भोजशाला फैसले पर हरि शंकर जैन: 'मंदिर था, मंदिर है' — आक्रांताओं का अन्याय दूर हुआ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भोजशाला फैसले पर हरि शंकर जैन: 'मंदिर था, मंदिर है' — आक्रांताओं का अन्याय दूर हुआ

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया, ASI सर्वे के आधार पर 1034 के सरस्वती मंदिर के प्रमाण स्वीकार किए और वाग्देवी प्रतिमा वापसी का निर्देश दिया। वकील हरि शंकर जैन ने इसे 'पूरे देश की जीत' बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय जाने के संकेत दिए।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया और हिंदुओं के पूजा अधिकार को मान्यता दी।
ASI सर्वे में वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के माध्यम से सन् 1034 में राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर के पुरातात्विक प्रमाण मिले।
न्यायालय ने वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने का निर्देश दिया और ASI के पूर्व आदेश को निरस्त किया।
वकील हरि शंकर जैन ने फैसले को 'पूरे देश की जीत' बताया और अन्य मंदिर स्थलों को वापस लाने का प्रण दोहराया।
काजी सैयद निसार अली ने फैसले को एकपक्षीय बताया और सर्वोच्च न्यायालय में अपील की संभावना जताई।

वकील हरि शंकर जैन ने 15 मई 2026 को भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना है कि वहाँ एक मंदिर था और हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। उनके अनुसार यह फैसला सदियों पुराने उस अन्याय को दूर करता है जो आक्रांताओं ने किया था।

मुख्य घटनाक्रम

हरि शंकर जैन ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के माध्यम से ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक प्रमाण सामने आए। उनके अनुसार इन साक्ष्यों से यह स्थापित होता है कि सन् 1034 में राजा भोज ने वहाँ सरस्वती मंदिर और संस्कृत पाठशाला का निर्माण करवाया था।

जैन ने आगे कहा कि मुस्लिम आक्रांताओं ने उस मंदिर को ध्वस्त कर एक ढाँचा खड़ा किया और वहाँ नमाज़ पढ़ना शुरू कर दिया। उनका तर्क है कि 'नमाज़ पढ़ लेने मात्र से कोई ढाँचा मस्जिद नहीं बन जाता।'

न्यायालय का रुख

जैन के अनुसार उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उस स्थल का धार्मिक स्वरूप मंदिर का है। न्यायालय ने ASI के पूर्व आदेश को भी निरस्त किया और वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने का निर्देश दिया। जैन ने रेखांकित किया कि यह फैसला मात्र चार वर्षों में आया, जिसे उन्होंने 'पूरे देश की जीत' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रण है कि जितने मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई गई है, उन सबको वापस लाया जाएगा।

विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश पर टिप्पणी करना उचित नहीं है और लोगों को अदालत के फैसले को स्वीकार करना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उन्होंने फैसला नहीं पढ़ा है इसलिए वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगी, लेकिन उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के लिए काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।

काजी सैयद निसार अली ने कहा कि यह फैसला एक पक्ष के पक्ष में गया है और यह अंतिम नहीं है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय में अपील का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की अदालतों पर भरोसा है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।

आगे की राह

यह मामला कथित तौर पर सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना है, जैसा कि मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है। गौरतलब है कि भोजशाला विवाद दशकों पुराना है और यह मध्य प्रदेश के धार ज़िले में स्थित है, जहाँ दोनों समुदाय अपने-अपने अधिकारों का दावा करते रहे हैं। उच्च न्यायालय का यह फैसला उस लंबी कानूनी लड़ाई में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह विवाद का अंत नहीं — बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। हरि शंकर जैन का यह बयान कि 'जितने मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई गई, सबको वापस लाना है' एक व्यापक कानूनी-राजनीतिक एजेंडे की ओर इशारा करता है जो भोजशाला से बहुत आगे जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या न्यायपालिका पर ऐसे मामलों का बोझ बढ़ेगा और सामाजिक सौहार्द पर इसका क्या असर पड़ेगा — जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का फैसला क्या है?
उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया और ASI सर्वे के आधार पर माना कि वहाँ सन् 1034 में राजा भोज ने सरस्वती मंदिर बनवाया था। न्यायालय ने हिंदुओं के पूजा अधिकार को मान्यता दी और वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने का निर्देश दिया।
ASI सर्वे में भोजशाला के बारे में क्या पाया गया?
ASI ने वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी सहित सर्वेक्षण किया जिसमें ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य सामने आए। वकील हरि शंकर जैन के अनुसार इन साक्ष्यों से 1034 में राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर और संस्कृत पाठशाला की पुष्टि होती है।
क्या भोजशाला का यह फैसला अंतिम है?
नहीं, यह अंतिम फैसला नहीं है। काजी सैयद निसार अली ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय में अपील का रास्ता खुला है और उन्हें भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।
भोजशाला विवाद क्या है और यह कहाँ स्थित है?
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय दशकों से अपने-अपने अधिकारों का दावा करते रहे हैं। हिंदू पक्ष इसे सरस्वती मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है।
हरि शंकर जैन ने इस फैसले के बाद क्या कहा?
वकील हरि शंकर जैन ने फैसले को 'पूरे देश की जीत' बताया और कहा कि आक्रांताओं ने जो अन्याय किया था वह दूर हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रण है कि जितने भी मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई गई है, उन सबको वापस लाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 29 मिनट पहले
  2. 59 मिनट पहले
  3. 1 घंटा पहले
  4. 1 घंटा पहले
  5. 2 घंटे पहले
  6. 5 घंटे पहले
  7. 7 घंटे पहले
  8. 8 घंटे पहले