मोहन भागवत बोले: राम मंदिर सबकी भागीदारी से बना, अब 'राम राज्य' की जिम्मेदारी समाज की

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मोहन भागवत बोले: राम मंदिर सबकी भागीदारी से बना, अब 'राम राज्य' की जिम्मेदारी समाज की

सारांश

नागपुर में आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि राम मंदिर भारत के करोड़ों लोगों की सामूहिक भागीदारी का प्रतिफल है। अब 'राम राज्य' की स्थापना की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। चंपत राय ने बताया कि मंदिर को १,००० वर्षों तक टिकाऊ बनाने के लिए लोहे-सीमेंट का न्यूनतम उपयोग किया गया।

Key Takeaways

  • डॉ. मोहन भागवत ने २७ अप्रैल को नागपुर में कहा कि राम मंदिर भारत के एक-एक नागरिक की भागीदारी से बना है।
  • उन्होंने 'राम राज्य' की स्थापना की जिम्मेदारी समूचे समाज को सौंपते हुए सतत प्रयास का आह्वान किया।
  • चंपत राय ने बताया कि मंदिर को १,००० वर्षों तक टिकाऊ बनाने के लिए लोहे और सीमेंट का न्यूनतम उपयोग किया गया।
  • मंदिर निर्माण में देशभर के लगभग १० करोड़ लोगों का सहयोग रहा।
  • भैयाजी जोशी ने कहा कि यह मंदिर हिंदू समाज के स्वाभिमान और पुनर्स्थापना का प्रतीक है।
  • भागवत ने २०१४ के लोकसभा चुनाव को भारत की मानसिक स्वतंत्रता का पड़ाव बताते हुए लंदन के 'गार्डियन' के लेख का उल्लेख किया।

नागपुर, २७ अप्रैलराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को नागपुर में स्पष्ट कहा कि अयोध्या का राम मंदिर भारतवर्ष के एक-एक नागरिक की भागीदारी से निर्मित हुआ है और अब 'राम राज्य' की स्थापना की जिम्मेदारी समूचे समाज की है। डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में उन्होंने यह उद्गार व्यक्त किए, जहाँ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में योगदान देने वाली विभूतियों का अभिनंदन किया गया।

समारोह का आयोजन और उपस्थित गणमान्य

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पार्चन से हुआ। इस अवसर पर पूज्य गोविंददेव गिरी महाराज, समिति अध्यक्ष सुरेश 'भैयाजी' जोशी, उपाध्यक्ष श्रीधर गाडगे तथा चंपत राय सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक अभिनंदन समारोह था, बल्कि राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक यात्रा का सामूहिक स्मरण भी था।

भागवत का गोवर्धन उपमा से संदेश

डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मंदिर श्री राम जी की इच्छा से बना है — ठीक उसी प्रकार जैसे गोवर्धन पर्वत भगवान की करांगुली पर उठता है, किंतु तब तक नहीं उठता जब तक बाकी लोग अपनी लकड़ी न लगाएं। उन्होंने कहा,

Point of View

मंजिल नहीं। 'राम राज्य' की जिम्मेदारी समाज पर डालकर भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ की परियोजना अयोध्या तक सीमित नहीं है — यह सांस्कृतिक पुनर्निर्माण का व्यापक एजेंडा है। विरोधाभास यह है कि जब देश सीमा पर तनाव और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब इस तरह के आयोजन राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश देते हैं — लेकिन मुख्यधारा की मीडिया इसके सामाजिक-सांस्कृतिक आयाम को प्रायः नजरअंदाज कर देती है। संघ की शताब्दी यात्रा और राम मंदिर का समागम भारतीय राजनीति और समाज दोनों के लिए एक निर्णायक मोड़ का संकेत है।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

मोहन भागवत ने नागपुर में राम मंदिर के बारे में क्या कहा?
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि राम मंदिर भारत के एक-एक नागरिक की सामूहिक भागीदारी से बना है और अब 'राम राज्य' की स्थापना की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। उन्होंने गोवर्धन उपमा के जरिए बताया कि जैसे भगवान की करांगुली तब काम करती है जब सब मिलकर प्रयास करते हैं, वैसे ही यह मंदिर बना।
राम मंदिर निर्माण में कितने लोगों ने सहयोग किया?
चंपत राय के अनुसार, राम मंदिर निर्माण में देशभर के लगभग १० करोड़ लोगों ने सहयोग दिया। देशभर के कारीगरों, इंजीनियरों और संस्थानों की भागीदारी से यह परियोजना पूरी हुई।
राम मंदिर को कितने वर्षों तक टिकाऊ बनाया गया है?
चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर को १,००० वर्षों तक टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से इसमें लोहे और सीमेंट का न्यूनतम उपयोग किया गया है। पारंपरिक निर्माण पद्धति और आधुनिक इंजीनियरिंग का संयोजन इसकी विशेषता है।
भैयाजी जोशी ने राम मंदिर को किसका प्रतीक बताया?
समिति अध्यक्ष सुरेश 'भैयाजी' जोशी ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिंदू समाज के स्वाभिमान और पुनर्स्थापना का प्रतीक है। उनके अनुसार यह आंदोलन पूरे देश में जनजागरण का माध्यम बना।
डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति का यह कार्यक्रम किसलिए आयोजित किया गया?
यह भव्य सम्मान समारोह श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में योगदान देने वाली विभूतियों के अभिनंदन के लिए आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पार्चन से हुआ।
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