भोजशाला मंदिर फैसला: साध्वी ऋतंभरा बोलीं — 'सत्य की जीत, सनातन समाज को बधाई'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भोजशाला मंदिर फैसला: साध्वी ऋतंभरा बोलीं — 'सत्य की जीत, सनातन समाज को बधाई'

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार की भोजशाला को वाग्देवी सरस्वती मंदिर स्थल घोषित किया। साध्वी ऋतंभरा, साध्वी निरंजन ज्योति, वेद आचार्य रामस्वरूप महाराज और VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने फैसले का स्वागत किया। अब देवी सरस्वती की प्रतिमा की पुनर्स्थापना की तैयारी शुरू होने की बात कही जा रही है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार की भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी सरस्वती मंदिर स्थल घोषित किया।
पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा ने कहा — 'सत्य की जीत हुई है, भोजशाला हमें मिल गई।' देवी सरस्वती की प्रतिमा जल्द वापस लाकर भोजशाला में स्थापित किए जाने की घोषणा।
VHP के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा — ASI रिपोर्ट सहित पूरी न्यायिक प्रक्रिया का पालन हुआ।
न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को सरकार से वैकल्पिक मस्जिद स्थल माँगने का सुझाव दिया।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार की भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी सरस्वती मंदिर स्थल घोषित किए जाने के बाद हिंदू धार्मिक और सामाजिक संगठनों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सत्य की जीत है और समस्त सनातन समाज को इसकी बधाई।

साध्वी ऋतंभरा की प्रतिक्रिया

साध्वी ऋतंभरा ने कहा, 'कोई भी वहाँ जाएगा तो समझ में आ जाएगा कि वह हिंदुओं का मंदिर है। भोजशाला हमें मिल गई है।' उन्होंने आगे कहा कि अब जल्द ही देवी सरस्वती की प्रतिमा वापस लौटाई जाएगी और भोजशाला में स्थापित की जाएगी।

अन्य धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया

साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि गुलामी के कालखंड में आक्रांताओं ने धार्मिक स्थानों पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने इस फैसले को 'बहुत ही सुखद' बताया और कहा, 'अच्छे फैसलों से देश का स्वाभिमान जागता है। माँ सरस्वती के आने का हमें पूरा विश्वास है।' उन्होंने न्यायपालिका और वकीलों के प्रति आभार व्यक्त किया।

वेद आचार्य रामस्वरूप महाराज ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह स्थान एक मंदिर का है। उन्होंने कहा, 'यहाँ का एक-एक पत्थर बोल रहा है। वहाँ के पत्थरों पर उस समय से श्लोक अंकित हैं।'

वीएचपी का रुख

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस फैसले को 'बहुत अच्छा' बताया। उन्होंने कहा कि निर्णय सुनाने से पहले अदालत ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट की प्रति सभी पक्षों को उपलब्ध कराई गई और दोनों पक्षों को विस्तार से बहस का अवसर मिला।

आलोक कुमार ने यह भी बताया कि दोनों न्यायाधीश फैसले से पहले स्वयं परिसर का निरीक्षण करने गए थे। उन्होंने कहा कि इस स्थान की प्रकृति हमेशा से मंदिर की रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की भावनाओं का भी ध्यान रखा है और उन्हें सरकार से मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान माँगने का सुझाव दिया है।

फैसले का महत्व

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश में ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को लेकर कानूनी विवाद कई अदालतों में विचाराधीन हैं। धार स्थित भोजशाला परिसर वर्षों से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। गौरतलब है कि ASI की जाँच रिपोर्ट में परिसर में हिंदू धार्मिक संरचनाओं के प्रमाण पाए गए थे, जिसे अदालत ने अपने निर्णय का आधार बनाया।

आगे की राह

धार्मिक नेताओं और VHP का कहना है कि अब देवी सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। आलोक कुमार ने भरोसा जताया कि सरकार न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन करेगी। यह देखना होगा कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे न केवल धार्मिक बल्कि साक्ष्य-आधारित विवाद बनाता है — यह अयोध्या के बाद की न्यायिक प्रवृत्ति की अगली कड़ी है। हालाँकि, असली परीक्षा अब क्रियान्वयन में है: क्या सरकार न्यायालय के आदेश का त्वरित पालन करती है और क्या मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक स्थल की व्यवस्था सुनिश्चित होती है। यह फैसला सामाजिक सौहार्द के लिए उतना ही अहम है जितना कानूनी दृष्टि से — और इसका दीर्घकालिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों समुदायों के साथ संवाद किस तरह आगे बढ़ता है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का फैसला क्या है?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी सरस्वती मंदिर का ऐतिहासिक स्थल घोषित किया है। अदालत ने ASI रिपोर्ट और परिसर के निरीक्षण के आधार पर यह निर्णय दिया।
साध्वी ऋतंभरा ने भोजशाला फैसले पर क्या कहा?
पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि 'सत्य की जीत हुई है' और सनातन समाज को बधाई दी। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही देवी सरस्वती की प्रतिमा वापस लाकर भोजशाला में स्थापित की जाएगी।
VHP का भोजशाला फैसले पर क्या रुख है?
VHP के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने फैसले को 'बहुत अच्छा' बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया, ASI रिपोर्ट सभी पक्षों को दी गई और दोनों न्यायाधीश स्वयं परिसर का निरीक्षण करने गए।
भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष के बारे में अदालत ने क्या कहा?
न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की भावनाओं का ध्यान रखते हुए उन्हें सरकार से मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान माँगने का सुझाव दिया है। VHP के अनुसार, दोनों पक्षों के साथ न्याय हुआ है।
भोजशाला में देवी सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना कब होगी?
साध्वी ऋतंभरा और अन्य धार्मिक नेताओं ने कहा है कि देवी सरस्वती की प्रतिमा 'जल्द' वापस लाकर भोजशाला में स्थापित की जाएगी। हालाँकि, इसकी कोई आधिकारिक तिथि अभी तक घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 31 मिनट पहले
  2. 42 मिनट पहले
  3. 1 घंटा पहले
  4. 1 घंटा पहले
  5. 1 घंटा पहले
  6. 5 घंटे पहले
  7. 6 घंटे पहले
  8. 8 घंटे पहले