भारत में कच्चे तेल की भरपूर उपलब्धता, सामान्य पेट्रोल की कीमतें स्थिर: गौरव वल्लभ
सारांश
Key Takeaways
- भारत में कच्चे तेल का कोई अभाव नहीं है।
- सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं।
- प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का आम जनता पर प्रभाव नहीं।
- भारत की विदेश नीति में शांति और तनाव कम करने पर जोर।
- रुपए पर वैश्विक तनाव का असर, लेकिन अर्थव्यवस्था मजबूत।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देश में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में वृद्धि के मुद्दे पर सियासी चर्चा तेज हो गई है। इस पर भारतीय जनता पार्टी के नेता गौरव वल्लभ ने स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और इसका पर्याप्त भंडार मौजूद है।
उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि प्रीमियम पेट्रोल की रिफाइनिंग प्रक्रिया सामान्य पेट्रोल की तुलना में भिन्न होती है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधे तौर पर आम जनता पर प्रभाव नहीं पड़ता। सामान्यत: लोगों के दैनिक जीवन में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें अधिक महत्वपूर्ण होती हैं, जो वर्तमान में स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के पास दो महीने से अधिक का कच्चे तेल का भंडार है, जबकि अन्य कई देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम नियंत्रण में हैं।
पीएम मोदी ने यूएस-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध पर कई देशों के साथ संवाद किया है। इस दौरान उन्होंने शांति और तनाव कम करने पर जोर दिया। गौरव वल्लभ ने भारत की कूटनीतिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों से बातचीत कर शांति और तनाव कम करने की अपील की है। भारत हमेशा से विश्व शांति का समर्थक रहा है और सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मिडिल ईस्ट और गल्फ देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए भारत लगातार वहां के राष्ट्राध्यक्षों के संपर्क में बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के 140 करोड़ नागरिकों का हित और सुरक्षा ही भारत की विदेश, आर्थिक और सामाजिक नीतियों का मूल उद्देश्य है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर गौरव वल्लभ ने कांग्रेस नेता शशि थरूर की प्रशंसा की है। थरूर ने कहा है कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर भारत की चुप्पी समझदारी भरी कूटनीति है। गौरव वल्लभ ने व्यंग्य करते हुए कहा कि थरूर को राहुल गांधी को विदेश नीति की 'ट्यूशन' देनी चाहिए। उन्होंने हंसते हुए कहा कि यदि राहुल गांधी दिल्ली में नहीं, बल्कि शिमला में हैं, तो थरूर को वहीं जाकर उन्हें चाय-पकौड़े के साथ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की समझ देनी चाहिए।
डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी पर गौरव वल्लभ ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण रुपए पर अस्थायी दबाव जरूर पड़ा है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर टिकी हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अर्थव्यवस्था में किसी प्रकार की अफरातफरी नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।