मूर्तियाँ रख देना किसी की आस्था का अनादर है, और किसी को भी दूसरे की आस्था का अनादर करने का अधिकार नहीं है।
भाजपा नेता के बयान पर जवाब
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अग्निमित्रा पॉल के बयान पर रशीदी ने कहा कि वे वेदों, उपनिषदों और गीता को पढ़ चुके हैं और उन्हें कहीं ऐसा नहीं मिला जो यह कहे कि हर जगह ईश्वर को देखो। उन्होंने कहा, 'हम अपनी माँ को भी पूजनीय नहीं मानते, उसकी पूजा नहीं करते, तो धरती को सजदा कैसे कर सकते हैं?' उनके अनुसार इस्लाम की मूल शिक्षा एकेश्वरवाद है और सृष्टि की हर चीज़ का आदर करना चाहिए।
आगे क्या
रशीदी के अनुसार भोजशाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी। यह विवाद धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और उपयोग को लेकर देश में चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है, जिस पर सभी पक्षों की नज़रें टिकी हैं।