अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल की अद्भुत उपलब्धि: 5 साल में 1000 ऑर्गन और टिश्यू दान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल की अद्भुत उपलब्धि: 5 साल में 1000 ऑर्गन और टिश्यू दान

सारांश

अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल ने 1000 ऑर्गन और टिश्यू डोनेशन का ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। यह उपलब्धि न केवल राज्य बल्कि देश के लिए भी गर्व का विषय है। जानिए इसके पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल ने 1000 ऑर्गन और टिश्यू डोनेशन का मील का पत्थर पार किया।
रमेशभाई बाबूभाई तड़वी का डोनेशन 1000वां था।
745 से अधिक मरीजों को नई जिंदगी मिली है।
सिविल हॉस्पिटल ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते हैं।
ऑर्गन डोनेशन मानवता की एक बेहतरीन मिसाल है।

अहमदाबाद, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल ने ऑर्गन डोनेशन के क्षेत्र में एक अनूठी और ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। २७ दिसंबर २०२० को प्रारंभ हुए ऑर्गन डोनेशन प्रोग्राम ने आज महज़ ५ साल और ८७ दिन में कुल १००० ऑर्गन और टिशू डोनेशन का आंकड़ा छू लिया है। इस सफलता ने सिविल हॉस्पिटल को न केवल गुजरात में, बल्कि पूरे देश में ऑर्गन डोनेशन के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्थान के रूप में स्थापित कर दिया है।

यह महत्वपूर्ण १०००वां डोनेशन संखेड़ा के ६० वर्षीय रमेशभाई बाबूभाई तड़वी के ऑर्गन डोनेशन के साथ पूरा हुआ है। एक दुर्घटना के बाद इलाज के दौरान उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया था। इस दुखद परिस्थिति में भी उनकी पत्नी नाथीबेन और परिवार ने उनके ऑर्गन दान करने का दिल को छू लेने वाला निर्णय लिया, जिससे मानवता की एक अद्भुत मिसाल प्रस्तुत हुई। इस डोनेशन से एक लिवर, दो किडनी और दो आंखें प्राप्त हुई हैं, जो जरूरतमंद मरीजों के लिए नई ज़िंदगी की उम्मीद बनेंगी।

सिविल हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी का कहना है कि ऑर्गन डोनेशन केवल एक दान नहीं है, बल्कि ‘ज़िंदगी से ज़िंदगी’ का एक पवित्र सफर है। अब तक कुल १००० डोनेशन आए हैं, जिनमें ७६७ ऑर्गन और २३३ टिशू शामिल हैं, जिससे ७४५ से ज्यादा मरीजों को नई ज़िंदगी मिली है।

हॉस्पिटल की इस सफलता के पीछे टीमवर्क, पारदर्शिता और बहुत अच्छे समन्वय का योगदान है। इस परफॉर्मेंस को नेशनल लेवल पर भी मान्यता मिली है, जिसमें सिविल हॉस्पिटल को साल २०२२-२३ में ऑर्गन डोनेशन के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए नॉट्टो और रोट्टो द्वारा बेस्ट ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर, बेस्ट ब्रेन डेड कमेटी और बेस्ट ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार दिए गए हैं।

७४ ऑर्गन डोनेशन पूर्ण होने पर ऑर्गन डोनर्स के परिवारों और हॉस्पिटल टीम को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने भी सम्मानित किया।

इसकी संख्या कुल २३२ ब्रेन डेड डोनर्स और ८६ मृतक डोनर्स तक पहुंच चुकी है। अब तक ४२७ किडनी, २०६ लिवर, १९२ आंखें, ७३ दिल, ४१ स्किन, ३४ फेफड़े, १९ पैंक्रियास, ६ हाथ और २ आंतें डोनेट की जा चुकी हैं। सबसे ज्यादा ९० ऑर्गन डोनर ४१ से ६० साल के हैं, जबकि १३ से २५ साल के ४४ युवाओं ने भी ऑर्गन डोनेट किए हैं। १७७ मेल ऑर्गन डोनर और ५५ फीमेल ऑर्गन डोनर ने इस सेवा में अपना अमूल्य योगदान दिया है।

हॉस्पिटल ने गुजरात का पहला हैंड डोनेशन, पहला स्मॉल इंटेस्टाइन डोनेशन, एक ही दिन में तीन ऑर्गन डोनेशन और लगातार छह दिनों में छह ऑर्गन डोनेशन जैसे कई रिकॉर्ड बनाए हैं।

ऑर्गन डोनर में से २०३ गुजरात से हैं, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड जैसे राज्यों और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के डोनर भी शामिल हैं।

सिविल हॉस्पिटल अहमदाबाद की यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मानवता की जीती-जागती कहानी है, जहां दुख के क्षणों में बिना किसी स्वार्थ के लिया गया निर्णय कई परिवारों में खुशियों का दीप जलाता है। डॉ. राकेश जोशी के अनुसार, यदि समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ेगी, तो भविष्य में अंगों की कमी के कारण किसी भी मरीज की जान नहीं जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लोगों की जिंदगियों में बदलाव लाने का कार्य किया है। यह उपलब्धि न केवल एक संस्थान के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल ने कितने ऑर्गन डोनेशन किए हैं?
अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल ने 1000 ऑर्गन और टिश्यू डोनेशन किए हैं।
ऑर्गन डोनेशन का कार्यक्रम कब शुरू हुआ था?
यह कार्यक्रम 27 दिसंबर 2020 को शुरू हुआ था।
इस कार्यक्रम का 1000वां डोनेशन किसका था?
1000वां डोनेशन संखेड़ा के रमेशभाई बाबूभाई तड़वी का था।
क्या ऑर्गन डोनेशन से मरीजों को मदद मिलती है?
हां, ऑर्गन डोनेशन से जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिलती है।
सिविल हॉस्पिटल को कौन से पुरस्कार मिले हैं?
सिविल हॉस्पिटल को नॉट्टो और रोट्टो द्वारा कई पुरस्कार मिले हैं, जैसे बेस्ट ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर।
राष्ट्र प्रेस