4 अगस्त 2026
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चीन के रियल एस्टेट संकट में करोड़ों नागरिक बर्बाद, शी जिनपिंग ने शंघाई दौरे में साधी चुप्पी

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चीन के रियल एस्टेट संकट में करोड़ों नागरिक बर्बाद, शी जिनपिंग ने शंघाई दौरे में साधी चुप्पी

सारांश

चीन का रियल एस्टेट बाज़ार धराशायी हो रहा है — टॉप 100 बिल्डरों की बिक्री 42% गिरी, 9 करोड़ अपार्टमेंट खाली या अधूरे, और नागरिकों की संपत्ति का 70% से ज़्यादा हिस्सा घरों में फँसा है। फिर भी शी जिनपिंग ने शंघाई दौरे में इस संकट का ज़िक्र तक नहीं किया।

मुख्य बातें

चीन के टॉप 100 बिल्डरों की नए घरों की बिक्री में अक्टूबर में साल-दर-साल 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शंघाई दौरे में प्रॉपर्टी बाज़ार की मंदी का कोई उल्लेख नहीं किया।
चीनी अधिकारियों ने निजी डेटा प्रदाताओं को घरों की बिक्री के आँकड़े सार्वजनिक करने से रोका।
देशभर में लगभग 9 करोड़ अपार्टमेंट खाली या अधूरे निर्माण की अवस्था में हैं।
चीनी नागरिक अपनी कुल संपत्ति का 70 प्रतिशत से अधिक घरों में रखते हैं, जिससे मूल्य गिरावट का सीधा असर उनकी क्रय शक्ति पर पड़ रहा है।
हार्वर्ड के प्रोफेसर केनेथ रोगॉफ के अनुसार, रियल एस्टेट और संबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर चीन की कुल मांग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रहे हैं।

चीन के रियल एस्टेट बाज़ार में आई भारी गिरावट ने देश के करोड़ों नागरिकों की जीवनभर की जमा-पूंजी को खतरे में डाल दिया है, जबकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली सरकार इस संकट को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचती दिख रही है। 'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, यह चुप्पी तब और उजागर हुई जब शी जिनपिंग ने शंघाई के हालिया दौरे में जनता को संबोधित करते हुए प्रॉपर्टी बाज़ार की मंदी का एक भी शब्द में उल्लेख नहीं किया।

संकट की गहराई

'द डिप्लोमैट' के लेख में कहा गया है कि 1990 के दशक में घर के मालिकाना हक की व्यवस्था बहाल होने के कुछ ही समय बाद प्रॉपर्टी बाज़ार का यह पतन उन करोड़ों चीनी खरीदारों के लिए एक त्रासदी बन चुका है, जिन्होंने या तो अपने घर गँवा दिए हैं या जो कर्ज़ के इतने बड़े बोझ तले दबे हैं कि न री-फाइनेंसिंग संभव है और न ही प्रॉपर्टी बेचना। विश्लेषण में चेतावनी दी गई है कि अर्थव्यवस्था को गति देने वाले इस अहम क्षेत्र में गिरावट आम नागरिकों की आर्थिक सेहत के लिए गंभीर खतरा है।

बिक्री में भारी गिरावट और आँकड़ों पर पर्दा

चाइना रियल एस्टेट इंफॉर्मेशन के अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर में देश के टॉप 100 बिल्डरों द्वारा नए घरों की बिक्री में साल-दर-साल 42 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद जर्मन समाचार प्रसारक ड्यूश वेले (DW) ने रिपोर्ट किया कि चीनी अधिकारियों ने निजी डेटा प्रदाताओं को घरों की बिक्री के आँकड़े सार्वजनिक करने से रोक दिया है — एक ऐसा कदम जिसे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल के रूप में देखा जा रहा है।

