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क्या झारखंड हाईकोर्ट ने शराब घोटाले के आरोपी सीनियर आईएएस विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज की?

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क्या झारखंड हाईकोर्ट ने शराब घोटाले के आरोपी सीनियर आईएएस विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज की?

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने शराब घोटाले में आरोपी सीनियर आईएएस विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। क्या यह घोटाला और भी गहरा है? जानें इस मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं को।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज की।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने चौबे को गिरफ्तार किया था।
घोटाले में कुल 13 लोग शामिल हैं।
नई एक्साइज पॉलिसी के दौरान गड़बड़ियां सामने आईं।
राज्य सरकार को 129.55 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

रांची, 14 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के शराब घोटाले में आरोपी और निलंबित सीनियर आईएएस विनय चौबे को झारखंड हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। अदालत ने गुरुवार को चौबे की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। याचिका की सुनवाई न्यायाधीश जस्टिस संजय द्विवेदी की अदालत में की गई। विनय चौबे की ओर से अधिवक्ता देवेश आजमानी ने पैरवी की।

याचिका में उन्होंने एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सभी दंडात्मक कार्रवाई रद्द करने की मांग की थी। झारखंड के एंटी करप्शन ब्यूरो ने आईएएस विनय चौबे को 20 मई 2025 को लगभग छह घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले में दर्ज प्रारंभिक एफआईआर में आईएएस विनय चौबे सहित कुल 13 लोगों को नामजद किया गया है।

इस मामले में झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। विनय चौबे पहले झारखंड के उत्पाद विभाग के सचिव, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सचिव और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रह चुके हैं। झारखंड में शराब घोटाले की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब छत्तीसगढ़ की तर्ज पर नई एक्साइज पॉलिसी लागू की गई। इस नीति को लागू करने के लिए, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ करार किया गया था।

जांच में पता चला कि नीति को लागू करने की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं। आरोप है कि एक विशेष सिंडिकेट के लिए शराब के टेंडर दिलाने हेतु टेंडर की शर्तों को मनमाने ढंग से बदला गया। सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ की कंसल्टेंट कंपनी के अधिकारियों के सहयोग से मिलकर झारखंड में शराब की सप्लाई और होलोग्राम सिस्टम के ठेके हासिल किए।

टेंडर लेने वाली कंपनियों द्वारा जमा की गई बैंक गारंटियां भी फर्जी पाई गईं, जिससे राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। झारखंड राज्य बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की आंतरिक अंकेक्षण रिपोर्ट में सामने आया कि सात एजेंसियों ने राज्य सरकार को कुल 129.55 करोड़ रुपये की चपत लगाई।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह मामला न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में यह घटना एक चेतावनी है कि हमें प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या विनय चौबे को जमानत नहीं मिली?
जी हां, झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
शराब घोटाले में कितने लोग शामिल हैं?
इस घोटाले में कुल 13 लोग नामजद हैं, जिनमें सीनियर आईएएस विनय चौबे भी शामिल हैं।
क्या झारखंड की नई एक्साइज पॉलिसी के कारण घोटाला हुआ?
हां, नई एक्साइज पॉलिसी के कार्यान्वयन में गड़बड़ियों के कारण यह घोटाला हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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