क्या रांची की जेल में कैदियों की डांस पार्टी पर हाईकोर्ट सख्त हो गया?
सारांश
Key Takeaways
- जेल प्रशासन की लापरवाही
- हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
- राज्य सरकार की जवाबदेही
- भविष्य की योजनाएं
- जेल सुरक्षा की जांच
रांची, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में शराब और जीएसटी घोटाले के आरोपी कैदियों के डांस के वायरल वीडियो से जुड़ी घटना पर राज्य सरकार और जेल प्रशासन की ओर से प्रस्तुत किए गए जवाब पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है।
कोर्ट ने सरकार द्वारा पेश किए गए हलफनामे को अधूरा बताते हुए कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान के आधार पर दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट शब्दों में पूछा कि जेल की सुरक्षा में इतनी गंभीर चूक के लिए जेल अधीक्षक और जेल महानिरीक्षक की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।
अदालत ने कहा कि यदि जेल के अंदर मोबाइल फोन और इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं तो यह न केवल जेल व्यवस्था बल्कि पूरी न्याय प्रणाली और सुरक्षा तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर एक सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि घटना के समय जेल में मोबाइल जैमर कार्यरत थे या नहीं, सीसीटीवी फुटेज की जांच में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आई है और क्या उन बाहरी व्यक्तियों या कर्मचारियों की पहचान हो पाई है, जिन्होंने कैदियों को ये सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
साथ ही अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जेल प्रशासन ने क्या ठोस और फुलप्रूफ कार्ययोजना तैयार की है।
बता दें कि इससे पहले इसी मामले में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस घटना को 'शर्मनाक' करार दिया था और जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की थी। पूर्व की सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी हाल में कैदियों तक मोबाइल फोन, चार्जर या नशीली वस्तुएं नहीं पहुंचनी चाहिए। इसके अलावा झालसा और पुलिस प्रशासन को जेलों का औचक निरीक्षण करने को भी कहा गया था। राज्य सरकार ने पहले बताया था कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई करते हुए जेलर और एक अन्य कर्मी को निलंबित किया गया है।