'मन की बात' से अंगदान जागरूकता में वृद्धि, पीएम मोदी की प्रेरणा: एनओटीटीओ प्रमुख
सारांश
Key Takeaways
- अंगदान से कई जीवन बचाए जा सकते हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी की पहल ने जागरूकता बढ़ाई है।
- एनओटीटीओ का डिजिटल नेटवर्क समन्वय में मदद करता है।
- अंगदान एक मानवीय कार्य है।
- सभी को इसमें भागीदारी करनी चाहिए।
नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) के प्रमुख डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में अंगदान का मुद्दा उठाना एक उदार और प्रेरणादायक पहल है, जो राष्ट्रव्यापी जागरूकता और जनभागीदारी को नई दिशा प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के 131वें एपिसोड के प्रसारण के बाद राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह से सफल प्रत्यारोपण कहानियों को साझा किया, वह समाज के लिए एक मजबूत संदेश है। उन्होंने विशेष रूप से केरल की उस 10 महीने की बच्ची का उदाहरण दिया, जिनके माता-पिता ने अंगदान का निर्णय लेकर चार जीवनों को बचाया।
उन्होंने कहा कि ऐसे भावनात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण अंगदान से जुड़े संकोच और मिथकों को तोड़ने में सहायक होते हैं। यह लोगों को यह समझाने में मदद करता है कि अंगदान करुणा और मानवता का कार्य है, जिससे कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है।
डॉ. कुमार ने दिल्ली की एक महिला का उदाहरण भी दिया, जिनका हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ था। पहले वह एक कदम भी नहीं चल पाती थीं, लेकिन प्रत्यारोपण के बाद उन्होंने न केवल सामान्य जीवन जीना शुरू किया बल्कि केदारनाथ और नीलकंठ की यात्रा भी की और आज अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभा रही हैं।
इसी तरह एक युवक, जिसका हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट हुआ था, पहले हर समय ऑक्सीजन पर निर्भर रहता था, लेकिन अब वह 14,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित नाथुला पास तक दो बार जा चुका है।
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि ट्रांसप्लांट एक ऐसा इलाज है, जो समय पर मिल जाए तो व्यक्ति न केवल स्वस्थ जीवन जी सकता है, बल्कि अपने परिवार और समाज में सक्रिय योगदान भी दे सकता है। उन्होंने कहा कि जब हम मृत्यु के बाद अपने अंगों को जलाते या दफनाते हैं, तो क्यों न उन्हें दान करके किसी और का जीवन बचाया जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अंगदान एक मानवीय कार्य है, जो जाति, धर्म या समुदाय से परे है। सभी को इसमें भागीदारी करनी चाहिए। प्रधानमंत्री द्वारा 'जन भागीदारी' पर दिया गया जोर इस अभियान को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे सकता है।
डॉ. कुमार ने बताया कि देश में अब एक एकीकृत डिजिटल नेटवर्क स्थापित हो चुका है, जो ट्रांसप्लांट अस्पतालों, अंग प्राप्ति केंद्रों, ऊतक बैंकों, राज्य और क्षेत्रीय संगठनों को जोड़ता है। इससे समन्वय, पारदर्शिता और अंगों का समान वितरण सुनिश्चित होता है।
उन्होंने कहा कि एनओटीटीओ राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है, जबकि पांच क्षेत्रीय संगठन और लगभग हर राज्य में राज्य स्तरीय संस्थाएं भी सक्रिय हैं। अस्पतालों और कई समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से यह एक बड़ा नेटवर्क बना है, जो अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने में जुटा है।
डॉ. कुमार ने बताया कि देश में अंगों की आवश्यकता बहुत अधिक है, जबकि दान की संख्या अभी भी कम है। इस अंतर को कम करने के लिए सरकार, संस्थाओं और समाज सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति मृत्यु के बाद अंगदान करके आठ लोगों की जान बचा सकता है। दो किडनी, लिवर, हृदय, दो फेफड़े, अग्न्याशय (पैंक्रियाज) और आंत जैसे जीवनदायी अंग विभिन्न मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं। इसके अलावा कॉर्निया, त्वचा, हड्डी और अन्य ऊतकों के दान से भी कई लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है।
डॉ. कुमार ने लोगों से अपील की कि वे अंगदान की शपथ लें और अपने परिवार को भी अपनी इच्छा के बारे में अवगत कराएं, क्योंकि अंतिम सहमति परिवार की होती है। उन्होंने कहा कि एनओटीटीओ की 24 घंटे की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-114-770 पर कभी भी संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति एनओटीटीओ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आधार सत्यापन के माध्यम से मात्र एक मिनट में अपनी अंगदान प्रतिज्ञा पंजीकृत कर सकते हैं।
डॉ. कुमार ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री की अपील से इस अभियान को नई ऊर्जा प्राप्त होगी और एनओटीटीओ तथा उससे जुड़े सभी राज्य एवं क्षेत्रीय संगठन इस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि समय पर प्रत्यारोपण के जरिए अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।