हजारीबाग जमीन घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित IAS विनय चौबे को दी सशर्त जमानत, साढ़े तेरह महीने बाद खुलेगी जेल
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड के हजारीबाग जमीन घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को 31 जुलाई 2026 को सशर्त जमानत प्रदान कर दी, जिससे उनके करीब साढ़े तेरह महीने की न्यायिक हिरासत के बाद जेल से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत यह आदेश पारित किया।
जमानत की शर्तें
सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत देते हुए विनय चौबे पर कई कड़ी शर्तें आरोपित की हैं। उन्हें बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें जाँच में पूर्ण सहयोग देना होगा और मामले के किसी भी गवाह से संपर्क करने अथवा उन्हें प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो राज्य सरकार को सक्षम अदालत में जमानत निरस्त कराने की स्वतंत्रता होगी।
मुख्य घटनाक्रम
झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद विनय चौबे ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि वह नवंबर 2025 से जेल में हैं और इसी मामले के सह-आरोपी विनय सिंह तथा उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात सशर्त जमानत मंजूर की।
हजारीबाग जमीन घोटाला क्या है
यह मामला उस कालखंड से जुड़ा है जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त के पद पर कार्यरत थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्राथमिकी के अनुसार, वनभूमि और खासमहल जमीन के सरकारी अभिलेखों में कथित हेरफेर कर उनकी प्रकृति बदली गई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन निजी व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित की गई।
एसीबी ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है, जिसमें विनय चौबे समेत कुल 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जाँच एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन, भूमि हस्तांतरण और सरकारी अभिलेखों में बदलाव की जाँच कर रही है।
शराब घोटाले से भी है संबंध
विनय चौबे झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले में भी आरोपी हैं। एसीबी ने उन्हें 20 मई 2025 को करीब छह घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले में गिरफ्तारी के 92 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें एसीबी की विशेष अदालत से वैधानिक जमानत मिल गई थी, परंतु हजारीबाग जमीन घोटाले की प्राथमिकी के कारण वह जेल से रिहा नहीं हो पाए थे।
गौरतलब है कि विनय चौबे झारखंड में उत्पाद विभाग के सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके हैं। दोनों मामलों की जाँच फिलहाल एसीबी द्वारा जारी है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय की सशर्त जमानत के बाद विनय चौबे को जमानत की शर्तों का पालन करते हुए जेल से बाहर आने की अनुमति मिलेगी। हालाँकि, हजारीबाग जमीन घोटाले और शराब घोटाले, दोनों मामलों में विचारण प्रक्रिया जारी रहेगी। जमानत शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में राज्य सरकार पुनः जमानत निरस्त करा सकती है।