हजारीबाग भूमि घोटाला: झारखंड हाईकोर्ट ने निलंबित IAS विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज, 11 महीने से जेल में बंद

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हजारीबाग भूमि घोटाला: झारखंड हाईकोर्ट ने निलंबित IAS विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज, 11 महीने से जेल में बंद

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग भूमि घोटाले में निलंबित IAS विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। करीब 11 महीनों से जेल में बंद इस अधिकारी पर सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री में DC पद का दुरुपयोग करने का आरोप है। मामले में कुल 73 लोग नामजद हैं और ACB की जांच जारी है।

Key Takeaways

  • झारखंड हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को निलंबित IAS विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज की।
  • चौबे करीब 11 महीनों से जेल में बंद हैं; मामला हजारीबाग में सेवायत भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है।
  • जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार किया।
  • मामले में विधायक प्रदीप प्रसाद सहित कुल 73 लोग नामजद आरोपी हैं।
  • ACB भूमि दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी रखे हुए है।

झारखंड के चर्चित सेवायत भूमि अनियमितता मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे करीब 11 महीनों से जेल में बंद इस अधिकारी की रिहाई की उम्मीदें फिलहाल टूट गई हैं। यह मामला हजारीबाग में सेवायत भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है, जिसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) कर रही है।

मामले का पृष्ठभूमि और आरोप

आरोप है कि विनय चौबे ने हजारीबाग में उपायुक्त (DC) के पद पर तैनाती के दौरान सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री में सक्रिय भूमिका निभाई। ACB का दावा है कि नियमों की अनदेखी कर जमीन के हस्तांतरण में व्यापक अनियमितताएं की गईं, जिससे सरकारी प्रावधानों का सीधा उल्लंघन हुआ। गौरतलब है कि यह मामला झारखंड में भूमि घोटालों की एक लंबी श्रृंखला में एक और कड़ी है, जिसमें वरिष्ठ नौकरशाहों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कथित संलिप्तता सामने आई है।

हाईकोर्ट में सुनवाई का घटनाक्रम

झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की पीठ के समक्ष इस जमानत याचिका पर विस्तृत सुनवाई हुई। पिछले गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखा था, जो अब सुनाया गया है।

ACB की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुमित गड़ोदिया ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता सामने आई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस स्तर पर जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है।

वहीं, विनय चौबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. मजूमदार ने अदालत में तर्क रखा कि उनके मुवक्किल लंबे समय से जेल में बंद हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

मामले में नामजद आरोपी

इस प्रकरण में विनय चौबे के अलावा उनके करीबी सहयोगी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह समेत कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। यह आरोपियों की संख्या इस घोटाले की व्यापकता और जटिलता को उजागर करती है।

जांच की वर्तमान स्थिति और आगे की राह

ACB इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी रखे हुए है और जमीन से जुड़े दस्तावेजों एवं वित्तीय लेन-देन की पड़ताल अभी भी चल रही है। 28 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद विनय चौबे के पास उच्चतर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प शेष है। इस मामले की अगली सुनवाई और जांच की दिशा पर झारखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में गहरी नजर बनी हुई है।

Point of View

73 आरोपियों वाले इस मामले में अभियोजन की असली परीक्षा तब होगी जब ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों की कसौटी पर मामला टिकेगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि जमानत खारिज होना दोष-सिद्धि नहीं है, लेकिन इस फैसले से ACB को जांच पूरी करने का महत्वपूर्ण समय मिल गया है। झारखंड में भूमि अभिलेखों की पारदर्शिता और डिजिटलीकरण की धीमी गति इस तरह के घोटालों की जड़ में है — जब तक इस पर ध्यान नहीं दिया जाता, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

विनय चौबे कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
विनय चौबे झारखंड कैडर के एक निलंबित IAS अधिकारी हैं। उन पर आरोप है कि हजारीबाग में DC पद पर रहते हुए उन्होंने सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री में भूमिका निभाई और सरकारी नियमों का उल्लंघन कर जमीन हस्तांतरण में अनियमितताएं कीं।
झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत क्यों खारिज की?
ACB के विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता है, जिससे जमानत मिलने पर जांच प्रभावित हो सकती है। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस तर्क को स्वीकार करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
हजारीबाग सेवायत भूमि घोटाले में कितने लोग आरोपी हैं?
इस मामले में कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें विनय चौबे के अलावा उनके सहयोगी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचल अधिकारी शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह शामिल हैं।
ACB इस मामले में आगे क्या करेगी?
ACB भूमि से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी रखे हुए है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद एजेंसी को जांच पूरी करने का और समय मिल गया है। मामले की अगली कड़ी ट्रायल कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुति के दौरान सामने आएगी।
विनय चौबे के पास अब क्या कानूनी विकल्प हैं?
झारखंड हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद विनय चौबे के पास भारत के सर्वोच्च न्यायालय में जमानत के लिए अपील करने का विकल्प शेष है। हालांकि, मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए यह राह भी आसान नहीं होगी।
Nation Press