एयर इंडिया ने जून से 3 महीनों के लिए शिकागो, सिंगापुर समेत कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एयर इंडिया ने जून से 3 महीनों के लिए शिकागो, सिंगापुर समेत कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं

सारांश

मध्य पूर्व संकट से उपजे ईंधन संकट ने एयर इंडिया को जून से 3 महीनों के लिए शिकागो, सिंगापुर, पेरिस समेत दर्जनों अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करने पर मजबूर किया है। प्रतिदिन 100 उड़ानों की कटौती और ₹22,000 करोड़ के अनुमानित घाटे के साथ, टाटा समूह के नेतृत्व में एयरलाइन का पुनरुद्धार अभी भी कठिन दौर से गुज़र रहा है।

मुख्य बातें

एयर इंडिया ने जून 2026 से 3 महीनों के लिए कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निलंबित कीं; प्रतिदिन करीब 100 उड़ानें कम होंगी।
प्रभावित प्रमुख मार्गों में शिकागो , नेवार्क , सिंगापुर , शंघाई , सैन फ्रांसिस्को , पेरिस और टोरंटो शामिल हैं।
सीईओ कैंपबेल विल्सन ने मध्य पूर्व संकट के कारण जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों को कटौती की वजह बताया।
पिछले 3 वर्षों में नैतिक उल्लंघनों के लिए 1,000 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया।
एयर इंडिया समूह को वित्त वर्ष 2025-26 में ₹22,000 करोड़ से अधिक के घाटे का अनुमान है।

एयर इंडिया ने जून 2026 की शुरुआत से तीन महीनों के लिए कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानें निलंबित करने का निर्णय लिया है। मध्य पूर्व संकट के कारण जेट ईंधन की कीमतों में तेज़ उछाल को इस कटौती की मुख्य वजह बताया जा रहा है, जिसके चलते एयरलाइन ने प्रतिदिन करीब 100 उड़ानें कम करने का फैसला किया है।

किन मार्गों पर असर पड़ा

रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली से संचालित जिन अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानें घटाई गई हैं उनमें शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर और शंघाई जैसे प्रमुख गंतव्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सैन फ्रांसिस्को, पेरिस और टोरंटो के लिए भी उड़ान सेवाएँ कम की गई हैं। यह कटौती मुख्य रूप से लंबी दूरी के उन मार्गों पर केंद्रित है जहाँ ईंधन की लागत सबसे अधिक प्रभावशाली होती है।

सीईओ का बयान

एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया कि भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईंधन की बढ़ती कीमतें एयरलाइन को अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में कटौती जारी रखने पर मजबूर कर रही हैं। विल्सन ने कर्मचारियों के साथ आयोजित एक टाउन हॉल बैठक में यह बात कही। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एयरलाइन उद्योग ईंधन लागत और भू-राजनीतिक अनिश्चितता की दोहरी मार झेल रहा है।

आंतरिक अनुशासन और कर्मचारी कार्रवाई

वित्तीय दबाव के साथ-साथ एयर इंडिया ने अपने आंतरिक अनुपालन ढाँचे को भी कड़ा किया है। विल्सन ने खुलासा किया कि एयरलाइन ने पिछले तीन वर्षों में नैतिक कदाचार और नीतिगत उल्लंघनों के लिए 1,000 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त किया है। इन उल्लंघनों में एम्प्लॉई लीजर ट्रैवल (ELT) सिस्टम का दुरुपयोग, विमान से सामान की तस्करी और बिना उचित शुल्क लिए अतिरिक्त सामान की अनुमति देना शामिल है।

गहरा वित्तीय संकट

एयर इंडिया समूह — जिसमें एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस दोनों शामिल हैं — को मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में ₹22,000 करोड़ से अधिक का घाटा होने का अनुमान है। गौरतलब है कि टाटा समूह ने एयर इंडिया का अधिग्रहण कर व्यापक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन यह घाटा दर्शाता है कि पुनरुद्धार की राह अभी लंबी है।

लागत नियंत्रण के उपाय

एयरलाइन ने खर्च घटाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक, विवेकाधीन खर्चों में कटौती और सभी विभागों में गैर-ज़रूरी व्यय को सीमित करना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईंधन की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ नहीं सुधरतीं, एयर इंडिया के लिए अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजनाएँ और जटिल होती जाएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का अनुमानित घाटा और प्रतिदिन 100 उड़ानों की कटौती बताती है कि अंतरराष्ट्रीय विस्तार की महत्वाकांक्षाएँ और परिचालन वास्तविकता के बीच की खाई अभी पाटी नहीं जा सकी है। 1,000 से अधिक कर्मचारियों की बर्खास्तगी आंतरिक अनुशासन की दृष्टि से सराहनीय हो सकती है, लेकिन यह यह भी संकेत देती है कि संस्थागत संस्कृति का रूपांतरण अभी अधूरा है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या टाटा समूह भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में एयर इंडिया को टिकाऊ वित्तीय ज़मीन पर खड़ा कर पाएगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एयर इंडिया ने कौन-कौन सी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की हैं?
एयर इंडिया ने जून 2026 से तीन महीनों के लिए शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर, शंघाई, सैन फ्रांसिस्को, पेरिस और टोरंटो जैसे प्रमुख गंतव्यों की उड़ानें घटाई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुल मिलाकर प्रतिदिन करीब 100 उड़ानें कम की जाएंगी।
एयर इंडिया ने उड़ानें रद्द क्यों कीं?
मध्य पूर्व संकट के कारण जेट ईंधन की कीमतों में तेज़ वृद्धि को इस निर्णय की मुख्य वजह बताया गया है। सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में कटौती जारी रहेगी।
एयर इंडिया को कितना वित्तीय घाटा हो रहा है?
एयर इंडिया समूह को मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में ₹22,000 करोड़ से अधिक का घाटा होने का अनुमान है। इसमें एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस दोनों शामिल हैं।
एयर इंडिया ने कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
एयर इंडिया ने पिछले तीन वर्षों में नैतिक कदाचार और नीतिगत उल्लंघनों के लिए 1,000 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त किया है। इनमें ELT सिस्टम का दुरुपयोग, विमान से सामान की तस्करी और बिना शुल्क अतिरिक्त सामान की अनुमति देना शामिल है।
टाटा समूह एयर इंडिया को कैसे पुनर्गठित कर रहा है?
टाटा समूह के नेतृत्व में एयर इंडिया ने वेतन वृद्धि पर रोक, विवेकाधीन खर्चों में कटौती और गैर-ज़रूरी व्यय सीमित करने जैसे उपाय शुरू किए हैं। साथ ही, आंतरिक अनुपालन को कड़ा कर 1,000 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है।
राष्ट्र प्रेस