पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा होते ही भाकपा (माले) का हमला — 'जनता पर थोपी जा रही सरकारी नाकामियों की कीमत'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) — भाकपा (माले) — ने 15 मई 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी आम जनता पर जानबूझकर थोपा गया बोझ है, जो सरकार की विफल विदेश और आर्थिक नीतियों का परिणाम है। पार्टी की केंद्रीय कमेटी द्वारा जारी बयान में यह वृद्धि 2026 विधानसभा चुनाव परिणामों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ईंधन बचाओ' आह्वान के कुछ ही दिनों बाद लागू होने पर विशेष रूप से आपत्ति जताई गई।
मूल्य वृद्धि का समय और राजनीतिक संदर्भ
भाकपा (माले) के बयान के अनुसार, सरकार लंबे समय से आर्थिक संकट के अस्तित्व से ही इनकार करती रही। पार्टी का कहना है कि चुनावी नतीजों के तुरंत बाद और प्रधानमंत्री के 'ईंधन बचाओ' बयान के कुछ दिन बीतते-बीतते यह मूल्य वृद्धि लागू करना एक विरोधाभासी कदम है। पार्टी के अनुसार, जनता से ईंधन बचाने, सोना कम खरीदने और विदेश यात्राएँ सीमित करने की अपील की जा रही है, जबकि संकट की जड़ें सरकारी नीतियों में हैं।
विदेश नीति और आर्थिक संकट का आरोप
पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति और व्यापारिक हितों को अमेरिका-इज़रायल गुट के करीब ले जाने से आर्थिक संकट और गहरा हुआ है। बयान में कहा गया कि सरकार ईंधन मूल्य वृद्धि को वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जोड़ रही है। हालाँकि पार्टी का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल कीमतों में गिरावट का लाभ कभी आम जनता तक नहीं पहुँचाया गया, बल्कि तेल कंपनियों के मुनाफे को प्राथमिकता दी जाती रही।
कोविड काल का संदर्भ और जवाबदेही का सवाल
भाकपा (माले) ने कोविड महामारी के दौर का हवाला देते हुए कहा कि उस कठिन समय में भी आम लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। पार्टी के अनुसार, एक बार फिर सरकार जवाबदेही से बचते हुए संकट का बोझ जनता पर डाल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब एलपीजी की कमी, रेस्टोरेंट बंद होने, मज़दूरों के पलायन और बढ़ती बेरोज़गारी जैसे आर्थिक संकट के संकेत कथित तौर पर पहले से दिखाई दे रहे हैं।
आम जनता पर असर
पार्टी ने चेताया कि ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी महंगाई को और हवा देगी तथा ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। भाकपा (माले) के अनुसार, खेती, परिवहन और अन्य क्षेत्रों की उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे आम लोगों की आर्थिक परेशानियाँ और गहरी होंगी।
पार्टी की माँगें
भाकपा (माले) ने केंद्र सरकार से तीन स्पष्ट माँगें रखी हैं — पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें तुरंत वापस ली जाएँ; बाज़ार आधारित मूल्य निर्धारण नीति समाप्त की जाए; और ईंधन कीमतों को सरकारी नियंत्रण में लाया जाए। पार्टी की यह माँगें ऐसे समय में आई हैं जब विपक्षी दलों में ईंधन मूल्य वृद्धि के विरोध में एकजुटता बढ़ती दिख रही है।