सिद्धासन का अभ्यास: जोड़ों के दर्द से राहत और पाचन सुधारने का उपाय

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सिद्धासन का अभ्यास: जोड़ों के दर्द से राहत और पाचन सुधारने का उपाय

सारांश

क्या आप जोड़ों के दर्द और पाचन समस्याओं से परेशान हैं? जानिए कैसे सिद्धासन का नियमित अभ्यास आपके स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है। यह आसन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है।

Key Takeaways

  • सिद्धासन ध्यान और मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह पाचन में सुधार करता है।
  • घुटनों और कूल्हों को स्ट्रेच करता है।
  • सिद्धासन का अभ्यास संतुलित जीवनशैली के लिए सहायक है।
  • नियमित अभ्यास से स्वास्थ्य में सुधार होता है।

नई दिल्ली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्वस्थ जीवनशैली की खोज करने वालों के लिए योग सबसे प्रभावी उपाय है। नियमित योगासन और संतुलित आहार से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मन भी शांत और एकाग्र होता है। इसी संदर्भ में सिद्धासन एक महत्वपूर्ण योगासन है, जिसे प्राचीनकाल से किया जाता रहा है।

सिद्धासन को ध्यान के लिए सबसे महत्वपूर्ण आसनों में से एक माना गया है। 'सिद्ध' का अर्थ है 'पूर्ण' या 'ज्ञानी'। यह एक विशेष योग मुद्रा है जिसमें एक पैर की एड़ी को पेरिनियम पर और दूसरे पैर की एड़ी को जननांग के ऊपर रखकर रीढ़ को सीधा रखते हुए ध्यान केंद्रित किया जाता है।

यदि सिद्धासन का नियमित अभ्यास किया जाए, तो यह पाचन और कई प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों जैसे दमा और मधुमेह में सहायक होता है। साथ ही, यह आसन कूल्हों, घुटनों और टखनों को स्ट्रेच करता है।

इसे करने की विधि सरल है। सबसे पहले, योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठें। फिर बाएं पैर को मोड़कर एड़ी को पेरिनियम के बीच में मजबूती से रखें। दाएं पैर को मोड़ें और इसकी एड़ी को बाएं पैर की एड़ी के ठीक ऊपर रखें। दाएं पैर की उंगलियों को बाएं पैर की जांघ और पिंडली के बीच में फंसा दें। अब रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर को सीधा रखें और आंखें बंद कर ध्यान केंद्रित करें।

आयुष मंत्रालय ने इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण ध्यान आसन बताया है, जो सिद्ध चिकित्सा प्रणाली में शरीर की नाड़ियों का शुद्धिकरण, प्राण ऊर्जा को ऊपर उठाने और मन को शांत करने के लिए प्रमुख यौगिक क्रिया मानी जाती है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने, ब्रह्मचर्य पालन में सहायक, पाचन में सुधार और ध्यान व प्राणायाम के लिए एक स्थिर मुद्रा प्रदान करता है।

इसके नियमित अभ्यास से कई लाभ मिलते हैं। यदि किसी के घुटनों या कूल्हों में दर्द हो, तो सावधानी से करें या कुर्सी का सहारा लें। गहरी सांस लेते समय या प्राणायाम के दौरान उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति सतर्क रहें।

Point of View

बल्कि यह मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यह योग मुद्रा प्राचीन समय से लोगों द्वारा की जा रही है और इसके अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं। इसके नियमित अभ्यास से जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
NationPress
24/02/2026

Frequently Asked Questions

सिद्धासन क्या है?
सिद्धासन एक ध्यान आसन है, जिसमें एक पैर की एड़ी को पेरिनियम पर और दूसरे पैर की एड़ी को जननांग के ऊपर रखकर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
सिद्धासन के क्या लाभ हैं?
सिद्धासन से पाचन में सुधार होता है, यह मानसिक शांति लाता है और कूल्हों, घुटनों और टखनों को स्ट्रेच करता है।
सिद्धासन करने की विधि क्या है?
इसको करने के लिए दंडासन की मुद्रा में बैठें, फिर बाएं पैर को मोड़ें और दाएं पैर को बाएं पैर के ऊपर रखें, और ध्यान केंद्रित करें।
क्या सभी लोग सिद्धासन कर सकते हैं?
यदि किसी को घुटनों या कूल्हों में दर्द हो, तो सावधानी से करें या कुर्सी का सहारा लें।
क्या सिद्धासन का कोई साइड इफेक्ट है?
सिद्धासन का नियमित अभ्यास करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है, लेकिन उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को सावधानी बरतनी चाहिए।
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