मौलाना साजिद रशीदी का बड़ा बयान: मुसलमानों को मंचों से डराया-धमकाया जा रहा है

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मौलाना साजिद रशीदी का बड़ा बयान: मुसलमानों को मंचों से डराया-धमकाया जा रहा है

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी ने मौलाना अरशद मदनी के बयान के संदर्भ में सीधे आरोप लगाए कि देश में मुसलमानों को मंचों से डराया जा रहा है। साथ ही भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय के फैसले को 'एकतरफा' बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा की।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि सार्वजनिक मंचों से मुसलमानों को डराया-धमकाया जा रहा है और समुदाय भयभीत है।
उत्तर प्रदेश मंत्री जयवीर सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा — कांवड़ यात्रा और जागरण पर कभी किसी मुसलमान ने शिकायत नहीं की।
भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय के आदेश को 'एकतरफा' बताया; सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का ऐलान किया।
ASI ने 2003 में भोजशाला में जुमे की नमाज़ की लिखित अनुमति दी थी — रशीदी ने इसका हवाला दिया।
BJP नेता अग्निमित्रा पॉल के बयान पर कहा — वेद, उपनिषद और गीता में हर जगह ईश्वर देखने की बात नहीं है।

नई दिल्ली, 18 मईमौलाना साजिद रशीदी ने मौलाना अरशद मदनी के बयान के संदर्भ में कहा है कि देश में मुसलमानों को सार्वजनिक मंचों से लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और हकीकत यह है कि मुसलमान आज भयभीत महसूस कर रहा है। उन्होंने यह बात एक बातचीत में कही।

मुसलमानों को डराने का आरोप

रशीदी ने कहा कि जिस तरह से विभिन्न मंचों से मुसलमानों के बारे में बयान दिए जाते हैं, उससे स्पष्ट होता है कि समाज में एक वर्ग विशेष को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति सामाजिक सौहार्द के लिए चिंताजनक है।

धार्मिक ध्वनि विवाद पर पलटवार

उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रशीदी ने कहा कि उनके गाँव से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर एक मंदिर है, जहाँ प्रतिदिन सुबह तीन बजे आरती होती है। उन्होंने कहा, 'किसी मुसलमान ने कभी नहीं पूछा कि मंदिर में इतनी आवाज़ें क्यों हैं या घंटी क्यों बज रही है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सड़कों पर रात भर जागरण होते हैं, डीजे बजते हैं और कांवड़ यात्रा के दौरान इतना शोर होता है कि 'धरती हिल जाए', फिर भी किसी मुसलमान ने कभी शिकायत नहीं की।

भोजशाला मामले पर उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती

भोजशाला विवाद में उच्च न्यायालय के हालिया आदेश को साजिद रशीदी ने 'एकतरफा' बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और उनका मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय इस आदेश को निरस्त करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरस्वती की जो प्रतिमा का उल्लेख किया जाता है, वह लंदन में है, इसलिए उसे वहाँ से लाकर स्थापित किया जाए। रशीदी के अनुसार, 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने लिखित आदेश में वहाँ जुमे की नमाज़ की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि जल्दबाज़ी में यज्ञ करना, पूजा करना और मूर्तियाँ रख देना किसी की आस्था का अनादर है, और किसी को भी दूसरे की आस्था का अनादर करने का अधिकार नहीं है।

भाजपा नेता के बयान पर जवाब

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अग्निमित्रा पॉल के बयान पर रशीदी ने कहा कि वे वेदों, उपनिषदों और गीता को पढ़ चुके हैं और उन्हें कहीं ऐसा नहीं मिला जो यह कहे कि हर जगह ईश्वर को देखो। उन्होंने कहा, 'हम अपनी माँ को भी पूजनीय नहीं मानते, उसकी पूजा नहीं करते, तो धरती को सजदा कैसे कर सकते हैं?' उनके अनुसार इस्लाम की मूल शिक्षा एकेश्वरवाद है और सृष्टि की हर चीज़ का आदर करना चाहिए।

आगे क्या

रशीदी के अनुसार भोजशाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी। यह विवाद धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और उपयोग को लेकर देश में चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है, जिस पर सभी पक्षों की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

धार्मिक ध्वनि विवाद और भोजशाला — जो दर्शाता है कि मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक प्रतिवाद की मुद्रा में है। भोजशाला पर सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा कानूनी लड़ाई को नई दिशा दे सकती है, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऐसे बयान अक्सर ध्रुवीकरण को और गहरा करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि रशीदी ने वेद-गीता का हवाला देकर अंतर-धार्मिक संवाद का एक द्वार भी खोला — जिसे राजनीतिक शोर में दबा दिया जाता है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने मुसलमानों को डराने के बारे में क्या कहा?
रशीदी ने कहा कि सार्वजनिक मंचों से मुसलमानों के बारे में जिस तरह के बयान दिए जाते हैं, उससे स्पष्ट है कि समुदाय को डराया-धमकाया जा रहा है और हकीकत में मुसलमान आज भयभीत है। यह बयान उन्होंने मौलाना अरशद मदनी के बयान के संदर्भ में दिया।
भोजशाला मामले में साजिद रशीदी का क्या रुख है?
रशीदी ने उच्च न्यायालय के भोजशाला फैसले को 'एकतरफा' बताया और कहा कि इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। उनका मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय इस आदेश को निरस्त करेगा और मुसलमान वहाँ नमाज़ पढ़ सकेंगे।
2003 में ASI ने भोजशाला को लेकर क्या आदेश दिया था?
रशीदी के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 2003 में लिखित आदेश में भोजशाला में जुमे की नमाज़ की अनुमति दी थी। इसी आधार पर वे उच्च न्यायालय के हालिया फैसले को एकपक्षीय बता रहे हैं।
जयवीर सिंह के बयान पर रशीदी ने क्या जवाब दिया?
उत्तर प्रदेश के मंत्री जयवीर सिंह के बयान पर रशीदी ने कहा कि उनके गाँव के पास सुबह तीन बजे आरती होती है, रात भर जागरण और डीजे बजते हैं, कांवड़ यात्रा में भारी शोर होता है — लेकिन किसी मुसलमान ने कभी शिकायत नहीं की। उनका तर्क था कि धार्मिक ध्वनि को लेकर दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है।
BJP नेता अग्निमित्रा पॉल के बयान पर रशीदी की क्या प्रतिक्रिया थी?
रशीदी ने कहा कि उन्होंने वेद, उपनिषद और गीता पढ़ी हैं और उन्हें कहीं यह नहीं मिला कि हर जगह ईश्वर को देखा जाए। उन्होंने इस्लाम के एकेश्वरवाद की व्याख्या करते हुए कहा कि सृष्टि की हर चीज़ का आदर करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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