नीति आयोग का 'DPI@2047' रोडमैप लॉन्च: रोजगार, उत्पादकता और डिजिटल इंडिया को नई दिशा
सारांश
Key Takeaways
- नीति आयोग ने 28 अप्रैल 2026 को 'DPI@2047 फॉर विकसित भारत' रोडमैप जारी किया।
- रोडमैप दो चरणों में बँटा है — DPI 2.0 (2025–2035) और DPI 3.0 (2035–2047); फिलहाल फोकस DPI 2.0 पर।
- MSME, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य में 8 बड़े बदलाव चिह्नित; क्रेडिट, ऊर्जा और सरकारी डिलीवरी सिस्टम भी सुदृढ़ होंगे।
- क्रियान्वयन के 4 मुख्य स्तंभ: जिला स्तर पर मांग, तकनीकी उद्यमिता, AI उपयोग और डेटा का लोकतंत्रीकरण।
- रोडमैप एकस्टेप फाउंडेशन और डेलॉइट के सहयोग से तैयार किया गया है।
- नीति आयोग उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा — फोकस अब GDP से उत्पादकता पर स्थानांतरित हो चुका है।
नीति आयोग ने 28 अप्रैल 2026 को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के अगले चरण के लिए एक व्यापक रणनीतिक रोडमैप जारी किया, जिसका उद्देश्य देश में समावेशी, उत्पादकता-आधारित और रोजगार-केंद्रित विकास को गति देना है। 'DPI@2047 फॉर विकसित भारत' शीर्षक से जारी इस दस्तावेज़ को एकस्टेप फाउंडेशन और डेलॉइट के सहयोग से तैयार किया गया है।
रोडमैप में क्या है
रोडमैप में दो चरण निर्धारित किए गए हैं। पहला चरण DPI 2.0 (2025–2035) है, जो रोजगार और आजीविका पर आधारित विकास को बढ़ावा देगा। दूसरा चरण DPI 3.0 (2035–2047) है, जिसका लक्ष्य व्यापक राष्ट्रीय समृद्धि हासिल करना है। फिलहाल नीति आयोग का पूरा ध्यान DPI 2.0 पर केंद्रित है।
नीति आयोग के अनुसार, DPI 2.0 के तहत एमएसएमई, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सुधार के लिए आठ बड़े बदलावों की पहचान की गई है। इसके अतिरिक्त क्रेडिट, ऊर्जा और सरकारी योजनाओं की डिलीवरी प्रणालियों को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
क्रियान्वयन के चार मुख्य स्तंभ
रोडमैप को लागू करने के लिए चार प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं — जिला स्तर पर डिजिटल मांग को बढ़ाना, टेक्नोलॉजी उद्यमिता को प्रोत्साहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग, और डेटा, डिजिटल पेमेंट, मानव संसाधन एवं AI के लोकतंत्रीकरण के ज़रिए विभिन्न क्षेत्रों में सुधार। इसका मूल उद्देश्य डिजिटल प्रणाली को पहचान और भुगतान से आगे बढ़ाकर रोजगार, उत्पादकता और बाज़ार तक पहुँच के दायरे में लाना है।
विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों की राय
सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि अब तकनीकी नेतृत्व इस बात पर निर्भर करेगा कि विज्ञान और नवाचार को कितनी प्रभावी रूप से आम लोगों तक पहुँचाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का DPI पहले ही बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक काम कर चुका है और अब अगले चरण में नई तकनीकों को जिम्मेदारी के साथ लागू करना अनिवार्य है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि अब फोकस केवल जीडीपी वृद्धि से हटकर उत्पादकता पर आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेहतर रोजगार, आय और जीवन स्तर के लिए उत्पादकता बढ़ाना अनिवार्य है और DPI इस दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।
नीति आयोग की सीईओ निधि छिब्बर ने कहा कि जब राज्य तेज गति से विकास करेंगे, तभी देश और अधिक तेज़ी से आगे बढ़ेगा, और DPI इस प्रक्रिया में सेतु का काम करेगा।
नीति आयोग की डिस्टिंग्विश्ड फेलो देबजानी घोष ने कहा कि यह रोडमैप भारत को डिजिटल पहुँच से आगे ले जाकर उत्पादकता और रोजगार-आधारित विकास की ओर अग्रसर करेगा, जिससे 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी।
व्यापक संदर्भ और महत्व
गौरतलब है कि भारत का DPI — जिसमें आधार, UPI और DigiLocker शामिल हैं — पहले से ही वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है। यह रोडमैप ऐसे समय में आया है जब देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, भरोसेमंद डेटा और इनोवेशन के संयोजन से यह रोडमैप AI जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को आम नागरिकों और छोटे व्यवसायों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।
आगे की राह
यह रोडमैप स्पष्ट करता है कि भविष्य का विकास केवल नई तकनीकों के निर्माण से नहीं, बल्कि ऐसी एकीकृत प्रणालियों से होगा जो सभी तकनीकों को जोड़कर तेज़ी से अधिकतम लोगों तक लाभ पहुँचाएँ। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकारें और निजी क्षेत्र इस रूपरेखा को ज़मीनी स्तर पर कितनी तत्परता से लागू करते हैं।