अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 6 वर्षों में 1,032 अंग-ऊतक दान, 240 दाताओं ने दिया नया जीवन
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने 15 मई 2026 को खुलासा किया कि पिछले छह वर्षों में उसके अंगदान कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 1,032 अंग और ऊतक दान किए जा चुके हैं — जो इसे भारत के शव-आधारित अंगदान के सबसे सक्रिय केंद्रों में से एक बनाता है। अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि 240 दाताओं के माध्यम से यह उपलब्धि हासिल हुई है।
ताज़ा मामला: मेहसाणा के युवा ड्राइवर का अंगदान
मेहसाणा जिले के 29 वर्षीय ड्राइवर धर्मेंद्र दरबार को 14 मई को ब्रेन डेड घोषित किया गया। वे 4 मई को कड़ी के पास हुई एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे और तब से सिविल अस्पताल में उपचाराधीन थे। मेडिसिन विभाग के डॉ. जीतू पारिख और उनकी टीम ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, परंतु उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
आम नागरिक पी.एस. पटेल और परिवार के सदस्यों महेंद्रभाई झाला तथा लालसिंह झाला की काउंसलिंग के बाद धर्मेंद्र की पत्नी, भाई और बहन ने अंगदान की सहमति दी। इस निर्णय से एक लिवर और दो किडनी दान किए गए, जिससे तीन गंभीर रोगियों को जीवन का नया अवसर मिल सकेगा।
छह वर्षों की उपलब्धि: आँकड़ों में
डॉ. जोशी के अनुसार, 240 दाताओं से अब तक 794 अंग प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त 194 नेत्रदान और 44 त्वचा दान सहित कुल 238 ऊतक प्राप्त हुए, जिससे समग्र आँकड़ा 1,032 तक पहुँचा।
अंग-वार विवरण इस प्रकार है: 443 किडनी, 214 लिवर, 76 हृदय, 34 फेफड़े, 19 अग्न्याशय, 6 हाथ और 2 छोटी आंतें — ये सभी अलग-अलग अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवनरक्षक प्रत्यारोपण संभव कर सके।
जागरूकता और सामाजिक बदलाव
अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम ने न केवल प्रत्यारोपण की संख्या बढ़ाई है, बल्कि मृतक अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में अंगदान की दर विश्व औसत से काफी कम बनी हुई है और प्रतीक्षा सूची में हज़ारों मरीज़ हैं।
इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि
एक अलग निर्णय में, गुजरात सरकार ने सिद्धपुर डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड ₹12,000 से बढ़ाकर ₹20,160 कर दिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि यह फैसला इंटर्नशिप के दौरान युवा डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे कार्य को सम्मान देने के लिए लिया गया है।
पानशेरिया ने बताया कि कॉलेज के डीन और प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और स्वास्थ्य विभाग से सरकारी मानकों के अनुरूप स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग की थी, जिसके बाद इस संशोधन को मंजूरी दी गई। बढ़ा हुआ स्टाइपेंड उन इंटर्न डॉक्टरों की सहायता के लिए है जो प्रशिक्षण के दौरान निरंतर क्लिनिकल ड्यूटी और मरीजों की देखभाल में लगे रहते हैं।
आगे की राह
सिविल अस्पताल का लक्ष्य अंगदान के प्रति सामाजिक संकोच को और कम करना और काउंसलिंग नेटवर्क को और सुदृढ़ करना है। गौरतलब है कि धर्मेंद्र दरबार के परिवार जैसे परिवारों का साहसिक निर्णय ही इस कार्यक्रम की असली ताकत है, और ऐसे उदाहरण भविष्य में अधिक परिवारों को प्रेरित कर सकते हैं।