पादहस्तासन: थकान, तनाव, अकड़न और खराब पाचन से राहत के लिए आयुष मंत्रालय की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने थकान, मानसिक तनाव, शरीर की अकड़न और खराब पाचन जैसी रोज़मर्रा की समस्याओं से राहत पाने के लिए पादहस्तासन को नियमित रूप से अपनाने की सलाह दी है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के बीच मंत्रालय ने यह सुझाव जारी किया है और कहा है कि यह आसन शरीर तथा मन दोनों को स्वस्थ रखने में प्रभावी भूमिका निभाता है। यह जानकारी नई दिल्ली से 13 मई 2026 को सामने आई है।
पादहस्तासन क्यों है ज़रूरी
आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव शरीर में धीरे-धीरे तनाव जमा करते रहते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, पादहस्तासन एक सरल किंतु शक्तिशाली आसन है जो इन समस्याओं की जड़ पर काम करता है। नियमित अभ्यास से शरीर का लचीलापन बढ़ता है, पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है और मन को शांति मिलती है। गौरतलब है कि यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी बताया गया है जो पीठ दर्द या लंबे समय तक बैठने की समस्या से जूझ रहे हैं।
शारीरिक लाभ: रक्त संचार से लेकर पाचन तक
पादहस्तासन एक फॉरवर्ड बेंडिंग पोज़ है जिसमें आगे की ओर गहरा खिंचाव होता है। इससे कमर, पीठ और पैरों की मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है। साथ ही यह आसन पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालकर पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज़ जैसी समस्याओं में राहत देता है। रक्त संचार में सुधार के कारण पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और दिन भर ताज़गी बनी रहती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि पादहस्तासन केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है — यह मन-शरीर के जुड़ाव को भी मज़बूत करता है। नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव में कमी आती है, एकाग्रता बढ़ती है और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार देखा जाता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब शहरी जीवन में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।
पादहस्तासन करने का सही तरीका
इस आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े हों और दोनों पैरों को जोड़ लें। सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें और हाथों को पैरों के पास ज़मीन पर रखने का प्रयास करें। शुरुआत में घुटनों को थोड़ा मोड़ा जा सकता है। कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रुकें, फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएँ। मंत्रालय के सुझाव के अनुसार, इस आसन को रोज़ाना 3 से 5 बार किया जा सकता है।
सावधानियाँ और किसे करनी चाहिए परहेज़
योग विशेषज्ञों ने कुछ अहम सावधानियाँ भी बताई हैं। जिन लोगों को पीठ की गंभीर समस्या, हर्निया या उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) है, उन्हें इस आसन को अपनाने से पहले किसी चिकित्सक या योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। सही मार्गदर्शन में किया गया अभ्यास अधिक सुरक्षित और प्रभावशाली होता है।
आयुष मंत्रालय की यह पहल योग को आम जनजीवन में और अधिक समाहित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है — और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए, तो दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ निश्चित हैं।