क्या अक्षर पटेल इंजीनियर बनने के सपने को छोड़कर भारतीय टीम के दिग्गज ऑलराउंडर बने?
सारांश
Key Takeaways
- अक्षर पटेल का क्रिकेट में सफर प्रेरणादायक है।
- उन्होंने इंजीनियर बनने का सपना छोड़कर क्रिकेट को चुना।
- उनका प्रदर्शन सभी फॉर्मेट में उल्लेखनीय है।
- अक्षर की भूमिका टी20 विश्व कप में महत्वपूर्ण रही।
- उन्हें भविष्य में और भी मौके मिलेंगे।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अक्षर पटेल आज के समय में भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे विश्वसनीय चेहरों में से एक माने जाते हैं। जब भी उन्हें टीम के लिए मौका मिला, उन्होंने गेंद और बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया है। अक्षर पटेल का क्रिकेटर बनने का सपना कभी नहीं था, लेकिन किस्मत ने उन्हें खेल के इस क्षेत्र में एक बड़ा ऑलराउंडर बना दिया।
भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता अन्य खेलों की तुलना में कहीं अधिक है, और 10 में से 9 बच्चे इसी खेल में करियर बनाने का सपना देखते हैं। 20 जनवरी 1994 को आनंद, गुजरात में जन्मे अक्षर की कहानी एकदम अलग है। अक्षर पढ़ाई के प्रति गंभीर थे और बड़े होकर इंजीनियर बनने का सपना देखते थे, लेकिन उन्होंने क्रिकेट खेलना भी जारी रखा। 15 साल की उम्र में, उनके एक दोस्त ने उनकी क्रिकेट प्रतिभा को देखकर उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने की सलाह दी, जिसे उन्होंने गंभीरता से लिया और क्रिकेट पर मेहनत करना शुरू किया।
स्थानीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद, उन्होंने फरवरी 2012 में लिस्ट ए और नवंबर 2012 में गुजरात के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया।
बाएं हाथ के स्पिनर और आक्रामक बल्लेबाज अक्षर पटेल ने घरेलू क्रिकेट में दो वर्षों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद जून 2014 में वनडे और जुलाई 2017 में टी20 में भारत के लिए डेब्यू किया। इन दोनों मौकों पर भारत के कप्तान एमएस धोनी थे, जिन्होंने अक्षर को 'बापू' नाम दिया।
हालांकि, उन्हें टेस्ट में डेब्यू के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने फरवरी 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया, जहां उन्होंने 27 विकेट लेकर अपनी क्षमता साबित की।
वर्तमान में, अक्षर तीनों फॉर्मेट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें कभी-कभी आराम दिया जाता है, लेकिन बीसीसीआई किसी भी बड़े इवेंट में उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती।
टी20 विश्व कप 2024 में भारत को जीत दिलाने में अक्षर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। फाइनल में संघर्ष कर रही भारतीय टीम के लिए, उन्होंने विराट के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी की। पटेल ने 31 गेंद पर 4 छक्कों की मदद से 47 रन की पारी खेली, जो अंत में जीत के लिए बहुत महत्वपूर्ण रही।
अक्षर को अब तक उनकी क्षमता के अनुसार पर्याप्त मौके नहीं मिले हैं। उन्होंने 15 टेस्ट में 4 अर्धशतक के साथ 688 रन और 57 विकेट, 71 वनडे की 49 पारियों में 3 अर्धशतक के साथ 858 रन और 75 विकेट, तथा 85 टी20 मैचों की 52 पारियों में 681 रन और 82 विकेट हासिल किए हैं। अगले 4 से 5 वर्षों में, अक्षर पटेल भारतीय टीम के लिए तीनों फॉर्मेट में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी साबित होंगे।