भोजशाला मंदिर फैसला: साध्वी ऋतंभरा बोलीं — 'सत्य की जीत, सनातन समाज को बधाई'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार की भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी सरस्वती मंदिर स्थल घोषित किए जाने के बाद हिंदू धार्मिक और सामाजिक संगठनों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सत्य की जीत है और समस्त सनातन समाज को इसकी बधाई।
साध्वी ऋतंभरा की प्रतिक्रिया
साध्वी ऋतंभरा ने कहा, 'कोई भी वहाँ जाएगा तो समझ में आ जाएगा कि वह हिंदुओं का मंदिर है। भोजशाला हमें मिल गई है।' उन्होंने आगे कहा कि अब जल्द ही देवी सरस्वती की प्रतिमा वापस लौटाई जाएगी और भोजशाला में स्थापित की जाएगी।
अन्य धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया
साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि गुलामी के कालखंड में आक्रांताओं ने धार्मिक स्थानों पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने इस फैसले को 'बहुत ही सुखद' बताया और कहा, 'अच्छे फैसलों से देश का स्वाभिमान जागता है। माँ सरस्वती के आने का हमें पूरा विश्वास है।' उन्होंने न्यायपालिका और वकीलों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वेद आचार्य रामस्वरूप महाराज ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह स्थान एक मंदिर का है। उन्होंने कहा, 'यहाँ का एक-एक पत्थर बोल रहा है। वहाँ के पत्थरों पर उस समय से श्लोक अंकित हैं।'
वीएचपी का रुख
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस फैसले को 'बहुत अच्छा' बताया। उन्होंने कहा कि निर्णय सुनाने से पहले अदालत ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट की प्रति सभी पक्षों को उपलब्ध कराई गई और दोनों पक्षों को विस्तार से बहस का अवसर मिला।
आलोक कुमार ने यह भी बताया कि दोनों न्यायाधीश फैसले से पहले स्वयं परिसर का निरीक्षण करने गए थे। उन्होंने कहा कि इस स्थान की प्रकृति हमेशा से मंदिर की रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की भावनाओं का भी ध्यान रखा है और उन्हें सरकार से मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान माँगने का सुझाव दिया है।
फैसले का महत्व
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश में ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को लेकर कानूनी विवाद कई अदालतों में विचाराधीन हैं। धार स्थित भोजशाला परिसर वर्षों से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। गौरतलब है कि ASI की जाँच रिपोर्ट में परिसर में हिंदू धार्मिक संरचनाओं के प्रमाण पाए गए थे, जिसे अदालत ने अपने निर्णय का आधार बनाया।
आगे की राह
धार्मिक नेताओं और VHP का कहना है कि अब देवी सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। आलोक कुमार ने भरोसा जताया कि सरकार न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन करेगी। यह देखना होगा कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देता है या नहीं।