भोजशाला फैसले पर मदनी बोले — 'सहमत नहीं, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे'; BJP ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा भोजशाला को लेकर सुनाए गए फैसले के बाद देश में तीखी राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद अरशद मदनी ने 15 मई को स्पष्ट किया कि वे इस फैसले से सहमत नहीं हैं और ज़रूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस निर्णय को सांस्कृतिक विरासत की जीत बताया।
मदनी का रुख — 'यह देश के दस्तूर का सवाल है'
मीडिया से बातचीत में मौलाना मदनी ने कहा कि वैकल्पिक जगह का कोई अवधारणा ही स्वीकार्य नहीं है — 'अगर मिलेगा तो वही जगह लेंगे।' उन्होंने इस मामले को महज़ एक मस्जिद का विवाद नहीं, बल्कि संविधान और कानून की कसौटी पर खरा उतरने की लड़ाई बताया। मदनी ने यह भी कहा कि जिस तरह ज्ञानवापी मामले में संबंधित पक्ष कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, उसी तरह भोजशाला पर भी संघर्ष जारी रहेगा।
BJP का पक्ष — ASI रिपोर्ट को बताया आधार
BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि न्यायालय ने अपना निर्णय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 2,100 पृष्ठों की रिपोर्ट के आधार पर दिया है। उनके अनुसार, उस रिपोर्ट में भोजशाला की भूमि को मंदिर परिसर के रूप में चिह्नित किया गया है और पार्टी इस फैसले का पूरा सम्मान करती है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर खंडपीठ के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय 'हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है।' उन्होंने कहा कि ASI के संरक्षण और प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं के पूजा-अर्चना के अधिकार सुनिश्चित होंगे।
मां वाग्देवी की प्रतिमा — यूके से वापसी की माँग
मुख्यमंत्री यादव ने न्यायालय के उस निर्देश का भी स्वागत किया जिसमें केंद्र सरकार को मां वाग्देवी की प्रतिमा को यूनाइटेड किंगडम (UK) से भारत वापस लाने पर विचार करने को कहा गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार भी इस दिशा में आवश्यक प्रयास करेगी। गौरतलब है कि भोजशाला का यह विवाद दशकों पुराना है और धार जिले में स्थित इस परिसर को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के अपने-अपने ऐतिहासिक दावे रहे हैं।
आगे क्या होगा
मदनी के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मामला सर्वोच्च न्यायालय तक जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई धार्मिक स्थलों की ऐतिहासिक स्थिति को लेकर कानूनी लड़ाइयाँ एक साथ चल रही हैं। न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण और केंद्र सरकार की प्रतिमा-वापसी पर प्रतिक्रिया, दोनों पर देशभर की निगाहें टिकी रहेंगी।