मिजोरम के ब्रेन-डेड युवक मोइंगसुहा के अंगदान से अहमदाबाद में 4 मरीजों को मिली नई जिंदगी
सारांश
Key Takeaways
- मिजोरम के मामित जिले के 24 वर्षीय मोइंगसुहा को 28 अप्रैल 2026 को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में ब्रेन-डेड घोषित किया गया।
- उनकी माँ ने साहस दिखाते हुए अंगदान की अनुमति दी, जिससे 4 मरीजों को नई जिंदगी मिलेगी।
- दान किए गए अंगों में दिल, लिवर और दोनों किडनी शामिल हैं; प्रत्यारोपण यू.एन. मेहता अस्पताल और किडनी अस्पताल में होगा।
- यह अहमदाबाद सिविल अस्पताल का 238वाँ अंगदान है; अब तक कुल 1,026 अंग एवं ऊतक दान हो चुके हैं।
- अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने इसे देशभर में बढ़ती अंगदान जागरूकता का प्रमाण बताया।
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इंसानियत की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। मिजोरम के मामित जिले के 24 वर्षीय युवक मोइंगसुहा के परिवार ने 28 अप्रैल 2026 को उनके ब्रेन-डेड घोषित होने के बाद अंगदान का साहसी निर्णय लिया, जिससे 4 जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की राह खुल गई। यह अहमदाबाद सिविल अस्पताल का 238वाँ अंगदान है।
कैसे हुआ हादसा
मोइंगसुहा मिजोरम के मामित जिले के तुइपुइबारी गाँव के रहने वाले थे। वे अपनी बहन से मिलने अहमदाबाद आए हुए थे। इसी दौरान मेम्को ब्रिज के पास एक गंभीर सड़क दुर्घटना में उनके सिर पर गहरी चोट आई। उन्हें 25 अप्रैल को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद 28 अप्रैल को उन्हें ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया।
परिवार का साहसी निर्णय
इस गहरे दुख की घड़ी में मोइंगसुहा की माँ ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने बेटे के अंग दान करने की अनुमति दी। उनके इस निर्णय ने न केवल अपने पुत्र की स्मृति को अमर कर दिया, बल्कि चार अलग-अलग मरीजों के जीवन में आशा की किरण जगाई। यह फैसला उस समय और भी प्रेरणादायक बन जाता है जब परिवार स्वयं सदमे में हो।
कौन से अंग दान किए गए
डॉक्टरों के अनुसार, मोइंगसुहा का दिल, लिवर और दोनों किडनी दान की गईं। इन अंगों का प्रत्यारोपण अहमदाबाद के यू.एन. मेहता अस्पताल और सिविल मेडिसिटी परिसर के किडनी अस्पताल में किया जाएगा। इस प्रकार कुल 4 मरीजों को जीवनदान मिलेगा।
अस्पताल का रिकॉर्ड और विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने इस घटना को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मिजोरम के इस परिवार का निर्णय यह दर्शाता है कि देश के हर हिस्से में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह इस अस्पताल का 238वाँ अंगदान है और अब तक यहाँ कुल 1,026 अंग एवं ऊतक दान किए जा चुके हैं — जिनमें 212 लिवर, 439 किडनी, 76 दिल, 34 फेफड़े, 6 हाथ, 2 छोटी आँत, 194 आँखें और 44 स्किन शामिल हैं।
अंगदान जागरूकता का व्यापक संदेश
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में अंगदान की दर अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है। एक परिवार का यह कदम समाज को यह संदेश देता है कि मृत्यु भी जीवन का स्रोत बन सकती है। आने वाले समय में इस प्रकार की घटनाएँ अंगदान आंदोलन को और गति दे सकती हैं।