चीन के रियल एस्टेट संकट में करोड़ों नागरिक बर्बाद, शी जिनपिंग ने शंघाई दौरे में साधी चुप्पी
सारांश
मुख्य बातें
चीन के रियल एस्टेट बाज़ार में आई भारी गिरावट ने देश के करोड़ों नागरिकों की जीवनभर की जमा-पूंजी को खतरे में डाल दिया है, जबकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली सरकार इस संकट को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचती दिख रही है। 'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, यह चुप्पी तब और उजागर हुई जब शी जिनपिंग ने शंघाई के हालिया दौरे में जनता को संबोधित करते हुए प्रॉपर्टी बाज़ार की मंदी का एक भी शब्द में उल्लेख नहीं किया।
संकट की गहराई
'द डिप्लोमैट' के लेख में कहा गया है कि 1990 के दशक में घर के मालिकाना हक की व्यवस्था बहाल होने के कुछ ही समय बाद प्रॉपर्टी बाज़ार का यह पतन उन करोड़ों चीनी खरीदारों के लिए एक त्रासदी बन चुका है, जिन्होंने या तो अपने घर गँवा दिए हैं या जो कर्ज़ के इतने बड़े बोझ तले दबे हैं कि न री-फाइनेंसिंग संभव है और न ही प्रॉपर्टी बेचना। विश्लेषण में चेतावनी दी गई है कि अर्थव्यवस्था को गति देने वाले इस अहम क्षेत्र में गिरावट आम नागरिकों की आर्थिक सेहत के लिए गंभीर खतरा है।
बिक्री में भारी गिरावट और आँकड़ों पर पर्दा
चाइना रियल एस्टेट इंफॉर्मेशन के अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर में देश के टॉप 100 बिल्डरों द्वारा नए घरों की बिक्री में साल-दर-साल 42 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद जर्मन समाचार प्रसारक ड्यूश वेले (DW) ने रिपोर्ट किया कि चीनी अधिकारियों ने निजी डेटा प्रदाताओं को घरों की बिक्री के आँकड़े सार्वजनिक करने से रोक दिया है — एक ऐसा कदम जिसे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
शंघाई में राहत, लेकिन राष्ट्रीय तस्वीर धुंधली
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने मई में रिपोर्ट किया था कि खासकर शंघाई में प्रॉपर्टी की कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति अभी भी चिंताजनक है — देशभर में लगभग 9 करोड़ अपार्टमेंट या तो खाली पड़े हैं या अधूरे निर्माण की अवस्था में हैं। यह अधूरे प्रोजेक्ट्स का बोझ पूरे बाज़ार पर भारी पड़ रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर केनेथ रोगॉफ ने ब्रूकिंग्स पॉडकास्ट ऑन इकोनॉमिक एक्टिविटी में अप्रैल में कहा था, 'रियल एस्टेट चीनी विकास मॉडल की नींव रहा है और अगर आप इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी शामिल करें, तो यह लंबे समय से चीन में कुल मांग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रहा है।' रोगॉफ ने जोर देकर कहा, 'हाउसिंग की कीमतों में गिरावट का मतलब है संपत्ति में भारी गिरावट, क्योंकि चीनी नागरिक अपनी संपत्ति का 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा घरों में रखते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग खुद को काफी गरीब महसूस करते हैं और उसी हिसाब से अपनी खपत कम कर देते हैं।'
आगे क्या
रियल एस्टेट क्षेत्र न केवल चीनी नागरिकों की बचत का सबसे बड़ा ज़रिया रहा है, बल्कि निर्यात के साथ मिलकर यह देश की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख इंजन भी रहा है। यदि सरकार ने पारदर्शिता और राहत उपायों पर ध्यान नहीं दिया, तो घरेलू खपत में और गिरावट और व्यापक आर्थिक दबाव का जोखिम बना रहेगा।