ग्राहम अधिनियम 2026: रूसी तेल पर 100% 'द्वितीयक शुल्क' के खिलाफ चीन की कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने 19 सितंबर 2026 को अमेरिका के 'रूस और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों पर ग्राहम अधिनियम 2026' पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजिंग संयुक्त राष्ट्र की स्वीकृति और अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार के बिना लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंधों का दृढ़ विरोध करता है। यह कानून 18 सितंबर को अमेरिकी समयानुसार लागू हुआ और रूसी तेल या गैस आयात करने वाले तीसरे देशों पर 100 प्रतिशत तक के 'द्वितीयक शुल्क' लगाने की अनुमति देता है।
कानून में क्या है
ग्राहम अधिनियम 2026 रूस के विरुद्ध मौजूदा प्रतिबंध व्यवस्था को व्यापक रूप से सख्त बनाता है और ईरान पर लागू संबंधित प्रतिबंधों का विस्तार करता है। सबसे उल्लेखनीय प्रावधान वह है जो रूसी तेल या गैस खरीदने वाले किसी भी तीसरे देश पर 100 प्रतिशत तक का 'द्वितीयक शुल्क' लगाने का अधिकार अमेरिकी प्रशासन को देता है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रावधान का सबसे बड़ा निशाना चीन हो सकता है, जो रूस के सबसे बड़े ऊर्जा खरीदारों में शामिल है।
चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि बीजिंग तीसरे पक्षों को 'बहाने' के रूप में इस्तेमाल करते हुए अन्य देशों पर थोपे जाने वाले तथाकथित 'द्वितीयक प्रतिबंधों' को स्वीकार नहीं करता। प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने हमेशा विश्व के देशों के साथ समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग किया है, जो न तो किसी तीसरे पक्ष को लक्षित करता है और न ही किसी बाहरी दबाव के अधीन है।
चीन की चेतावनी और भविष्य की कार्रवाई
प्रवक्ता ने आगाह किया कि चीन अमेरिका की आगामी कार्रवाइयों पर कड़ी नज़र रखेगा और अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता तथा विकास हितों की रक्षा के साथ-साथ चीनी उद्यमों के वैध अधिकारों और हितों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। यह भाषा कूटनीतिक दृष्टि से संभावित जवाबी कदमों का संकेत मानी जाती है।
वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर असर
चीन ने अमेरिका से आग्रह किया कि वह संवाद और परामर्श के ज़रिए स्थिर आर्थिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखे तथा विश्व व्यापार व्यवस्था और वैश्विक औद्योगिक एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता में योगदान दे। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच उथल-पुथल में है। आने वाले हफ्तों में अमेरिकी ट्रेज़री विभाग द्वारा इस कानून के तहत पहली कार्रवाइयों की घोषणा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।