7 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड हाईकोर्ट का होटवार जेल यौन शोषण मामले पर सख्त रुख, डीजीपी से दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड हाईकोर्ट का होटवार जेल यौन शोषण मामले पर सख्त रुख, डीजीपी से दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के होटवार जेल में महिला कैदी के साथ जेल अधीक्षक द्वारा कथित यौन शोषण, गर्भधारण और गर्भपात के प्रयास के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने मामले को दबाने की कोशिश पर नाराज़गी जताते हुए डीजीपी से दो सप्ताह में रिपोर्ट माँगी; 8 जून को अगली सुनवाई।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 22 मई को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी के कथित यौन शोषण पर स्वतः संज्ञान लिया।
जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले को जनहित याचिका में बदला।
डीजीपी और राज्य सरकार को दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश; अगली सुनवाई 8 जून ।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यौन शोषण, गर्भधारण और गर्भपात के प्रयास के आरोप लगाए।
गृह विभाग ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जाँच कमेटी गठित की; जेल आईजी और रांची जिला प्रशासन की अलग जाँच भी जारी।
डालसा रांची की टीम पीड़िता और जेल चिकित्सक के बयान दर्ज कर रिपोर्ट सौंप चुकी है।

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में एक महिला कैदी के साथ जेल अधीक्षक द्वारा कथित यौन शोषण के मामले पर 22 मई को कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने मीडिया रिपोर्टों और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के पत्र के आधार पर मामले को जनहित याचिका में तब्दील कर सुनवाई शुरू की और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है।

मुख्य घटनाक्रम

हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि जिस अधिकारी पर कैदियों की सुरक्षा और कल्याण की ज़िम्मेदारी थी, उसी पर यह गंभीर आरोप लगा है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और हाईकोर्ट स्वयं पूरी घटना की निगरानी करेगा। अगली सुनवाई के लिए 8 जून की तारीख निर्धारित की गई है।

मरांडी के आरोप और पत्र

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि जेल की महिला कैदी के साथ यौन शोषण किया गया, वह गर्भवती हो गई और बाद में उसका गर्भपात कराने की कोशिश की गई। अदालत ने इन आरोपों को अत्यंत गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक धरातल पर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह भी नाराज़गी जताई कि इस मामले को जेल प्रशासन के स्तर पर दबाने का प्रयास किया गया।

जाँच कमेटी और प्रशासनिक कार्रवाई

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जाँच कमेटी गठित की है। इस कमेटी में निदेशक (प्रशासन) मनोज कुमार, सहायक कारा निरीक्षक तुषार रंजन गुप्ता और कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं निरीक्षणालय के प्रोबेशन पदाधिकारी चंद्रमोली सिंह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त रांची जिला प्रशासन और जेल आईजी की ओर से भी अलग से जाँच जारी है।

विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका

अदालत को यह भी बताया गया कि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देश पर डालसा (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) रांची की जाँच टीम पहले ही जेल जाकर पीड़िता, जेल पीएलवी (पैरा लीगल वॉलेंटियर) और जेल चिकित्सक के बयान दर्ज कर रिपोर्ट सौंप चुकी है। इसी क्रम में रांची की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्रुति सोरेन द्वारा मामले की न्यायिक जाँच भी की जा रही है।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों — राज्य सरकार, डीजीपी और जाँच एजेंसियों — को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत इन रिपोर्टों की समीक्षा करेगी और आगे की कार्रवाई तय करेगी। यह मामला झारखंड की जेल व्यवस्था में महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सबसे गंभीर पहलू है — क्योंकि यह संस्थागत मिलीभगत की ओर इशारा करती है। तीन समानांतर जाँच एजेंसियाँ बनाना सक्रियता का संकेत है, लेकिन अनुभव बताता है कि बहु-एजेंसी जाँचें अक्सर जवाबदेही को कमज़ोर करती हैं। असली कसौटी यह होगी कि क्या हाईकोर्ट की निगरानी में यह मामला तार्किक परिणाम तक पहुँचता है या फिर रिपोर्टों की फ़ाइलों में दब जाता है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने होटवार जेल मामले में स्वतः संज्ञान क्यों लिया?
अदालत ने मीडिया रिपोर्टों और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें जेल अधीक्षक पर महिला कैदी के साथ यौन शोषण, गर्भधारण और गर्भपात के प्रयास के गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदालत ने मामले को जनहित याचिका में तब्दील कर स्वयं निगरानी का निर्णय लिया।
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिए हैं?
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने डीजीपी और राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित है, जिसमें सभी जाँच एजेंसियों की रिपोर्टों की समीक्षा की जाएगी।
इस मामले की जाँच कौन कर रहा है?
गृह विभाग ने निदेशक (प्रशासन) मनोज कुमार, सहायक कारा निरीक्षक तुषार रंजन गुप्ता और प्रोबेशन पदाधिकारी चंद्रमोली सिंह की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जाँच कमेटी गठित की है। इसके अलावा रांची जिला प्रशासन, जेल आईजी और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्रुति सोरेन द्वारा भी अलग-अलग जाँच की जा रही है।
बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में क्या आरोप लगाए हैं?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में जेल अधीक्षक ने एक महिला कैदी का यौन शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई और बाद में उसका गर्भपात कराने की कोशिश की गई।
डालसा रांची ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
झालसा के निर्देश पर डालसा रांची की जाँच टीम जेल जाकर पीड़िता, जेल पीएलवी (पैरा लीगल वॉलेंटियर) और जेल चिकित्सक के बयान दर्ज कर रिपोर्ट सौंप चुकी है। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के रूप में पेश की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले