प्रमोद तिवारी का मोदी सरकार पर हमला, बढ़ती पेट्रोल कीमतें मुनाफाखोरी का उदाहरण

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प्रमोद तिवारी का मोदी सरकार पर हमला, बढ़ती पेट्रोल कीमतें मुनाफाखोरी का उदाहरण

सारांश

पेट्रोल की कीमतों में हालिया वृद्धि पर प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे मुनाफाखोरी करार दिया और कीमतें वापस लेने की मांग की है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी ने सियासी बवाल मचाया है।
प्रमोद तिवारी ने इसे मुनाफाखोरी करार दिया।
सरकार से कीमतें तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भी इस वृद्धि का कारण हैं।
जनता के प्रति सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए गए हैं।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पेट्रोल की कीमतों में हालिया वृद्धि ने सियासी बवाल मचा दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रमोद तिवारी ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने प्रीमियम पेट्रोल पर 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मुनाफाखोरी और अवसरवादिता बताया और सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

प्रमोद तिवारी ने जारी किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110–120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास होने के बावजूद सरकार द्वारा पेट्रोल की दरों में वृद्धि करना जनता के प्रति अन्याय है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई डीलर ऐसा करता, तो उसे मुनाफाखोर कहा जाता, लेकिन जब यही काम सरकार कर रही है, तो क्यों नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरे थे, तब केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं दी थी।

तिवारी के अनुसार, उस समय सरकार ने भारी मुनाफा कमाया और करीब 30 लाख करोड़ रुपए की कमाई का हवाला देते हुए कहा था कि यह राशि पुराने घाटे की भरपाई और भविष्य की तैयारी के लिए है। अब जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर हैं, पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि पूरी तरह से अवसरवादिता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मैं जिम्मेदारी से यह आरोप लगाता हूं कि केंद्र सरकार ने मुनाफाखोरी करते हुए यह निर्णय लिया है। यह जनता के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में विफलता का प्रतीक है।

प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार के इस निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए मांग की कि बढ़ी हुई पेट्रोल की कीमतों को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि आम जनता को कुछ राहत मिल सके।

ज्ञातव्य है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.09 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जो 20 मार्च से लागू हो गई है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड सहित सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने अपने प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट में लगभग 2.09 से 2.35 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल की कीमतें क्यों बढ़ी हैं?
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों के कारण पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं।
प्रमोद तिवारी ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने सरकार पर मुनाफाखोरी और अवसरवादिता का आरोप लगाते हुए कीमतें वापस लेने की मांग की है।
क्या सरकार ने पहले कीमतों में कमी की थी?
नहीं, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरे थे, तब सरकार ने उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं दी।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या है?
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार के निर्णय की कड़ी निंदा की है।
क्या पेट्रोल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है?
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो पेट्रोल की कीमतों में और वृद्धि संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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