31 जुलाई 2026
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हजारीबाग जमीन घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित IAS विनय चौबे को दी सशर्त जमानत, साढ़े तेरह महीने बाद खुलेगी जेल

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हजारीबाग जमीन घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित IAS विनय चौबे को दी सशर्त जमानत, साढ़े तेरह महीने बाद खुलेगी जेल

सारांश

झारखंड के निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट ने हजारीबाग जमीन घोटाले में साढ़े तेरह महीने बाद सशर्त जमानत दी। 73 आरोपियों वाले इस मामले में वनभूमि के अभिलेखों में कथित हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों से जमीन हस्तांतरण के आरोप हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 को निलंबित IAS विनय कुमार चौबे को हजारीबाग जमीन घोटाले में सशर्त जमानत दी।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम.
पंचोली की पीठ ने आदेश पारित किया; नवंबर 2025 से जेल में बंद थे।
जमानत शर्त: देश से बाहर न जाएं, गवाहों से संपर्क न करें, जाँच में सहयोग करें।
एसीबी के कांड संख्या 11/2025 में 73 आरोपी ; वनभूमि और खासमहल जमीन के अभिलेखों में कथित हेरफेर का आरोप।
विनय चौबे झारखंड के शराब घोटाले में भी आरोपी हैं; 20 मई 2025 को गिरफ्तार किए गए थे।
दोनों मामलों की जाँच एसीबी द्वारा जारी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड के हजारीबाग जमीन घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को 31 जुलाई 2026 को सशर्त जमानत प्रदान कर दी, जिससे उनके करीब साढ़े तेरह महीने की न्यायिक हिरासत के बाद जेल से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत यह आदेश पारित किया।

जमानत की शर्तें

सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत देते हुए विनय चौबे पर कई कड़ी शर्तें आरोपित की हैं। उन्हें बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें जाँच में पूर्ण सहयोग देना होगा और मामले के किसी भी गवाह से संपर्क करने अथवा उन्हें प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो राज्य सरकार को सक्षम अदालत में जमानत निरस्त कराने की स्वतंत्रता होगी।

मुख्य घटनाक्रम

झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद विनय चौबे ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि वह नवंबर 2025 से जेल में हैं और इसी मामले के सह-आरोपी विनय सिंह तथा उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात सशर्त जमानत मंजूर की।

हजारीबाग जमीन घोटाला क्या है

यह मामला उस कालखंड से जुड़ा है जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त के पद पर कार्यरत थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्राथमिकी के अनुसार, वनभूमि और खासमहल जमीन के सरकारी अभिलेखों में कथित हेरफेर कर उनकी प्रकृति बदली गई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन निजी व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित की गई।

एसीबी ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है, जिसमें विनय चौबे समेत कुल 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जाँच एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन, भूमि हस्तांतरण और सरकारी अभिलेखों में बदलाव की जाँच कर रही है।

शराब घोटाले से भी है संबंध

विनय चौबे झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले में भी आरोपी हैं। एसीबी ने उन्हें 20 मई 2025 को करीब छह घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले में गिरफ्तारी के 92 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें एसीबी की विशेष अदालत से वैधानिक जमानत मिल गई थी, परंतु हजारीबाग जमीन घोटाले की प्राथमिकी के कारण वह जेल से रिहा नहीं हो पाए थे।

गौरतलब है कि विनय चौबे झारखंड में उत्पाद विभाग के सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके हैं। दोनों मामलों की जाँच फिलहाल एसीबी द्वारा जारी है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की सशर्त जमानत के बाद विनय चौबे को जमानत की शर्तों का पालन करते हुए जेल से बाहर आने की अनुमति मिलेगी। हालाँकि, हजारीबाग जमीन घोटाले और शराब घोटाले, दोनों मामलों में विचारण प्रक्रिया जारी रहेगी। जमानत शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में राज्य सरकार पुनः जमानत निरस्त करा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों ही जाँच एजेंसी की तैयारी पर सवाल खड़े करते हैं। जब 73 आरोपियों वाले मामले में सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी हो, तो एकल आरोपी को असीमित समय तक जेल में रखने का तर्क कमज़ोर पड़ता है। असली परीक्षा अब विचारण की गति और एसीबी के साक्ष्य की मज़बूती होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत क्यों मिली?
झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद विनय चौबे ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। अदालत ने नवंबर 2025 से हिरासत की अवधि और सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिलने के तथ्य को देखते हुए सशर्त जमानत मंजूर की।
हजारीबाग जमीन घोटाला मामला क्या है?
यह मामला उस समय का है जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त थे। एसीबी की प्राथमिकी के अनुसार, वनभूमि और खासमहल जमीन के सरकारी अभिलेखों में कथित हेरफेर कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन निजी व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित की गई। इस मामले में कुल 73 लोग आरोपी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर कौन-सी शर्तें लगाई हैं?
अदालत ने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं: विनय चौबे बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएंगे, जाँच में पूरा सहयोग देंगे और किसी भी गवाह से संपर्क या उन्हें प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे। शर्त उल्लंघन पर राज्य सरकार जमानत निरस्त करा सकती है।
विनय चौबे शराब घोटाले में कैसे जुड़े हैं?
विनय चौबे झारखंड के शराब घोटाले में भी आरोपी हैं और एसीबी ने उन्हें 20 मई 2025 को छह घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। 92 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल न होने से उन्हें वैधानिक जमानत मिल गई थी, लेकिन जमीन घोटाले की प्राथमिकी के चलते वह जेल में रहे।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
जमानत शर्तों का पालन करते हुए विनय चौबे जेल से बाहर आ सकते हैं, लेकिन हजारीबाग जमीन घोटाले और शराब घोटाले दोनों में विचारण प्रक्रिया जारी रहेगी। एसीबी कथित वित्तीय लेनदेन और भूमि हस्तांतरण की जाँच आगे भी करती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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