स्मित पटेल: अंडर-19 विश्व कप 2012 के हीरो, अब USA क्रिकेट टीम के धुरंधर बल्लेबाज
सारांश
मुख्य बातें
स्मित कमलेशभाई पटेल — वह नाम जो 2012 अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 62 रनों की मैच-परिभाषित पारी से रातोंरात सुर्खियों में आया था — आज संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा हैं। अहमदाबाद, गुजरात में 16 मई 1993 को जन्मे इस दाएं हाथ के विकेटकीपर-बल्लेबाज की कहानी उन हज़ारों भारतीय क्रिकेटरों की प्रतिनिधि है, जिनका हुनर घरेलू क्रिकेट की भीड़ में दब कर रह जाता है।
2012: करियर का सुनहरा मोड़
साल 2012 स्मित पटेल के क्रिकेट जीवन का सबसे निर्णायक वर्ष रहा। उन्होंने उसी वर्ष गुजरात क्रिकेट टीम की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा। इसी साल उन्मुक्त चंद की कप्तानी में खेली भारतीय अंडर-19 टीम ने विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध स्मित की 62 रनों की पारी ने भारत को चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उस पारी ने उन्हें रातोंरात देशभर में पहचान दिलाई।
घरेलू क्रिकेट में लंबा संघर्ष
अंडर-19 की सफलता के बावजूद भारतीय राष्ट्रीय टीम का दरवाज़ा स्मित के लिए कभी नहीं खुला। उन्होंने गुजरात के अलावा त्रिपुरा और गोवा के लिए घरेलू क्रिकेट खेला और लगातार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने की कोशिश करते रहे। यह संघर्ष 2021 तक चला। गौरतलब है कि भारतीय घरेलू क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी है कि अंडर-19 स्तर पर चमकने वाले अनेक खिलाड़ी वरिष्ठ स्तर पर अवसर पाने से वंचित रह जाते हैं — स्मित उनमें से एक बने।
USA का रुख और नई शुरुआत
2021 में स्मित ने BCCI के अंतर्गत होने वाले सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की। इसके पीछे उनकी स्पष्ट मंशा थी — USA क्रिकेट टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना। अमेरिका जाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर वह मंच मिला जिसका वह वर्षों से इंतज़ार कर रहे थे। 2024 में उन्होंने कनाडा के खिलाफ USA की ओर से अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया।
USA के लिए प्रभावशाली आँकड़े
डेब्यू के बाद से स्मित पटेल USA के एकदिवसीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार हो गए हैं। 21 वनडे मैचों की 21 पारियों में उन्होंने 1 शतक और 4 अर्धशतक के साथ कुल 727 रन बनाए हैं। उनका सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर नाबाद 152 रन है। वह मुख्यतः वनडे प्रारूप में खेलते हैं और विकेटकीपिंग की भी ज़िम्मेदारी निभाते हैं।
आगे की राह
33 वर्ष की आयु की दहलीज़ पर खड़े स्मित पटेल उन भारतीय मूल के क्रिकेटरों की बढ़ती पंक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो एसोसिएट देशों के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी जगह बना रहे हैं। यह प्रवृत्ति वैश्विक क्रिकेट के विस्तार और ICC की समावेशी नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। स्मित का सफर बताता है कि प्रतिभा को मंच मिले तो वह देर से ही सही, ज़रूर निखरती है।