भोजशाला फैसले के बाद स्वामी जितेंद्रानंद का दावा: मथुरा-काशी पर भी हमारे पास पर्याप्त सबूत

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भोजशाला फैसले के बाद स्वामी जितेंद्रानंद का दावा: मथुरा-काशी पर भी हमारे पास पर्याप्त सबूत

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर घोषित कर ASI का 2003 का आदेश रद्द किया। इस फैसले के बाद अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद ने मथुरा-काशी विवाद पर भी अपना दावा मज़बूत बताया और मुस्लिम संगठनों से संवाद की अपील की।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और हिंदू मंदिर घोषित किया।
ASI का 2003 का आदेश — जिसने मुस्लिम पक्ष को नमाज़ की अनुमति दी थी — न्यायालय ने रद्द किया; मुस्लिम और जैन याचिकाएँ खारिज।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने दावा किया कि मथुरा और काशी के विवादित स्थलों पर भी उनके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं।
संत ने मुस्लिम धार्मिक संगठनों से श्री कृष्ण जन्मभूमि और ज्ञानवापी विवाद में वार्ता की अपील की।
फलाहारी बाबा (दिनेश शर्मा) ने भोजशाला फैसले को कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के लिए 'मिसाल' बताया।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने शुक्रवार, 15 मई को कहा कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का भोजशाला पर आया फैसला उनके उस दीर्घकालिक दावे को सही ठहराता है कि देश के प्रमुख मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई थीं। उन्होंने आगे कहा कि मथुरा और काशी (वाराणसी) के विवादित धार्मिक स्थलों पर भी उनके पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

भोजशाला पर उच्च न्यायालय का फैसला

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और एक हिंदू मंदिर के रूप में मान्यता दी। न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को उस परिसर में नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई थी। साथ ही, हिंदू पक्ष को उस स्थल पर पूजा-अर्चना का विशेष अधिकार प्रदान किया गया। मुस्लिम पक्ष और जैन समुदाय द्वारा दायर याचिकाएँ न्यायालय ने खारिज कर दीं।

स्वामी जितेंद्रानंद की प्रतिक्रिया

स्वामी जितेंद्रानंद ने इस फैसले का स्वागत करते हुए आरोप लगाया कि देवी सरस्वती के मंदिर में नमाज़ पढ़ी जा रही थी, जो हिंदू समुदाय का अपमान था। उन्होंने कहा कि संत समिति हमेशा से मानती रही है कि देश के लोकप्रिय मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई हैं और वे नमाज़ पढ़ने की जगहें नहीं थीं।

उन्होंने सभी मुस्लिम धार्मिक संगठनों से अपील की कि वे मथुरा और काशी के विवादित स्थलों से पीछे हट जाएं। उनके शब्दों में, 'आइए, हम सब साथ बैठकर चर्चा करें, लेकिन आपको मथुरा की श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी की ज्ञानवापी को छोड़ना होगा।'

मथुरा-काशी विवाद से जोड़

हिंदू याचिकाकर्ताओं ने कथित तौर पर दावा किया है कि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद क्रमशः काशी विश्वनाथ और श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिरों के स्थान पर बनाई गई थीं। स्वामी जितेंद्रानंद ने दावा किया कि जिस प्रकार राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद और भोजशाला मामलों में न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दिया, उसी प्रकार इन मामलों में भी उनके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन्होंने देशभर में शांति बनाए रखने की भी अपील की।

अन्य संतों की प्रतिक्रिया

दिनेश शर्मा, जिन्हें 'फलाहारी बाबा' के नाम से जाना जाता है, ने भी उच्च न्यायालय के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुगल शासकों ने गैर-कानूनी तरीके से अनेक मंदिरों पर कब्ज़ा किया और धार्मिक स्थलों को तोड़ा। उनके अनुसार न्यायपालिका के ज़रिए मंदिरों को फिर से स्थापित करने की उम्मीदें जाग उठी हैं।

फलाहारी बाबा ने यह भी कहा कि भोजशाला मामला कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक मिसाल का काम करेगा। उन्होंने इस फैसले की तुलना हिंदुओं के लिए दिवाली से की। गौरतलब है कि ये सभी टिप्पणियाँ हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों की हैं और मुस्लिम पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे मथुरा और काशी जैसे अन्य विवादों के लिए स्वतः मिसाल मानना कानूनी दृष्टि से सरलीकरण है — हर मामले के तथ्य और कानूनी आधार अलग होते हैं। इस पूरी बहस में केवल हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आई है; मुस्लिम पक्ष और जैन समुदाय की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक नहीं हुई, जो संतुलित कवरेज के लिए ज़रूरी है। धार्मिक स्थलों के विवादों में न्यायिक फैसलों को राजनीतिक दावों से अलग रखना मीडिया की ज़िम्मेदारी है, अन्यथा सामाजिक तनाव और गहरा हो सकता है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला क्या है?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और हिंदू मंदिर घोषित किया है। न्यायालय ने ASI के 2003 के आदेश को रद्द कर हिंदू पक्ष को पूजा का विशेष अधिकार दिया और मुस्लिम व जैन याचिकाएँ खारिज कर दीं।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने मथुरा-काशी पर क्या दावा किया?
स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि जिस प्रकार बाबरी मस्जिद और भोजशाला मामलों में न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दिया, उसी प्रकार मथुरा की श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी की ज्ञानवापी मामलों में भी उनके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन्होंने मुस्लिम संगठनों से इन स्थलों पर वार्ता की अपील की।
ASI का 2003 का भोजशाला आदेश क्या था?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 2003 में एक आदेश जारी किया था जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर में नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस आदेश को हाल ही में रद्द कर दिया है।
मथुरा और काशी के विवादित धार्मिक स्थल कौन से हैं?
हिंदू याचिकाकर्ताओं का कथित तौर पर दावा है कि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर के स्थान पर और मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद श्री कृष्ण जन्मस्थान के स्थान पर बनाई गई थी। ये दोनों मामले अभी न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
फलाहारी बाबा ने भोजशाला फैसले पर क्या कहा?
दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी बाबा ने इस फैसले की सराहना करते हुए इसे कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के लिए एक मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि मुगल शासकों ने गैर-कानूनी तरीके से मंदिरों पर कब्ज़ा किया था और अब न्यायपालिका से उम्मीदें जाग उठी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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