शंघाई में राहत, लेकिन राष्ट्रीय तस्वीर धुंधली

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने मई में रिपोर्ट किया था कि खासकर शंघाई में प्रॉपर्टी की कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति अभी भी चिंताजनक है — देशभर में लगभग 9 करोड़ अपार्टमेंट या तो खाली पड़े हैं या अधूरे निर्माण की अवस्था में हैं। यह अधूरे प्रोजेक्ट्स का बोझ पूरे बाज़ार पर भारी पड़ रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर केनेथ रोगॉफ ने ब्रूकिंग्स पॉडकास्ट ऑन इकोनॉमिक एक्टिविटी में अप्रैल में कहा था, 'रियल एस्टेट चीनी विकास मॉडल की नींव रहा है और अगर आप इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी शामिल करें, तो यह लंबे समय से चीन में कुल मांग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रहा है।' रोगॉफ ने जोर देकर कहा, 'हाउसिंग की कीमतों में गिरावट का मतलब है संपत्ति में भारी गिरावट, क्योंकि चीनी नागरिक अपनी संपत्ति का 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा घरों में रखते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग खुद को काफी गरीब महसूस करते हैं और उसी हिसाब से अपनी खपत कम कर देते हैं।'

आगे क्या

रियल एस्टेट क्षेत्र न केवल चीनी नागरिकों की बचत का सबसे बड़ा ज़रिया रहा है, बल्कि निर्यात के साथ मिलकर यह देश की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख इंजन भी रहा है। यदि सरकार ने पारदर्शिता और राहत उपायों पर ध्यान नहीं दिया, तो घरेलू खपत में और गिरावट और व्यापक आर्थिक दबाव का जोखिम बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो पारदर्शिता की कमी समस्या को सुलझाती नहीं, बल्कि उपभोक्ता विश्वास को और तोड़ती है। 42% बिक्री गिरावट और 9 करोड़ खाली अपार्टमेंट महज़ आँकड़े नहीं हैं — ये उस व्यवस्थागत जोखिम के संकेत हैं जिसे बीजिंग ने दशकों तक निर्यात-नीत विकास के समानांतर चलाया। अब जब यह मॉडल दरक रहा है, तो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि यह संकट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और भारत जैसे उभरते बाज़ारों के लिए भी अप्रत्यक्ष संकेत है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन के रियल एस्टेट बाज़ार में कितनी गिरावट आई है?
चाइना रियल एस्टेट इंफॉर्मेशन के अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर में चीन के टॉप 100 बिल्डरों द्वारा नए घरों की बिक्री में साल-दर-साल 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा देशभर में लगभग 9 करोड़ अपार्टमेंट खाली या अधूरे निर्माण की अवस्था में हैं।
चीनी नागरिकों पर इस संकट का क्या असर पड़ा है?
चीनी नागरिक अपनी कुल संपत्ति का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा घरों में रखते हैं। हार्वर्ड के प्रोफेसर केनेथ रोगॉफ के अनुसार, हाउसिंग कीमतों में गिरावट से लोग खुद को काफी गरीब महसूस करते हैं और अपनी खपत कम कर देते हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
शी जिनपिंग ने शंघाई दौरे में रियल एस्टेट संकट का ज़िक्र क्यों नहीं किया?
'द डिप्लोमैट' के विश्लेषण के अनुसार, चीन की नेतृत्व टीम रियल एस्टेट बाज़ार की गिरावट को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचती दिख रही है। शी जिनपिंग के शंघाई दौरे में इस विषय पर पूर्ण मौन को इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
चीन सरकार ने रियल एस्टेट आँकड़ों पर पाबंदी क्यों लगाई?
ड्यूश वेले की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने निजी डेटा प्रदाताओं को घरों की बिक्री के आँकड़े सार्वजनिक करने से रोक दिया है। यह कदम बाज़ार में नकारात्मक धारणा को फैलने से रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
चीन की अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट की कितनी अहमियत है?
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केनेथ रोगॉफ के अनुसार, रियल एस्टेट और उससे जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर मिलकर चीन की कुल घरेलू मांग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रहे हैं। यह क्षेत्र निर्यात के साथ-साथ चीनी विकास मॉडल का सबसे बड़ा इंजन रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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