कालेश्वरम घोटाला: रेवंत रेड्डी ने सीबीआई जांच के लिए बनाया दबाव, केसीआर पर कसेगा शिकंजा
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को सीबीआई निदेशक को पत्र लिखने और मुलाकात का समय मांगने के निर्देश दिए।
- २३ अप्रैल को हुई मंत्रिमंडल बैठक में कालेश्वरम परियोजना की सीबीआई जांच के लिए दबाव बनाने का औपचारिक फैसला हुआ।
- वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
- हाई कोर्ट ने पीसी घोष आयोग को अवैध घोषित करने की केसीआर और हरीश राव की याचिका खारिज की।
- राज्य सरकार नौ महीने पहले सीबीआई को पत्र लिख चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
तेलंगाना में कालेश्वरम सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सीबीआई जांच के लिए दबाव बढ़ाने का निर्णय लिया है। हैदराबाद से २७ अप्रैल को मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को औपचारिक ज्ञापन सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।
मुख्य घटनाक्रम: बैठक और कानूनी मशविरा
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने हाल ही में हाई कोर्ट के फैसले के मद्देनजर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी से विस्तृत कानूनी परामर्श लिया गया। सिंघवी ने स्पष्ट किया कि कालेश्वरम मामले से जुड़ा कोई भी मुकदमा किसी अदालत में लंबित नहीं है, इसलिए सीबीआई जांच में कोई कानूनी अड़चन नहीं होगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सीबीआई निदेशक को पत्र लिखें और यदि आवश्यक हो तो मुलाकात का समय मांगकर औपचारिक ज्ञापन सौंपें। यह कदम तब उठाया गया है जब राज्य सरकार पहले ही नौ महीने पहले सीबीआई को पत्र लिख चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राज्य मंत्रिमंडल का फैसला और हाई कोर्ट का रुख
२३ अप्रैल को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह औपचारिक निर्णय लिया गया कि कालेश्वरम परियोजना की त्वरित जांच के लिए सीबीआई पर दबाव बनाया जाएगा। उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव को क्लीन चिट नहीं दी है।
कानूनी विशेषज्ञ ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत ने जस्टिस पी.सी. घोष आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट में सरकार की कोई गलती नहीं पाई। आयोग के निष्कर्षों के विरुद्ध भी हाई कोर्ट ने कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की। गौरतलब है कि केसीआर और हरीश राव ने आयोग को अवैध घोषित करने और उसकी रिपोर्ट रद्द करने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।
केसीआर और हरीश राव पर क्या है आरोप
कालेश्वरम परियोजना तेलंगाना की सबसे महत्वाकांक्षी और महंगी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जिसे बीआरएस सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था। कथित तौर पर इस परियोजना में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुईं और निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया। पीसी घोष आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इन अनियमितताओं को रेखांकित किया था।
यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और बीआरएस के बीच राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार का यह कदम आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, हालांकि सरकार इसे जनहित में उठाया गया कदम बताती है।
तकनीकी अड़चनें और आगे की राह
उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से हाई कोर्ट ने यह अवश्य कहा कि केसीआर और हरीश राव के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। लेकिन सरकार का मानना है कि सीबीआई स्वतंत्र रूप से जांच कर सकती है और इसमें कोई कानूनी रोक नहीं है।
आंकड़ों के अनुसार, यह परियोजना लाखों करोड़ रुपये की लागत वाली है और इसमें हुई कथित गड़बड़ियों का असर तेलंगाना के करोड़ों किसानों पर पड़ा है। आने वाले दिनों में सीबीआई की प्रतिक्रिया और केंद्र सरकार का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा।